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आयुर्वेद के अनुसार पित्त प्रकृति के लोगों को नहीं खाने चाहिए ये 8 तरह के फल और सब्जियां

Pitta Dosha Meaning: स्वस्थ रहने के लिए पित्त का संतुलन में रहना जरूरी होता है। चलिए जानते हैं कौन-से फल और सब्जियां खाने से पित्त बढ़ता है।

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: Mar 09, 2022Updated at: Mar 09, 2022
आयुर्वेद के अनुसार पित्त प्रकृति के लोगों को नहीं खाने चाहिए ये 8 तरह के फल और सब्जियां

Pitta Dosha: क्या आपको जल्दी गुस्सा आता है? आपकी त्वचा पर लालिमा, खुजली रहती है? या फिर आपको पेट में जलन, एसिडिटी बनी रहती है? अगर हां, तो ये सभी पित्त दोष के लक्षण (Pitta Dosha Symptoms) होते हैं। जिनमें भी पित्त दोष पाया जाता है, उन्हें पित्त प्रकृति का माना जाता है। पित्त शरीर में बनने वाले हार्मोन और एंजाइम को नियंत्रित करता है। साथ ही इससे शरीर का तापमान, पाचक अग्नि भी नियंत्रित होती हैं। पित्त पेट और छोटी आंत में पाया जाता है, इसलिए स्वस्थ रहने के लिए पित्त का संतुलन (Pitta Dosha Cure) में होना बहुत जरूरी होता है। पित्त को संतुलन में बनाए रखने के लिए आपको कुछ खास सब्जियों और फलों से परहेज करना होता है। क्योंकि ये फल और सब्जियां शरीर में पित्त दोष को बढ़ाती हैं। पित्त प्रकृति वाले लोगों को चिपचिपी, गर्म तासीर वाली सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए। चलिए आयुर्वेदाचार्य श्रेय शर्मा से विस्तार से जानते हैं पित्त प्रकृति के लोगों को कौन-से फल और सब्जियों नहीं खानी चाहिए (Pitta Dosha Avoid These Fruits and Vegetables)।  

1. बैंगन (Brinjal in Hindi)

पित्त प्रकृति के लोगों को बैंगन का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। क्योंकि बैंगन की तासीर बहुत ही ज्यादा गर्म होती (Baingan ki Taseer) है, ऐसे में शरीर में पित्त दोष बढ़ सकता है। पेट में जलन, त्वचा पर खुजली पैदा हो सकती है। साथ ही यह चिपचिपी सब्जी भी है, तो पित्त को बढ़ाती है। 

2. अरबी (Arbi Vegetable)

अरबी की तासीर ठंडी होती है, लेकिन फिर भी पित्त प्रकृति के लोगों को इसका सेवन करने से बचना चाहिए। अरबी चिपचिपी सब्जियों में शामिल है, जो पित्त दोष के लक्षण (Pitta Dosha Symptoms) पैदा कर सकता है। इसे खाने से पेट में गैस, एसिडिटी (Gas and Acidity) बढ़ती है।

3. कटहल (Jackfruit in Hindi)

4.पित्त दोष में एसिडिटी, कब्ज आदि की समस्या हो जाती है। ऐसे में कटहल खाने से बचना चाहिए। Jackfruit  को हिंदी में कटहल (Jackfruit in Hindi) कहा जाता है। कटहल चिपचिपी सब्जी होती है, जो पित्त दोष को बढ़ाती है। साथ ही कटहल की सब्जी पाचन शक्ति को भी प्रभावित करती है। इससे कब्ज, ब्लोटिंग और एसिडिटी की समस्या अधिक बढ़ सकती है

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5. सरसों का साग (Sarson ka Saag)

सरसों के साग की तासीर काफी गर्म होती है। इसलिए पित्त प्रकृति के लोगों को इसका सेवन सर्दी के मौसम में भी नहीं करना चाहिए। यह शरीर में गर्मी पैदा करता है, जिससे पेट और सीने में जलन हो सकता है। साथ ही त्वचा पर लालिम और खुजली (Itching in Body) भी हो सकती है।  

6. भिंडी (Ladyfinger)

आयुर्वेद में पित्त प्रकृति वाले लोगों को भिंडी न खाने की सलाह दी जाती है। भिंडी की तासीर गर्म होती है (Bhindi ki Taseer),  ऐसे में भिंडी की सब्जी खाने से पित्त की समस्या हो सकती है। पित्त प्रकृति वाले लोगों का शरीर भिंडी की गर्म तासीर को सहन नहीं कर पाता है, इसके कारण शरीर में रिएक्शन पैदा होने लगते हैं। 

7. संतरा और मौसंबी (Orange)

भले की संतरे और मौसंबी की तासीर ठंडी होती है, लेकिन फिर भी पित्त प्रकृति के लोगों को इसे खाने से परहेज करने की सलाह दी जाती है। संतरा और मौसंबी खट्टे फलों में शामिल हैं, पित्त दोष में खट्टी चीजों से परहेज करना जरूरी होती है। अन्यथा पित्त की समस्या बढ़ सकती है।

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8. कीवी और चकोतरा (Kiwi and Chakotra)

कीवी की तासीर ठंडी होती है, यह स्वाद में खट्टा-मीठा होता है। इसलिए पित्त दोष होने पर इसे खाने से बचना चाहिए। साथ ही चकोतरा भी स्वाद में खट्टा और मीठा होता है। आपको खट्टे फलों, खट्टी खाद्य पदार्थों जैसे अचार, इमली आदि से भी परहेज करना चाहिए।

पित्त को संतुलित करने के लिए क्या खाएं? ( How to Cure Pitta Dosha Naturally)

  • पित्त को संतुलित करने के लिए घी का सेवन अधिक मात्रा में करें। 
  • पानी अधिक मात्रा में पिएं। लिक्विड डाइट लें। इससे पेट की गर्मी शांत होने में मदद मिलेगी।
  • डाइट में खीरा, गाजर, शिमला मिर्च, पालक, बींस और सीताफल शामिल करें। पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें।
  • सलाद खाएं, एलोवेरा-आंवला जूस पिएं। 
  • सेब, अमरूद, तरबूज खाएं।

अगर आपको भी पित्त दोष के लक्षण नजर आते हैं, तो इन फल और सब्जियों का सेवन करना तुरंत छोड़ दें। अन्यथा आपके शरीर में पित्त दोष अधिक बढ़ सकता है। साथ ही आयुर्वेदिक डॉक्टर से भी कंसल्ट करें। 

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