प्रेग्नेंसी में दिखने वाले ये 5 संकेत आपको डरा सकते हैं, जबकि होते हैं सामान्य

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 04, 2018
Quick Bites

  • बार-बार इस प्रकार उल्टियों का आना कि आप कोई भी काम ना कर सकें खतरनाक हो सकता है।
  • विशिष्ट विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि ऐसी स्थितियों में आप कुपोषण के शिकार हो सकते हैं। 
  • विशेषज्ञ ऐसी स्थितियों में आपको उपयुक्त आहार लेने का तरीका बता सकते हैं 

गर्भावस्‍था के नौ महीने महिलाओं के लिए बड़े उतार-चढ़ाव वाले होते हैं, इस दौरान महिलाओं को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। तनाव, वजन बढ़ना, सिर में दर्द होना, मॉर्निंग सिकनेस, भूख न लगना, अनिद्रा जैसी कई परेशानी से माहिलाओं का सामना होता है। लेकिन इन सामान्‍य समस्‍याओं के साथ गर्भावस्‍था के इन नौ महीनों में कुछ खतरे भी होते हैं जिनके बारे में गर्भवती महिला को जानना बहुत जरूरी है, जिससे वह गर्भपात की संभावना को रोक सके। इस लेख में विस्‍तार से जानें खतरों के बारे में। 

 

गर्भावस्‍थ के खतरों को पहचानें

  • यह ज़रूरी है कि गर्भावस्‍था के साथ ही आप गर्भावस्‍था के खतरों को पहचान लें। हालांकि चिकित्सक आपको कुछ संकेत बता देंगे जिससे कि आप गर्भावस्‍था के खतरों को पहचान सकेंगे और इन स्थितियों के खतरे को कम कर सकते हैं।
  • लेकिन एक सवाल जो कि हर गर्भवती महिला करती है वो यह है कि तत्काल चिकित्सा के लक्षण और डाक्टर से मिलने तक की प्रत्याशा को अलग कैसे किया जाये। विशेषज्ञ ऐसी सलाह देते हैं कि कुछ ऐसे लक्षणों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
  • गर्भ के तीसरे महीने के दौरान असहनीय सरदर्द, कभी-कभी आंखों से साफ न दिखना, पेट में सूजन और तेज़ दर्द।
  • इस प्रकार के लक्षण ब्लड प्रेशर के बढ़ने से या यूरीन में प्रोटीन की अधिक मात्रा से हो सकते हैं और यह लक्षण अक्‍सर गर्भावस्‍था के 20वें हफ्ते में होती है।

फीटल किक पर ध्‍यान दें

विशेषज्ञ ऐसी सलाह देते हैं कि अगर बच्चा गर्भ में अधिक घूम नहीं रहा है तो इसका अर्थ है कि उसे प्लेसेन्टा से पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन नहीं मिल रहा है। फीट‍ल किक को गिनकर भी आप बच्चे की गति का अंदाज़ा लगा सकते हैं, लेकिन ऐसी कोई निश्चित गिनती नहीं है कि बच्चे को कितनी फीटल किक करना चाहिए। मोटे तौर पर आपको सिर्फ बच्चे की गति पर ध्यान देना चाहए। बच्चे की गति में किसी अजीब परिवर्तन की स्थिति में चिकित्‍सक की सलाह लेना ज़रूरी हो जाता है।

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गर्भावस्‍था में अधिक पानी आना

कभी-कभी ऐसा एहसास होता है जैसे यूरीन की जगह पानी आ रहा है, लेकिन यह सिर्फ यूटेरस के सूजे होने और ब्लैडर के भारीपन से होता है। वास्तव में यह अलग-अलग स्थितियों पर निर्भर करता है। कभी-कभी यह भाप की तरह निकलता है। अगर पानी अधिक समय तक निकलता है तो शायद आपका पानी की थैली फट गई और ऐसे में आपको तुरंत अस्पताल जाना चाहिए। 

गर्भावस्‍था में देखभाल 

  • गर्भावस्‍था के दौरान अधिक उल्‍टी और कमजोरी
  • बार-बार इस प्रकार उल्टियों का आना कि आप कोई भी काम ना कर सकें खतरनाक हो सकता है।
  • विशिष्ट विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि ऐसी स्थितियों में आप कुपोषण के शिकार हो सकते हैं। इससे आगे चल कर पानी कि कमी हो सकती है और बच्चे के जन्म के दौरान परेशानियां भी हो सकती हैं।
  • लेकिन ऐसी स्थितियों में हमेशा डॉक्‍टर के सम्पर्क में रहने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञ ऐसी स्थितियों में आपको उपयुक्त आहार लेने का तरीका बता सकते हैं जिससे कि मां और होने वाले बच्चे दोनों का स्वास्थ्य अच्छा रहे।

गर्भावस्‍था में फ्लू के संकेत

ऐसा माना गया है कि प्रेग्नेंट महिलाओं में फ्लू का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक रहता है। इसका सामान्य कारण है प्रेग्नेंसी से शरीर का इम्‍यून सिस्‍टम कमजोर हो जाती है। ऐसे में फ्लू से होने वाली परेशानियां भी बढ़ जाती हैं।

फ्लू के सामान्य लक्षण

  • डायरिया
  • गले में दर्द
  • सर्दी
  • खांसी और सर्दी
  • कमज़ोरी
  • नाक का बहना
  • उल्टियां आना

गर्भावस्‍था के दौरान खतरे  

गर्भावस्‍था में रक्त की कमी

विशेषज्ञ ऐसी सलाह देते हैं कि गर्भावस्‍था के दौरान खून अलग-अलग समय पर अलग परिभाषा देता है। अगर आपको मासिक धर्म के समय दर्द होता है या पेट में बहुत तेज दर्द होता है तो यह अस्थानिक गर्भावस्‍था (ऑक्‍टोपिक) के लक्षण हो सकते हैं। इस तरह का गर्भ तब होता है जब अण्डे यूटरस के बाहर निषेचित हो जाते हैं और इससे शुरुआत के 3 महीनों के दौरान सुस्ती का अनुभव होता है। 

  • गर्भावस्‍था के दौरान ब्लीडिंग हमेशा ही एक गंभीर समस्या रहती है लेकिन अगर यह दर्द के साथ होती है तो मिसकैरेज की बहुत अधिक सम्भावना रहती है।
  • गर्भावस्‍थ के दौरान हमेशा ही व्यक्ति स्थितियों को लेकर निश्चिंत नहीं रह सकता।
  • अगर आप बहुत ही असहज महसूस कर रहे हैं तो ऐसे में अपनी आंतरिक भावनाओं को समझें और अपने चिकित्‍सक से सम्पर्क करें।
  • इससे ना केवल आप निश्चित रहेंगे बल्कि आप असुरक्षित लक्षणों को भी पहचान सकेंगे।

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