ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर के कारण, लक्षण और इलाज के तरीके

ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर हड्डियों से जुड़ा एक कैंसर है। बच्चे और युवा वर्ग इस कैंसर से अधिक प्रभावित होते हैं। एक्सपर्ट से जानते हैं इसके बारे में-

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraPublished at: May 25, 2021
ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर के कारण, लक्षण और इलाज के तरीके

अधिकतर लोग अपने सेहत की बात करने के दौरान बोन हेल्थ के बारे में बात करना भूल जाते हैं। इसलिए लोगों के बीच बोन हेल्थ के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए 4 अगस्त को नैशनल बोन हेल्थ डे 2021 (National Bone day 2021) के रूप में मनाया जाता है। बताया जाता है कि भारत में हड्डियों और जोड़ों के दर्द से जुड़ी बीमारियों से ग्रसित लोग काफी ज्यदा हैं। लेकिन हम में से अधिकतर लोग हड्डियों की परेशानियों को नजरअंदाज कर दते हैं। इसलिए ज्यादातर लोग हड्डियों से जुड़ी कई बीमारियों से अनजान होते हैं। इन्हीं अनजान बीमारियों में से एक है ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर। इस बीमारी का नाम शायद ही आपने पहले सुना हो? यह सार्कोमा कैंसर का एक प्रकार है। यह कैंसर अधिकांश बच्चों और युवाओं में देखा गया है।

ऑस्टियो कैंसर युवाओं को होने वाला तीसरा सबसे सामान्य कैंसर है। यह सामान्य रूप से बड़ी हड्डियों में विकसित होता है। जैसे- जांघ की हड्डी, पिंडली की हड्डी। अगर आपने सुशांत सिंह राजपूत की आखिरी फिल्म 'दिल बेचारा' में देखी हो, तो शायद आपको पता होगा कि सुशांत सिंह इस फिल्म में ऑस्टियो कैंसर से ही पीड़ित थे। फिल्म में उन्हें कैंसर की वजह से चलने में परेशानी होते हुए दिखाया गया है। यानि यह कैंसर खासतौर पर पैरों और जांघों की हड्डियों को ज्यादा प्रभावित करता है। साधारण भाषा में आप इसे बोन कैंसर भी कह सकते हैं। नोएडा स्थिति मानस हॉस्पिटल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सचिन भामू (Orthopedic Dr. Sachin Bhamu) से जानते हैं ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर के बारे में विस्तार से- 

क्या है ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर? (What is Osteosarcoma cancer)

डॉक्टर सचिन भामू बताते हैं कि ऑस्टियो सार्कोमा (Osteosarcoma cancer) कैंसर बहुत ही रेयर बीमारी है। भारत में इसके मामले बहुत ही कम हैं। यह हड्डियों में होने वाला एक कैंसर है। हड्डियों में एक ऐसा घाव, जो धीरे-धीरे कैंसर का रूप धारण कर लेता है। इसे आप बोन कैंसर भी कह सकते हैं। ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर आमतौर पर घुटनों के आसपास होता है। इसके अलावा यह कंधे और जांघ की हड्डियों पर भी हो सकता है। डॉक्टर के मुताबिक, Osteosarcoma cancer लंबी हड्डियों में काफी तेजी से फैलता है। डॉक्टर सचिन भामू बताते हैं कि यह कैंसर दो तरह के एज ग्रुप (Age Group) में देखे गए हैं। इसे बायो मॉडल पैटर्न कहते हैं। बायो मॉडल पैटर्न का मतलब यह है कि दो तरह के एग ग्रुप में अलग-अलग तरह से बीमारी का दिखना। बच्चों में यह समस्या बहुत ही कम देखी गई है।

पहला ग्रुप 20 साल के आसपास के युवाओं में यह कैंसर सबसे ज्यादा देखा गया है। इसके बाद 55 साल के बाद या फिर उसके आसपास के उम्र के लोगों में ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर के मामले ज्यादा आते हैं।

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ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर के कारण (Causes of Osteosarcoma cancer)

ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर एक अनुवांशिक बीमारी है। यानि यह बीमारी उन लोगों को अधिक होने की संभावना होती है, जिनके परिवार में किसी को Osteosarcoma cancer है या फिर पहले किसी को था। लेकिन कई रेयर मामलों में यह भी देखा गया है कि ब्लड रिलेशन में यह बीमारी न होने पर भी मरीज इससे ग्रसित हुआ है।  डॉक्टर के अनुसार अगर आपके परिवार में किसी को Osteosarcoma cancer है, तो नियमित रूप से अपनी जांच कराएं। ताकि अगर आपको यह बीमारी हो, तो शुरुआती स्टेज में ही आपका इलाज किया जा सके।

ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर के जोखिम (Risk of Osteosarcoma cancer)

  • 20 से अधिक और 55 से अधिक उम्र के लोगों को इसका अधिक होने का खतरा
  • अगर पहले से ही हड्डियों से जुड़ी कोई बीमारी हो, तो इसका खतरा ज्यादा रहता है।
  • पुरुषों को महिलाओं की तुलना में ऑस्टियो कैंसर का है अधिक खतरा। लेकिन डॉक्टर के मुताबिक, इसका रेशियो बहुत ही कम है। 
  • अधिक हाइट के बच्चों को यह बीमारी होने का खतरा ज्यादा रहता है।
  • रेडियो थेरेपी का इस्तेमाल करने से भी ऑस्टियो सार्कोमा होने का खतरा ज्यादा होता है।

ऑस्टियो सार्कोमा के लक्षण (Symptoms of Osteosarcoma cancer)

  • हड्डियों को अलग-अलग हिस्सों में ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर हो सकता है। 
  • हड्डियों और जोड़ों में दर्द होना (Bone and Joint Pain)
  • हड्डियों के ऊपरी हिस्से पर सूजन (Swelling Near a Bone)
  • हड्डियों में गांठ जैसा महसूस होना।
  • शरीर का वजन बढ़ना।
  • लंगड़ाहट या चलने में समस्या
  • बिना वजह हड्डियों का टूटना और चोट लगना (Bone Injury or bone Break for no clear Reason)
  • हड्डियों का सुन्न होना।
  • थकान महसूस होना।
  • अगर आपको इस तरह के लक्षण महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर का निदान (Diagnosis of Osteosarcoma cancer)

हड्डियों में किसी तरह की परेशानी होने पर डॉक्टर आपको निम्न टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। जैसे-

  • ट्यूमर टेस्ट (Tumor Test)
  • सीटी स्कैन (CT-Scan)
  • एमआरआई (MRI)
  • ट्यूमर बायोप्सी (Tumor Biopsy)
  • ब्लड सैंपल टेस्ट (Blood Sample Test)
  • पीईटी (Positron emission tomography)
  • हड्डियों का एक्स-रे (Bone X-ray)

बायोप्सी का कैसे किया जाता है इस्तेमाल (Types of biopsy procedures used)

कैंसर की गंभीरता को जांचने के लिए बायोप्सी की जाती है। इस परीक्षण के लिए संदिग्ध कोशिकाओं से सैंपल को एकत्रित किया जाता है। इसी प्रक्रिया को बायोप्सी कहते हैं। इस टेस्ट के माध्यम से डॉक्टर को सटीक जानकारी मिलती है कि मरीज कैंसर से कितना प्रभावित है और उसकी क्या स्थिति है। ऑस्टियो सार्कोमा का निदान करने के लिए डॉक्टर्स दो तरह के बायोप्सी का इस्तेमाल करते हैं।

सुई बायोस्पी (Niddle Biospy) - इसमें डॉक्टर सुई को प्रभावित हिस्से में डालते हैं और इससे सैंपल निकालते हैं। इसमें ट्यूमर की जांच की जाती है। सुई का इस्तेमाल ट्यूमर से ऊतकों (Tissues) के छोटे-छोटे टुकड़े निकालकर टेस्टिंग की जाती है।

सर्जिकल बायोप्सी - इसमें डॉक्टर प्रभावित हिस्से पर एक चीरा लगता हैं। इसके बाद पूरे ट्यूमर या फिर किसी एक हिस्से को हटा देते हैं। 

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कैसे किया जाता है ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर का इलाज? (Osteosarcoma cancer Treatment)

डॉक्टर बताते हैं कि ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर बच्चों और युवाओं दोनों में देखा गया है। बच्चों और युवाओं में इसका इलाज अलग-अलग तरीकों से किया जाता है।

  • सर्जरी- इसमें डॉक्टर सर्जरी के माध्यम से कैंसर से प्रभावित हिस्से को बाहर निकाल देते हैं। ताकि आपका पूरा शरीर इंफेक्टेड न हो।
  • कीमोथेरेपी- बीमारी की गंभीरता को देखते हुए कीमोथेरेपी की सलाह भी दी जाती है।
  • रेडियो थेरेपी- अगर ट्यूमर का साइज ज्यादा बड़ा हो गया है, तो ऐसे मामलों में रेडियो थेरेपी का इस्तेमाल करके ट्यूमर को छोटा करने की कोशिश की जाती है। इसके बाद सर्जरी की मदद से ट्यूमर को बाहर निकाल लिया जाता है।

ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर के इलाज के बाद होने वाली परेशानी?

  • इस कैंसर के इलाज के बाद आपको कुछ समस्याएं भी हो सकती है।
  • सर्जरी होने के बाद ब्लीडिंग या फिर इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है।
  • मरीजों का बालों का गिरना
  • मुंह में छाले होना
  • उल्टी और डायरिया जैसी परेशानी होना।
  • कीमोथेरेपी के कारण हर समय थकान महसूस होना।
  • स्किन में काफी ज्यादा खुजली होना।
  • अन्य ऑर्गन का डैमेज होना।
  • हार्ट और फेफड़ों से जुड़ी अन्य समस्या बढ़ने का खतरा
  • लर्निंग प्रॉब्लम होना।
  • दोबारा कैंसर बढ़ने का खतरा
  • बच्चों के शारीरिक विकास में परेशानी।

कैंसर का इलाज होने के बाद अगर आपको इस तरह की समस्या दिखे, तो डॉक्टर से संपर्क करना आपके लिए बेहतर हो सकता है।

ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर का बचाव (Prevention of Osteosarcoma Cancer)

डॉक्टर्स का कहना है कि ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर अनुवांशिक बीमारी है। इसके अलावा इसके अन्य कारण अज्ञात हैं। ओस्टियो सार्कोमा कैंसर का कारण रेडियो थेरेपी के अलावा कोई अन्य ज्ञात जीवनशैली या पर्यावरणीय कारण अभी तक सामने नहीं आए हैं। इसलिए इस समय इसके बचाव के बारे में बताना काफी मुश्किल होगा। 

हड्डियों से जुड़ी समस्या होने पर डॉक्टर से संपर्क करें। क्योकि ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर अन्य अज्ञात कारणों से भी हो सकता है। इसलिए हड्डियों से जुड़ी परेशानी होने पर लापरवाही न करें।

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