Happy Women's Day 2020: भारत में पीरियड्स से जुड़े ये 5 मिथक हैं लोकप्रिय, जानें क्या है इनकी सच्चाई

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) 2020 के लिए विषय है, 'I am Generation Equality: Realizing Women's Rights'

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Mar 03, 2020Updated at: Mar 03, 2020
Happy Women's Day 2020: भारत में पीरियड्स से जुड़े ये 5 मिथक हैं लोकप्रिय, जानें क्या है इनकी सच्चाई

भारत के कई हिस्सों में, मासिक धर्म यानी पीरियड्स को अभी भी गंदा और अपवित्र माना जाता है। पीरियड्स से जुड़े भारत में कई सारा भम्र और मिथक हैं, जिनका हर रोज महिलाएं यहां सामना करती नजर आती हैं। जैसे कि इसे अक्सर भगवान इंद्र के व्रतों को तोड़ने से जोड़ा जाता है। वेदों में ये कहा गया है कि ये अपराध है, ये कई पापों को करने का नतीजा है, जिसका महिलाओं को भुगतान करना पड़ा है इत्यादि। हिंदू धर्म में, महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान सामान्य जीवन में भाग लेने से प्रतिबंधित किया जाता है। उन्हें दूसरे कमरों में रखते हैं, नहाने से मना करते हैं और फिर पीरिएड्स खत्म होने के बाद उन्हें "शुद्ध" करके सामान्य जीवन में लाया जाता है। हालांकि, ये सभी रूढ़िवादी भ्रामकों के अलावा कुछ भी नहीं है। हम सभी को पीरियड्स के पीछे के साइंस को समझना चाहिए। इसके पीछे एक मात्र कारण 'ओव्यूलेशन' है, जो तब होता है, जब एग्स का इस्तेमाल नहीं हो पाता है। इसके परिणामस्वरूप एंडोमेट्रियल में ब्लीडिंग होती है जिसे 'पीरिएड्स' कहते हैं। एक पीरिएड्स के बाद शरीर में अगले चक्र की तैयारी शुरू हो जाती है। आज हम भारत में पीरिएड्स को लेकर लोगों में होने वाले उन मिथकों के बारे में बात करेंगे, जिसके कारण आज भी कई महिलाएं मानसिक शोषण का शिकार हो रही हैं।

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मिथक-1: पीरिएड्स ब्लड अशुद्ध होता है और इस दौरान महिलाएं जिस चीज को छूती हैं वो खराब हो जाता है

तथ्य: भारतीय समाज में मान्यता है कि पीरिएड्स दौरान की ब्लीडिंग अशुद्ध होता है इसलिए महिलाओं को मंदिर या पूजा नहीं करना चाहिए और न ही उन्हें किसी खाने की वस्तु का छूना चाहिए। ऐसा करने से ये सारी चीजें खराब हो जाती हैं। जबकि ऐसा बिलकुल भी नहीं है। ये ब्लीडिंग एंडोमेट्रियल लेयर्स के टूटने के कारण होती है क्योंकि महीने भर में जो एग्स बने होते हैं, वो फर्टिलाइज नहीं हो पाते हैं प्रेग्नेंसी नहीं होती है और पीरिएड्स के जरिए वो शरीर से रिलीज हो जाते हैं। 

मिथक 2: स्नान नहीं करना चाहिए

तथ्य: कुछ लोग सोचते हैं कि आपके पीरियड के दौरान नहाना या शॉवर लेना असुरक्षित है। यह या तो इसलिए है क्योंकि गर्म पानी रक्तस्राव को उत्तेजित करता है या क्योंकि पानी आपको रक्तस्राव से रोकता है, जिसके दुष्प्रभाव हो सकते हैं। जबकि गर्म पानी रक्त प्रवाह को प्रोत्साहित करने में मदद कर सकता है, यह वास्तव में मासिक धर्म की ऐंठन से राहत और मांसपेशियों के तनाव को कम करने में मदद कर सकता है। पानी में पूर्ण विसर्जन के बाद रक्तस्राव बंद नहीं होता है। हालांकि, पानी से दबाव अस्थायी रूप से योनि से रक्त को बहने से रोक सकता है। पीरिएड्स के दौरान स्नान न करने का कोई कारण नहीं है। सबसे अधिक संभावना है, एक गुनगुने पानी से नहाने से आराम मिलता है और क्लीनर महसूस करना आपके मनोदशा में सुधार कर सकता है। ये आपको मासिक धर्म के लक्षणों से थोड़ा बेहतर सामना करने में भी मदद करेगा।

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मिथक 3: पीरियड्स स्किप करना असुरक्षित है

बर्थ कंट्रोल पिल्स और कई स्नास्थ्य कारणों से भी लोगों के पीरिएड्स स्किप हो जाते हैं। ऐसे में लोग पीरिएड्स के स्किप को अच्छा नहीं मानते और प्रेग्नेंसी न होने पर उनका इसके प्रति नजरीया खराब ही होता है। तो ऐसे में अपने मन से ऐसे भ्रामकों को न पालें। महिलाओं के शरीर की जटिलता पुरुषों के शरीर से अलग होती है। ऐसे में उन्हें जज करना बंद करें। दरअसल कई महिलाओं के लिए, मासिक धर्म के लक्षण गंभीर हो सकते हैं और उनके सामान्य कामकाज और जीवन की गुणवत्ता में हस्तक्षेप कर सकते हैं। वे भारी रक्तस्राव, दर्द को अक्षम करने और अन्य अप्रिय लक्षणों का अनुभव कर सकते हैं, जैसे कि माइग्रेन और मतली। डिसमेनोरिया या कुछ विशेष परिस्थितियों के कारण, जो एंडोमेट्रियोसिस जैसी परेशानी पैदा करने वाले लक्षण होते हैं, वे अपने डॉक्टरों के साथ मिलकर निर्णय ले सकते हैं, कि क्या पीरियड्स को छोड़ना या मासिक धर्म का न होना, आपके स्वास्थ्य और उत्पादकता के लिए सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है।

मिथक 4: एक घर में रहने वाली महिलाओं का एक साथ पीरिएड्स हो सकता है

तथ्य: पीरियड्स के आसपास एक व्यापक सवाल यह है कि क्या एक घर में रहनी वाली महलाओं का पीरिएड्स  सिंक कर सकता है? उदाहरण के लिए, जैसे कि दो या दो से अधिक महिलाएं एक साथ पर्याप्त समय बिताती हैं, तो शायद रूममेट्स के रूप में, क्या उनके पास एक ही समय पर पीरियड होंगे? तो ऐसा बिलकुल भी नहीं है। ये सब आपको सोच का खेल है। हाल ही में प्रकाशित किए गए शोध में यह नहीं पाया गया कि कॉलेज के रूममेट्स को मासिक धर्म की समकालिकता का अनुभव हो। इसलिए इस विषय पर अभी और शोध किया जाएगा और तब तक अपने मन में ये सब बातें न लाएं।

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मिथक 5: पीरियड्स शर्मनाक है

पीरिएड्स शर्मनाक और गंदा है, ये सोच पूरी तरह से खत्म कर दें। सच्चाई यह है कि ये शर्मिंदगी इस पूरी मानव सभ्यता को जन्म दे रही है। हमें ऐसा महसूस नहीं करना चाहिए कि हमें इसे छिपाने की आवश्यकता है। पीरियड्स सामान्य है और इससे महिलाओं के जीवन पर कुछ भी फर्क नहीं पड़ता है। इससे अलग पीरियड्स और हॉर्मोन्स का संतुलन ही हमें युवा रहने में मदद करता है। गंभीरता से कहें तो, पीरियड्स हमारे शरीर के बुढ़ापे को धीमा करने और यहां तक कि हृदय रोग के हमारे जोखिमों को कम करने में भी मदद करता है।

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भारत सरकार इन मिथकों से निपटने के लिए क्या कर रही है?

किशोर लड़कियों में पीरिएड्स स्वास्थ्य और स्वच्छता से संबंधित जागरूकता बढ़ाना

उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर, किशोर लड़कियों और महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार के लिए मासिक धर्म से जुड़े मिथकों और सामाजिक वर्जनाओं का मुकाबला करने के लिए एक रणनीतिक दृष्टिकोण का पालन करना उचित है। इस संबंध में पहली और महत्वपूर्ण रणनीति किशोर लड़कियों में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता से संबंधित जागरूकता बढ़ाना है। युवा लड़कियां अक्सर मासिक धर्म के सीमित ज्ञान के साथ बढ़ती हैं क्योंकि उनकी माताएं और अन्य महिलाएं उनके साथ मुद्दों पर चर्चा करने से कतराती हैं। वयस्क महिलाएं खुद से जैविक तथ्यों या अच्छी स्वच्छंद प्रथाओं के बारे में नहीं जान सकतीं इसलिए उन्हें इसके पीछे का साइंस बताना बेहद जरूरी है। 

शिक्षा के माध्यम से महिलाओं का सशक्तिकरण

शिक्षा के माध्यम से महिलाओं का सशक्तिकरण और निर्णय लेने में उनकी भूमिका बढ़ाना भी इस संबंध में सहायता कर सकता है। महिलाओं और लड़कियों को अक्सर पीरिएड्स के बारे में कम साक्षरता होने के कारण अक्सर शोषण का शिकार होना पड़ता है। स्वच्छता और धुलाई के लिए पर्याप्त सुविधाएं लिंग दृष्टिकोण के साथ उपलब्ध कराई जानी चाहिए। दिल्ली में, महिलाओं के लिए अनुमानित 132 सार्वजनिक शौचालय हैं, जो पुरुषों के लिए 1534 की संख्या का केवल 8% है।इसके अलावा समुदाय आधारित स्वास्थ्य शिक्षा अभियान इस कार्य को प्राप्त करने में सार्थक सिद्ध हो सकता है। मासिक धर्म के संबंध में स्कूल के शिक्षकों में जागरूकता फैलाने की भी आवश्यकता है।

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सस्ते सैनिटरी नैपकिन की उपलब्ता

कम लागत वाले सैनिटरी नैपकिन को स्थानीय रूप से ग्रामीण और स्लम क्षेत्रों में बनाया और वितरित किया जा सकता है क्योंकि ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां उत्पाद की पहुंच मुश्किल है।  भारत सरकार ने 2010 से राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में कम लागत वाले सैनिटरी नैपकिन वितरित करके 1.5 करोड़ किशोर लड़कियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता में सुधार करने की योजना को मंजूरी दी है। हालांकि, यह योजना पायलट चरण में है और इस संबंध में बहुत कुछ हासिल करने की अभी आवश्यकता है। 

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पुरुष साथी की भूमिका बढ़ाना और उन्हें समझाना

पुरुष साथी की भूमिका बढ़ाना इन गहरी जड़ों वाली सामाजिक मान्यताओं और सांस्कृतिक वर्जनाओं का मुकाबला करने में मदद कर सकते हैं। पुरुष और लड़के आमतौर पर पीरिएड्स के बारे में कम जानते हैं, लेकिन उनके लिए माहवारी को समझना महत्वपूर्ण है, ताकि वे अपनी पत्नी, बेटियों, माताओं, छात्रों, कर्मचारियों और साथियों का समर्थन कर सकें। मासिक धर्म जीव विज्ञान के संबंध में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी सचेत किया जाना चाहिए ताकि वे समुदाय में इस ज्ञान का प्रसार कर सकें और मासिक धर्म संबंधी मिथकों का पर्दाफाश करने के खिलाफ सामाजिक समर्थन जुटा सकें। किशोरों के अनुकूल स्वास्थ्य सेवा क्लीनिकों के पास इन मुद्दों को हल करने के लिए प्रशिक्षित जनशक्ति भी होनी चाहिए।

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