प्रेग्नेंसी में ये 5 आदतें बढ़ाती हैं सिजोफ्रेनिया रोग का खतरा, जानें कैसे संभव है बचाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 26, 2018
Quick Bites

  • खुद को भूल जाने या पागलपन जैसे लक्षण होते हैं सिजोफ्रेनिया का संकेत।
  • गर्भावस्था में खाई जाने वाली किसी दवा के दुष्प्रभाव से हो सकता है सिजोफ्रेनिया।
  • ज्यादा तनाव के कारण महिला को गर्भावस्था के दौरान सिजोफ्रेनिया हो सकता है।

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को तमाम शारीरिक और मानसिक परेशानियों से गुजरना पड़ता है। बावजूद इसके एक महिला के लिए मां बनने का एहसास सबसे सुखद होता है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में ढेर सारे बदलाव होते हैं, जिनमें से एक प्रमुख बदलाव है हार्मोनल बदलाव, यानी इस दौरान महिलाओं के शरीर में कई नए हार्मोन्स का स्राव होता है और कई हार्मोन्स की मात्रा भी घट-बढ़ जाती है। इसके कारण कई बार महिलाओं को सिजोफ्रेनिया जैसे मानसिक विकार खतरा होता है। इसका एक कारण गर्भावस्था में खाई जाने वाली किसी दवा का दुष्प्रभाव भी हो सकता है। आइए आपको बताते हैं कुछ ऐसी आदतें, जो गर्भावस्था के दौरान आपके लिए खतरनाक हो सकती हैं।

खतरनाक है प्रेग्नेंसी में सिजोफ्रेनिया

सिजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक विकार (साइकेटिक डिसऑर्डर) है। इसमें मरीज सच्चाई और वास्तविक दुनिया से अलग होकर अपनी ही दुनिया में खोया रहता है। यदि बच्‍चे के जन्‍म से पूर्व मां को इस प्रकार की मानसिक विकार हो जाए तो इसका सीधा असर होने वाले बच्‍चे के स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ता है। यदि महिला प्रसव से एक महीने पूर्व सिजोफ्रेनिया से पीड़ि‍त है तो इसके कुछ संभावित खतरे हो सकते हैं। सिजोफ्रेनिया से पीडि़त महिला गर्भावस्‍था के दौरान अपनी देखभाल करना भूल सकती है। इसलिए ऐसे मरीजों का विशेष ध्यान रखना पड़ता है।

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सिजोफ्रेनिया से बचाव

सिजोफ्रेनिया से बचाव संभव है। गर्भावस्था के दौरान अगर महिला में सिजोफ्रेनिया के लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसका विशेष ख्याल रखना पड़ता है क्योंकि इस दौरान महिला खुद का ख्याल रखने में सक्षम नहीं होती है। इस बीमारी से बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान।

मानसिक तनाव बन सकता है कारण

गर्भावस्था के दौरान कई बार महिलाएं काफी तनाव से गुजरती हैं। इस तनाव का कारण होने वाले शिशु की चिंता या आर्थिक स्थिति और अन्य बातों हो सकती हैं। ज्यादा तनाव के कारण महिला को गर्भावस्था के दौरान सिजोफ्रेनिया हो सकता है। इसलिए गर्भवती महिला को अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और पति से बातचीत करते रहना चाहिए और समस्याएं बताते रहना चाहिए। इससे तनाव कम होता है।

खतरनाक है धूम्रपान की लत

स्‍मोंकिंग का गर्भावस्‍था पर बहुत बुरा असर पड़ता है, धूम्रपान के कारण सिजोफ्रेनिया की आशंका बढ़ती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को धूम्रपान करने से बचना चाहिए, क्‍योंकि धूम्रपान करने से बच्‍चे का विकास ठीक तरह नहीं हो पाता है। कई बच्‍चों का वजन भी कम हो सकता है। इसके अलावा महिलाओं को अप्रत्‍यक्ष धूम्रपान से भी बचना चाहिए।

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बिना सलाह दवाओं का प्रयोग घातक

गर्भावस्‍था के दौरान मां को सिजोफ्रेनिया है तो इसे नियंत्रित करने के लिए दवाओं का सहारा लिया जा सकता है। लेकिन दवाओं का सबसे बुरा असर बच्‍चे के स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ता है। ये दवायें स्‍तन की ग्रंथियों को संक्रमित कर सकती हैं जिसके कारण बच्‍चे मां का दूध संक्रमित हो सकता है जो बच्‍चे को बीमार कर सकता है। इसलिए गर्भावस्‍था के दौरान सिजोफ्रेनिया के इलाज के लिए दवाओं का प्रयोग करने से अच्‍छा है कि सही तरीके से परामर्श लिया जाए।

परिवार का सहयोग जरूरी

गर्भावस्‍था के दौरान सिजोफ्रेनिया से ग्रस्‍त महिलाओं को सबसे ज्‍यादा करीबी लोगों की जरूरत होती है। घर के लोगों को उसकी हालत को समझना चाहिए और उसे गंभीरता से लेना चाहिए। मरीज के परिवार को कोशिश करनी चाहिए कि वह उसका पूरी तरह से साथ दें, उसकी भावनाओं को समझें। ज्यादा से ज्यादा वक्त मरीज के साथ बिताएं और उसे समय-समय पर दवाइयां और पोषणयुक्‍त आहार दें। हमेशा उसे व्यस्त रखें, मरीज के तनाव या परेशानियों को दूर करने की कोशिश करें।

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