आंखों को बार-बार रगड़ने से हो सकती हैं ये 5 गंभीर समस्याएं, किसी भी स्थिति में न रगड़ें आंखें

कई बार आंखों में कीड़ा या कोई चीज चली जाने पर लोग देर तक तेज हाथों से आंखों को रगड़ते रहते हैं। ऐसा करना कई बार बहुत खतरनाक हो सकता है, जानें कारण।

Kunal Mishra
Written by: Kunal MishraPublished at: Apr 03, 2021Updated at: Apr 03, 2021
आंखों को बार-बार रगड़ने से हो सकती हैं ये 5 गंभीर समस्याएं, किसी भी स्थिति में न रगड़ें आंखें

जब भी हमारी आंखो में कुछ चला जाता है तो हमें बेचैनी होने लगती है। तिनके भर की चीज शरीर में उथल पुथल मचा देती है। जब तक हम उस तिनके को आंख से निकाल नहीं लेते तब तक चैन से नहीं बैठते और ऐसा करने के लिए हम हमेशा आंखो को तुरंत रगड़ने लगते है। बार बार रगड़ते रगड़ते चाहे आंखे लाल ही क्यों ना हो जाए पर जब तक आंखो में फसा तिनका बाहर नहीं निकलता तब तक आराम नहीं मिलता। सिर्फ इतना ही नहीं जब हम बहुत थक जाते है तो फ्रेश होने के लिए या आंखो का तनाव कम करने के लिए भी आंखो को रगड़ते है। ऐसा करने से हमारा ध्यान काम से हटकर दूसरी जगह चला जाता है और तनाव के साथ साथ रक्त चाप (Heart Rate) भी धीमा हो जाता है। लेकिन यह तनाव काम करने की तकनीक तब ही काम करती है जब हम आंखो को हल्के प्रेशर के साथ मसले। यदि ये प्रेशर तेज़ और भारी हुआ तो इसके बुरे परिणाम हमारी डेलिकेट (Delicate) आंखो को भुगतना पड़ता है।

आंखो के साथ हम इतनी बेरहमी से पेश आते हैं, जबकि सबसे ज़्यादा दबाव और तनाव हमारी शरीर में हमारी आंखे ही झेलती है। 24 घंटे में से 16 घंटे लगातार आंखे जागकर अपना काम करती है। भले ही हमारे पैर हाथ आराम कि अवस्था में हो लेकिन आंखो का काम हमेशा जारी रहता है। ऐसे में हम अपनी आंखो का ठीक से ध्यान नहीं रख पाते और थोड़ी थोड़ी देर पर इन्हे रगड़ते रहते है। कुछ लोगों की तो आंखे रगड़ने की आदत सी बनी रहती है। आंखो में कुछ चला जाए तो आंखो पर ठंडे पानी के छींटे मारने के बजाय हम आंखो को तेज़ दबाव के साथ रगड़ने लगते है। ऐसा करने से हम अपनी आंखो को अनजाने में बहुत कष्ट पहुंचाते है। अगर आंखे रगड़ने की आदत में सुधार ना लाया जाए तो इससे कई समस्याएं हो सकती है साथ है अंधेपन का शिकार भी होना पड़ सकता है। आंखो को बार बार रगड़ना आगे जाकर भारी प सकता है।

आइए जानते है आंखो को हर वक्त रगड़ने से होने वाले नुकसान

कीटाणुओं का स्थानांतरण (Transfer of Germs)

दिन भर में हमारे हाथ ना जाने कितनी चीज़ों को छूते हैं। किस चीज़ पर कीटाणु (Germs) जमा हो हमें इसके बारे में ज्ञात नहीं होता। आजकल कोरोना काल में तो वैसे भी किसी चीज को हाथ लगाने के बाद आंखों को भूलकर भी नहीं छूना चाहिए। बिना हाथ धोए या किसी संक्रमित चीज को छू लेने के बाद जलन होने पर हम अपनी आंखो को रगड़ लेते है, जिससे हाथ में मौजूद सभी कीटाणु आंखो में स्थानांतरित हो जाते हैं। ऐसे में आंखो में एलर्जिक रिएक्शन और फंगल इंफेक्शन फैलने का भी खतरा बढ़ जाता है। 

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कॉर्निया का फटना (Corneal Abrasion)

आंखो को बार-बार रगड़ने से आंखों में मौजूद कॉर्निया (Cornea) फट सकता है। कॉर्निया आंखों का अहम हिस्सा है। जब हम बहुत तेज दबाव के साथ आंखो को रगड़ देते हैं तो हमारी आंखो की सतह यानी कॉर्निया पर घाव बन जाता है। इस घाव के कारण कॉर्निया पर खरोचें आ जाती है और आंखो मै दर्द भी होने लगता है। ऐसा होने से आंखो में धुंधलापन (Blurred Vision) भी आने लगता है। साफ दिखने में आंखो को तकलीफ होती है। कई मामलों में कॉर्निया फटने से आंख में सूजन भी देखी गई है। 

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आंखो में खून आना (Eye Bleeding)

हमारी आंखों में छोटी धमनियाँ (Blood Vessels) मौजूद होती हैं, जो बहुत ही मुलायम और नाज़ुक होती हैं। इन धमनियों का काम रक्त का बहाव (Blood Circulation) करना होता है। जब हम आंखों को ज़ोर से रगड़ते हैं तो ये नाज़ुक धमनियाँ टूटने लगती है। ऐसे में आंखों की सफेद परत जिससे कंजाक्टीवा (Conjunctive) कहते हैं वह खराब होने लगती है। इसी स्थिति को विज्ञान की भाषा में सबकंजक्टिवल हैमरेज (Subconjunctival hemorrhage) इसमें आंखो के उपर लाल खून (Blood shots) जमा हो जाता है। हालांकि यह अपने आप कुछ दिनों में ठीक हो जाता है।

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डार्क सर्कल (Dark circle)

डार्क सर्कल (Dark circle) से लोग काफी परेशान रहते हैं। डार्क सर्कल से छुटकारा पाने के लिए तरह-तरह के तरीके अपनाते हैं। लेकिन वही तरीके हमारी कुछ आदतों के कारण व्यर्थ चले जाते हैं। आंखो को बार-बार रगड़ने से धमनियां टूटने लगती हैं और रक्त के बहाव में लीकेज हो जाती है। इस कारण रक्त इधर-उधर बहने लगता है। परिणाम स्वरूप आंखो के नीचे की त्वचा कमजोर और ढीली पड़ जाती है। ऐसी स्थिति में आंखो के नीचे काले घेरे बन जाते हैं। 

ग्लूकोमा के रोगियों में अंधापन (Loss of Vision in Glaucoma Patients)

ग्लूकोमा के रोगियों को कम दिखाई देता है। यह अक्सर 60 की उम्र के बाद होता है। ग्लूकोमा में आंखो पर दबा व बनता है जो दिमाग से योजित ऑप्टिक नर्व (Optic Nerve) को प्रभावित करता है। ऐसे में अगर आंख को आए दिन रगड़ा जाए तो यह दबाव उत्प्रेरक होकर ऑप्टिक नर्व को बुरी तरह से नुकसान पहुंचता है, जिसका परिणाम व्यक्ति को अंधा बना सकता है। इस अवस्था में अंधापन ही एक मात्र दुषपरिणाम है।

आंखें शरीर का काफी संवेदनशील अंग है, इसमें समस्या आने पर हमारा पूरा शरीर प्रभावित हो सकता है। इसलिए बेहतर है कि अपनी आखों को बार-बार रगड़ने से बचें।

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