इस नए इंसुलिन से डायबिटीज रोगियों को मिल सकती है इलाज में मदद, शोधकर्ताओं ने जगाई उम्‍मीद

हाल में हुए अध्‍ययन के अनुसार, वैज्ञानिकों ने इंसुलिन का एक नया रूप विकसित किया है, जो डायबिटीज के इलाज में मददगार है। 

Sheetal Bisht
Written by: Sheetal BishtPublished at: Jan 15, 2020Updated at: Jan 15, 2020
इस नए इंसुलिन से डायबिटीज रोगियों को मिल सकती है इलाज में मदद, शोधकर्ताओं ने जगाई उम्‍मीद

डायबिटीज सबसे आम और गंभीर बीमारियों में से एक है। डायबिटीज से आज बच्‍चे से लेकर बड़े तक कोई अछूता नहीं है। हाल में हुए एक अध्‍ययन में शोधकर्ताओं ने, ऑस्ट्रेलिया के द फ़्लोरे इंस्टीट्यूट ऑफ़ न्यूरोसाइंस एंड मेंटल हेल्थ के लोगों सहित, शोधकर्ताओं ने ग्लाइको-इंसुलिन नामक एक इंसुलिन एनालॉग को संश्लेषित किया और यह दिखाया कि यह प्रीक्लिनिकल अध्ययनों में यह ब्‍लड शुगर के स्तर को भी कम कर सकता है।

जर्नल ऑफ द अमेरिकन केमिकल सोसाइटी में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, ग्लाइको-इंसुलिन फाइब्रिल के निर्माण के बिना इंसुलिन जैसे प्रभाव प्राप्त कर सकता है, जो तब उत्पन्न होते हैं जब इंसुलिन कंपाउंड एक साथ एकत्रित होते हैं।

New Form Of Insulin

वैज्ञानिकों ने कहा कि डायबिटीज रोगी, जिन्‍हें कि इंसुलिन को नियंत्रित करने के लिए पंप इन्फ्यूजन की आवश्यकता होती है, फ़ाइब्रिल एग्रीगेट्स दवा की डिलीवरी को रोकने में गंभीर जोखिम पैदा करते हैं, जिससे जीवन की संभावना कम हो जाती है।

अध्ययन के सह-लेखक अख्तर हुसैन, फ्लोरी इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस एंड मेंटल हेल्थ ने कहा, "न केवल हमारे शोध से पता चला है कि  ग्लाइको-इंसुलिन फाइब्रिल का निर्माण नहीं करता है, बल्कि यह उच्च तापमान और एकाग्रता पर भी फाइब्रिल नहीं बनाता। लेकिन यह देशी इंसुलिन की तुलना में मानव सीरम में अधिक स्थिर है। इसके साथ ही इन निष्कर्षों से इंसुलिन पंपों में उपयोग के लिए  ग्लाइको-इंसुलिन एक उत्कृष्ट और बेहतर विकल्प है और यह जीवन को बेहतर बनाने का एक तरीका हो सकता है।"

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उन्‍होंने कहा, "हम अब ग्लाइको-इंसुलिन के लिए निर्माण की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने की उम्मीद करते हैं, इसलिए इस यौगिक को आगे बड़े क्‍लीनिकल रिसर्च और अध्ययनों में जांच की जा सकती है।"

Diabetes Treatment

शोधकर्ताओं ने कहा, फाइब्रल्स की घटना को कम करने के लिए इंसुलिन पंप  इन्‍फ्यूजन सेट को हर 24 घंटे से 72 घंटे में बदलना आवश्यक है। अध्ययन के हिस्से के रूप में, शोधकर्ताओं ने अंडे की जर्दी से इंसुलिन-शुगर कॉम्प्लेक्स के इंजीनियर के लिए एक नया तरीका विकसित किया।

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अध्‍ययन के सह-लेखक जॉन वेड फॉर फ्लोरी इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस एंड मेंटल हेल्थ ने कहा, "आमतौर पर, इंसुलिन का रासायनिक संशोधन संरचनात्मक अस्थिरता और निष्क्रियता का कारण बनता है, लेकिन हम ग्लाइको-इंसुलिन को सफलतापूर्वक एक ऐसे तरीके से संश्लेषित करने में सक्षम थे, जो इसकी इंसुलिन जैसी पेचदार संरचना को बनाए रखता है।"

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