बढ़ती उम्र में रक्तचाप और ह्रदय रोग को न करें नजरअंदाज, हो सकता है जानलेवा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 03, 2018
Quick Bites

  • ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर भी कहा जाता है
  • बुजुर्गों के लिये खतरनाक है रक्तचाप और हृदय रोग
  • हृदय द्वारा खून को पंप किये जाने को ही ब्लड प्रेशर कहा जाता है

अक्सर हम किसी बुजुर्ग के बारे में यह सुनते हैं कि वो तो बिल्कुल ठीक-ठाक थे। पता नहीं अचानक क्या हुआ, रात को दिल का दौरा पड़ा और खत्म हो गये। फिर हम इसको नियति मान लेते हैं। लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। इस प्रकार हुई अधिकतर मौतों का कारण हार्ट अटैक नहीं होता बल्कि हार्ट की समस्या को लंबे समय तक नजरअंदाज करना होता है। क्योंकि मानव शरीर के अंग एक दम से काम करना बंद नहीं करते बल्कि वो पहले विभिन्न प्रकार से चेतावनी देते हैं।

लेकिन अक्सर हम उनको नजरअंदाज करते हुए उनका उपचार करना भी जरूरी नहीं समझते। खासकर उम्र के बढ़ते पड़ाव के साथ ही बुजुर्ग अपने स्वास्थ के प्रति लापरवाह हो जाते हैं। यही कारण है कि उपयुक्त उपचार के अभाव में बढ़ता रक्तचाप हृदय रोगों को जन्म देता है जो कई बार जानलेवा साबित होता है। कई बार यह अन्य अंगों को भी प्रभावित कर निष्क्रिय बना देता है। अनियमित रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) आज एक आम समस्या बन गया है। युवा वर्ग भी आज अनियमित रक्तचाप की समस्या का सामना कर रहा है। किंतु बुजुर्गों में रक्तचाप अनियमित होना आम बात होने लगी है। ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर भी कहा जाता है क्योंकि यह चुपके से हमारे शरीर पर हमला करता है और जानलेवा साबित होता है। दरअसल हमारा हृदय द्वारा पंप किये गये स्वच्छ रक्त को रक्त वाहिकाएं शरीर के अन्य भागों तक ले जाती हैं। इसके बाद अन्य रक्त वाहिकाएं दूषित रक्त को हृदय तक वापस लेकर आती हैं। हृदय द्वारा खून को पंप किये जाने को ही ब्लड प्रेशर कहा जाता है। यह ब्लड प्रेशर कम या ज्यादा होने पर इसे हाई या लो ब्लड प्रेशर कहा जाता है।

जब ब्लड प्रेशर हाई होता है तो वह हृदय पर दबाव डालने लगता है। उच्च रक्तचाप के कारण रक्त प्रवाही धमनियों सख्त व सिकुड़ने लगती हैं जिसके कारण हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और अन्य हृदय संबंधी रोग जन्म लेते हैं। समय से पता न चलने या उपचार न कराये जाने से यह जानलेवा भी साबित होते हैं। ऑनक्वेस्ट लेबोरेटरीज लिमिटेड के सीओओ, डॉक्‍टर रवि गौर  से इस लेख में हम जानेंगे रक्तचाप और उससे होने वाले हृदय रोगों के बारे में और कैसे पूर्व जांच और समय से उपचार बचा सकता है मरीज की जान के बारे में... 

बुजुर्गों के लिये खतरनाक है रक्तचाप और हृदय रोग

उच्च रक्तचाप और इसके कारण होने वाले हृदय रोग बुजुर्गों के लिये कई बार जानलेवा साबित होते हैं। खासकर सर्दियों का मौसम बुजुर्गों के दिल पर भारी गुजरता है। दरअसल उम्र बढ़ने के साथ बुजुर्ग शारीरिक श्रम करना या तो छोड़ देते हैं या करने में समर्थ नहीं होते। ऐसे में उनकी रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने लगती है और उनका ब्लड प्रेशर उच्च स्तर की ओर बढ़ने लगता है। यही कारण है कि युवाओं के मुकाबले बुजुर्गों का ब्लड प्रेशर अधिक होता है। उच्च रक्तचाप के कारण दिखने वाले अनेक लक्षणों जैसे जल्द थकान होना, सांस फूलना आदि को बुजुर्ग बढ़ती उम्र का असर मान कर नजरअंदाज कर देते हैं।

जिससे उनका ब्लड प्रेशर बढ़ता जाता है और उनके हृदय पर अनावश्यक दबाव डालना शुरू कर देता है। ऐसे में उन्हें हार्ट अटैक होने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं रक्त धमनियों के सिकुड़ जाने के कारण शरीर के अन्य अंगों को भी पर्याप्त रक्त नहीं मिल पाता जिसके कारण कई बार वह काम करना बंद कर देते हैं। बुजुर्गों के कान, गला और आंखों पर ब्लड प्रेशर का असर सबसे जल्दी दिखता है। उच्च रक्तचाप के कारण किडनी भी कार्य करना बंद कर सकती है जिससे शरीर में रक्त का निर्माण प्रभावित होता है। 

बुजुर्गों को उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी परेशानियों के लक्षणों को गंभीरतापूर्वक लेने के साथ नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करानी चाहिये ताकि गंभीर रोगों का समयपूर्व निदान किया जा सके। समय रहते रोग का पता चलने से न सिर्फ अचानक जान जाने का खतरा टल जाता है बल्कि ब्लड प्रेशर के कारण अन्य अंगों के प्रभावित होने की संभावना भी बेहद कम हो जाती है।  

लक्षणों को समझें और करायें रोग का उपचार

उच्च रक्तचाप और अनियमित दिल की घड़कनें एक साथ मिलकर जानलेवा साबित होती हैं। लगभग 90 प्रतिशत लोग हाइपरटेंशन या उसके कारण होने वाली बीमारियों से तब तक अंजान रहते हैं जब तक की ब्लड प्रेशर शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाना शुरू नहीं कर देता। यही कारण है कि उच्च रक्तचाप को साइलेंट किलर कहा जाता है। ऐसे में उच्च रक्तचाप और हृदय रोग के लक्षणों के बारे में जानना बेहद आवश्यक है। ताकि आप खुद और अन्य लोगों के स्वास्थ का भी ख्याल रख सकें। इन रोगों की जानकारी आपका या किसी और का जीवन भी बचा सकती है। 

उच्च रक्तचाप की शुरूआत में सिर के पिछले हिस्से और गर्दन में दर्द होने लगता है जिसे हम अक्सर काम की अधिकता की वजह से होना मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। बात-बात पर गुस्सा आना, अधिक तनाव में रहना, अक्सर चक्कर आना, जल्दी थकान होना, सीढ़ियों पर चढ़ने या तेज चलने पर परेशानी महसूस होना, नाक में से खून आना या सांस लेने में परेशानी होना, रात में नींद न आना, हृदय की धड़कनों का अचानक तेज हो जाना आदि उच्च रक्तचाप के लक्षण हैं।  

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वहीं ह्रदय रोग होने की स्थिति में सीने में अक्सर जोर का दर्द होता है। लेकिन बुजुर्गों, महिलाओं और डायबिटीज की शिकायत वाले कई व्यक्तियों को अक्सर हल्का दर्द होता है या बिल्कुल भी दर्द नहीं होता है। कई बार मरीज को छाती और बाएं कंधे में दर्द की शिकायत होने लगती है। ये दर्द धीरे-धीरे हाथों की तरफ नीचे की ओर जाने लगता है। सांस लेने में तकलीफ, ठंडा पसीना आना, मितली आना, सीने में जलन, पेट में दर्द होना, सिर घूमना और चक्कर आना, अत्याधिक थकान होना या अचानक बेहोश हो जाना ह्रदय रोग के लक्षण हैं। 

इन लक्षणों के दिखाई देते ही लापरवाही न बरतें। हो सकता है कि यह लक्षण किन्हीं अन्य रोगों के कारण हों लेकिन उच्च रक्तचाप या ह्रदय रोग के गंभीर स्तर तक पहुंचने से पहले पता चलने से आपकी या आपके करीबी की जान बच सकती है।

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नियमित जांच बचाती है जान

नियमित तौर पर ब्लड प्रेशर की जांच करना बेहद आवश्यक है। अक्सर देखा गया है कि लोग ब्लड प्रेशर हाई होने के बावजूद नियमित तौर पर दवाएं नहीं लेते या कुछ समय उपचार कराने के बाद वह दवा लेना बंद कर देते हैं जिससे ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है। जिसका नतीजा हर्ट अटैक होने के खतरे के रूप में सामने आता है। उच्च रक्तचाप से ग्रसित होने का पता चलते ही उसका उपयुक्त और नियमित उपचार कराया जाना बेहद आवश्यक है।

यदि नियमित तौर पर ब्लड प्रेशर हाई रहता हो तो हृदय की जांच कराना भी बेहद जरूरी है। समयपूर्व बीमारी का पता चलने से न सिर्फ आप अतिरिक्त रूप से सावधान रहते हैं बल्कि उन बीमारियों के जानलेवा स्तर तक पहुंचने से पहले ही उनका उपचार भी करा सकते हैं। ऐसे में आप अपना जीवन भी सुरक्षित रखते हैं और अपने परिवार की खुशहाली भी। 

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