Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

क्या वाकई ऑर्गेनिक फल-सब्जियां नॉर्मल फल-सब्जियों से ज्यादा हेल्दी होते हैं? जानें एक्सपर्ट से

कई लोग ऑर्गेन‍िक फल, सब्‍ज‍ियां, अनाज, दूध और पैकेटबंद चीजें खरीदना पसंद करते हैं क्‍योंक‍ि उन्‍हें लगता है क‍ि ऑर्गेनिक ज्‍यादा हेल्‍दी होती हैं। जानें ऑर्गेनिक फूड्स के फायदे और नुकसान।

जब बाजार में या ऑनलाइन सब्‍जी या फल जैसी कोई खाने की चीज खदीदते हैं, तो उस पर लेबल लगा होता है ऑर्गेनिकली ग्रोन। यानी इस चीज को ऑर्गेनिक ढंग से उगाया गया है और यह ऑर्गेनिक है। ऑर्गेनिक फूड्स वो होते हैं जि‍नमें स‍िंथेट‍िक कीटनाशक या अन्‍य केमि‍कल्‍स के ब‍िना उगाया जाता है। ऑर्गेनिक फूड्स को सेहत और पर्यावरण के ल‍िए ज्‍यादा अच्‍छा माना जाता है। ऑर्गेनिक फूड के फायदे और नुकसान जानने के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

ऑर्गेनिक फल-सब्जियां चुनना है ज्‍यादा सेहतमंंद

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जब लंबे समय तक सेहत के ल‍िए कुछ बेहतर चुनने की बात आती है, तो ऑर्गेन‍िक फल और सब्‍ज‍ियोंं को चुन सकते हैं। ऑर्गेनिक चीजें खाने वाले लोगों के शरीर में कीटनाशकों के अवशेष कम पाए जाते हैं। अच्‍छी सेहत के ल‍िए केवल ऑर्गेन‍िक फल और सब्‍जि‍यां चुनना काफी नहीं है। हेल्‍दी डाइट के ल‍िए खान-पान की अच्‍छी आदतें, धूम्रपान न करना और हेल्‍दी वजन बनाए रखना भी जरूरी है। Mayo Clinic के मुताब‍िक, गर्भवती मह‍िलाओं की सेहत के ल‍िए ऑर्गेन‍िक फूड्स का सेवन फायदेमंद हो सकता है। कीटनाशकोंं के संपर्क में आने से गर्भावस्‍था में कई शारीर‍िक समस्‍याएं हो सकती हैं और भ्रूण के व‍िकास में समस्‍याएं भी आ सकती हैं।

यह भी पढ़ें- नेचुरल और ऑर्गेनिक फूड में क्या अंतर होता है? जानें कौन-सा खाद्य पदार्थ है सेहत के लिए ज्यादा लाभकारी

ऑर्गेनिक फूड्स के फायदे

  • ऑर्गेनिक फूड्स को केमि‍कल्‍स के बगैर उगाया जाता है इसल‍िए वे सेहत के ल‍िए ज्‍यादा फायदेमंद होते हैं।
  • ऑर्गेनिक फूड्स कम प्रोसेस्‍ड होते हैं इसल‍िए इनमें प्र‍िजर्वेट‍िव्‍स भी कम होते हैं और ये पाचन के ल‍िए नॉर्मल फल या सब्‍जी के मुकाबले ज्‍यादा अच्‍छे होते हैं।
  • शरीर के ल‍िए कीटनाशक रह‍ित चीजें ज्‍यादा फायदेमंद होती हैं। इन्‍हें लंबे समय तक खाना फायदेमंद होता है।

ऑर्गेनिक फूड्स के नुकसान

  • ऑर्गेनिक फूड्स बाजार में नॉर्मल के मुकाबले ज्‍यादा कीमत में बेचे जाते हैं क्‍योंक‍ि ऑर्गेनिक खेती में ज्‍यादा मेहनत लगती है और उत्‍पादन कम होता है इसल‍िए ऑर्गेनिक चीजें ज्‍यादा महंगी होती हैं।
  • साथ ही ऑर्गेन‍िक फूड्स की शेल्‍फ लाइफ कम होती है। ये जल्‍दी खराब हो जाते हैं।
  • अगर ऑर्गेन‍िक फूड्स को ठीक ढंग से स्‍टोर न क‍िया जाए, तो बैक्‍टीर‍िया, फंगस या जहरीले तत्‍व खान में म‍िल सकते हैं।
  • कुछ इलाकों में ऑर्गेनिक खाना आसानी से उपलब्ध नहीं हो सकता है। मौसम में बदलाव और कम उत्पादन की वजह से भी ग्राहकों के पास चुनने के लिए कम विकल्प हो सकते हैं।

गलत लेबल से सावधान रहें

आजकल बाजार में नॉर्मल चीजों को ऑर्गेनिक फूड्स का लेबल लगाकर बेचा जा रहा है इसल‍िए देख-परखकर ही सामान खरीदें। साथ ही भरोसेमंद ब्रांड से सर्टिफाइड ऑर्गेनिक चीजें ही चुनें। कमजोर इम्‍यून‍िटी वाले लोग, बुजर्गों और गर्भवती मह‍िलाओं को इस बात का खास ख्‍याल रखना चाह‍िए क‍ि ऑर्गेनिक फूड्स को ठीक ढंंग से धोया और पकाया जाए।

न‍िष्‍कर्ष:

ऑर्गेनिक फूड्स सेहत के ल‍िए ज्‍यादा अच्‍छे माने जाते हैं क्‍योंक‍ि ये केम‍िकल फ्री होते हैं और इन्‍हें कम रसायन‍िक प्रक्र‍ियाओं से गुजरना पड़ता है इसल‍िए ये सेहत के ल‍िए ज्‍यादा अच्‍छे माने जाते हैं, लेक‍िन इनकी शेल्‍फ लाइफ कम होती है और बाजार में इनकी कीमत ज्‍यादा होती है।

FAQ

  • ऑर्गेनिक फूड्स कौन से हैं?

    सेब, केला, आम जैसे फल, टमाटर, पालक, गाजर जैसी सब्‍ज‍ियां, गेहूं, चावल, जौ, दूध, ऑर्गेनिक मसाले, ऑर्गेनिक ड्राई फ्रूट्स और सीड्स वगैरह।
  • ऑर्गेनिक फूड्स जल्दी खराब हो जाते हैं?

    इनमें प्रिजर्वेटिव कम होते हैं इसलिए कुछ ऑर्गेनिक फूड्स की शेल्फ लाइफ कम हो सकती है और ये जल्‍दी खराब हो सकते हैं।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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  • Current Version

    May 13, 2026 18:47 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 13, 2026 18:47 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Neha Mohan Sinha

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