तेज दिमाग, बेहतर स्वास्थ्य और लंबी जिंदगी चाहिए तो ध्यान कीजिए

हम में से ज्यादातर लोग नहीं जानते कि हमारे मस्तिष्क की भावनाओं को हमें कैसे संभालना है। ये बातें हमें न तो घर पर सिखाई जाती हैं और न ही स्कूल में सिखाई जाती हैं। योग के द्वारा हम अपने दिमाग की क्षमता बढ़ा सकते हैं और भावनाओं को काबू में कर सकते है

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: May 03, 2018
तेज दिमाग, बेहतर स्वास्थ्य और लंबी जिंदगी चाहिए तो ध्यान कीजिए

हाल के कुछ अध्ययनों से पता चला है कि दवाओं और चिकित्सा पद्धतियों में विकास के कारण आजकल लोग भले ही लंबी जिंदगी जी रहे हैं, लेकिन लोगों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समय से पहले ही खराब हो रहा है। 2016 की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि दुनियाभर में एक दिन में सबसे ज्यादा समय तक काम भारतीय करते हैं। भारत में लोग एक सप्ताह में औसतन 52 घंटे काम करते हैं जबकि चीन में 48 घंटे, जापान में 46 घंटे और यूएसए में सिर्फ 45 घंटे हर सप्ताह काम करने का औसत है।

ज्यादातर भारतीयों को तनाव की समस्या

एक रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश भारतीयों की प्रमुख समस्या चिंता और मानसिक थकान है। लंबे समय तक काम करना, समय की प्रतिबद्धता, प्रदूषण, रिश्तों में उतार चढ़ाव और कई अन्य मानसिक दबाव तनाव को पैदा करते हैं। इस तनाव के कारण ही व्यक्ति का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य खराब होता है। मानसिक विकारों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय जनसंख्या का 7.5% चिंता और अवसाद से पीड़ित है।

दिमाग और शरीर दोनों के लिए ध्यान

हम में से ज्यादातर लोग नहीं जानते कि हमारे मस्तिष्क की भावनाओं को हमें कैसे संभालना है। ये बातें हमें न तो घर पर सिखाई जाती हैं और न ही स्कूल में सिखाई जाती हैं। ज्यादातर लोगों को नहीं पता होता है कि उन्हें कैसे अपने संतुलन को खोए बिना जीवन की विपरीत परिस्थितियों में दबाव को संभालते हुए खुश और शांत रहना है। मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने और भावनाओं को काबू में रखने के लिए ध्यान सबसे अच्छा और सहज विकल्प है। ध्यान की तकनीक को सीखना और इसका अभ्यास करना आसान है। इसमें हमारे जीवन के सभी क्षेत्रों को प्रभावित करने वाले कई फायदे हैं।

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दिमागी क्षमता बढ़ाता है ध्यान

ध्यान हमें अपने मस्तिष्क के उन क्षेत्रों तक पहुंचने की इजाजत देता है जो गहन विचार और संज्ञान के लिए ज़िम्मेदार हैं, जिससे हमें रचनात्मक बनने में और निर्णय लेने में मदद मिलती है। ध्यान हमें सतर्क और तेज बनाता है साथ ही इससे याददाश्त भी अच्छी होती है। एमआरआई मस्तिष्क इमेजिंग से पता चलता है कि लगातार लंबे समय से ध्यान करने वाले 50 वर्षीय व्यक्ति के मस्तिष्क कार्य की क्षमता किसी 25 वर्ष के युवा से अधिक या बेहतर हो सकती है। यहां तक कि शोधकर्ता अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी गंभीर दिमागी बीमारियों के इलाज के रूप में ध्यान को कारगर पा रहे हैं।

सुकून भरी नींद है लंबी जिंदगी का राज

हमारी वर्तमान जीवनशैली में हम में से अधिकांश शांत और गहरी नींद से वंचित हैं, जिससे हमारे मस्तिष्क पर भोझ पड़ता है। इससे मनोदशा विकार, कमजोर प्रतिरक्षा, वजन बढ़ना, ह्रदय रोग और मधुमेह जैसी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। शोध में पाया गया है कि रात में 6 से 8 घंटे से कम समय तक सोने से मौत का जोखिम 12 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। ध्यान, नींद की बेहतर गुणवत्ता से जुड़ा हुआ है। कई अध्ययनों से पता चलता है कि सामान्य लोगों की तुलना में ध्यान करने वाले लोग बेहतर और गहरी नींद लेते हैं। सहज समाधि ध्यान पर एस.एस.आई.ए.आर द्वारा आयोजित एक आंतरिक अध्ययन से पता चलता है कि ध्यान के कुछ हफ्तों के अभ्यास के भीतर नींद की गुणवत्ता में सुधार होने लगता है और लोगों ने नींद की दवाओं से आसानी से छुटकारा मिल सकता है।

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उम्र का प्रभाव होता है कम

ध्यान का प्रभाव हमारे विचार से गहरा बनता है। यह न केवल हमारे मस्तिष्क और व्यवहार को प्रभावित करता है, बल्कि इससे हम खुश, केंद्रित और जागरूक बनते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग ध्यान करते हैं उनकी उम्र के विकास में स्थिरता आती है। इसके अलावा ध्या से टेलोमेयर ग्रंथि की रक्षा होती है। जैसे-जैसे टेलोमेयर बासी होती जाती है , वैसे ही हमारे शरीर और दिमाग भी वृद्ध होता जाता है।

आर्ट ऑफ लिविंग में बाल और महिला कल्याण कार्यक्रम के निदेशिका भानुमती नरसिम्हन के अनुसार, "ध्यान अब विलासिता नहीं बल्कि जीवन की आवश्यकता है। युवा, स्वस्थ्य और सुखमयी जीवन के लिए ध्यान करें। अपने समय का निवेश अपने स्वास्थ्य को बहेतर बनाने में करें, अपने स्व को, जीवात्मा को अध्यात्म की ओर ले जाएं।"
दिव्या कांचीबोतला ध्यान प्रशिक्षिका और आर्ट ऑफ़ लिविंग के श्रीश्री इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस स्टडीज़ के शोध विंग की कार्यकारी निर्देशिका हैं।


भानुमती नरसिम्हन, आर्ट ऑफ़ लिविंग संस्था की वरिष्ठ ध्यान प्रशिक्षिका हैं, वह पैन इंडिया के अंतर्गत संपूर्ण भारत में 4 से 6 मई तक होने वाले सहज समाधि ध्यान को सिखाएंगी। जहां एक लाख से अधिक लोगों से भाग लेने की उम्मीद है।

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