लैरिंजियल कैंसर क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण और इलाज के तरीके

लैरिंजियल के बारे में शायद ही आपने सुना हो। यह कैंसर हमारे स्वरयंत्र (Voice Box) में होता है। चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से-

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraPublished at: Aug 18, 2021
लैरिंजियल कैंसर क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण और इलाज के तरीके

कैंसर के कई प्रकारों में से एक है लैरिंजियल कैंसर। यह कैंसर हमारे (लैरिक्स) स्वरयंत्र में होता है। नोएडा स्थित हीलिंग केयर ईएनटी क्लीनिक के ईएनटी स्पेशलिस्ट (एमबीबीएस एमएस) डॉ अंकुर गुप्ता बताते हैं कि किसी भी व्यक्ति को लैरिंजियल कैंसर तब होता है, जब उसके लैरिक्स की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं। लैरिक्स को सामान्य भाषा में वॉयस बॉक्स के नाम से भी जाना जाता है। जब हम किसी से बात करते हैं या फिर कुछ बोलते हैं, तो यह वॉयस बॉक्स ध्वनि यानि आवाज को उत्पन्न करने में हमारी मदद करता है। वॉयस बॉक्स गर्दन के ऊपरी हिस्से में मौजूद होता है। वॉयस बॉक्स (लैरिक्स) में एक वोकल कॉर्ड होता है, जब इस वोकल कार्ड के माध्यम से हवा गुजरती है, तो इससे कंपन्न होकर हमारी आवाज बाहर आती है। ऐसे में जब लैरिंजियल कैंसर होता है, तो गले और आवाज से जुड़ी कई परेशानियां होने लगती हैं। चलिए जानते हैं लैरिंजियल कैंसर के कारण, लक्षण और इलाज क्या हैं?

लैरिंजियल कैंसर के लक्षण (Symptoms of Laryngeal Cancer)

जैसा की आप जानते हैं कि लैरिंजियल कैंसर गले के आसपास होती है। इसलिए इसके कारण गले और आवाज से जुड़ी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। चलिए अब जानते हैं इसके कुछ आम और असामान्य लक्षण-

  • निगलते समय काफी ज्यादा दर्द होना।
  • गले में गांठ होना
  • गले में लगातार खराश बने रहना।
  • कान में दर्द होना।
  • आवाज में बदलाव होना, कर्कश आवाज निकलना।
  • खांसी लंबे समय तक रहना।

कुछ असमान्य लक्षण

  • सांसों से बदबू आना
  • काफी ज्यादा थकान महसूस होना।
  • अचानक से वजन कम होना।
  • सांस लेते समय तेज आवाज निकलना।

अगर आपको इन में से किसी भी तरह के लक्षण नजर आते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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लैंरिंजियल कैंसर के कारण (Causes of Laryngeal Cancer)

डॉक्टर बताते हैं कि लैरिंजियल कैंसर के सटीक कारणों का पता नहीं चल रहा है। लेकिन कुछ ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से लैरिंजियल कैंसर का खतरा ज्यादा रहता है।

शराब, तंबाकू और धूम्रपान का अधिक सेवन करना

डॉक्टर बताते हैं कि अगर आप शराब और धूम्रपान का अधिक सेवन करते हैं, तो आपको लैरिंजियल कैंसर होने का खतरा काफी ज्यादा रहता है। ऐसे लोग जो लंबे समय तक धूम्रपान करते हैं, उन्हें यह कैंसर होने का खतरा अन्य की तुलना में ज्यादा है। वहीं, शराब पीने वालों को भी शराब न पीने वालों की तुलना में लैरिंजियल कैंसर होने का खतरा ज्यादा रहता है। 

अनुवांशिक 

अगर आपके परिवार में किसी भी व्यक्ति को लैरिंजियल कैंसर हुआ है, तो परिवार के अन्य सदस्य को भी यह कैंसर होने का खतरा हो सकता है। इसलिए अगर आपको लैरिंजियल के लक्षण दिखे, तो तुरंत डॉक्टरी सलाह लें। 

हानिकारण पदार्थों के संपर्क में आना

अगर आप ऐसे स्थान पर रहते या फिर कान करते हैं, जहां पर कोयला, लकड़ी की धूल, पेंट या डीजल का धुआं, सल्फ्यूरिक एसिड का धुआं ज्यादा रहता है, तो आपको लैरिंजियल कैंसर होने का खतरा है। इसके अलावा आइसोप्रोपिल, फॉर्मलडिहाइड जैसे केमिकल्स के संपर्क में आने वालों को भी इसका खतरा रहता है। 

खानपान

अधिक तलाभुना, प्रोसेस्ड फूड और रेज मीट का सेवन करने वालों को भी तुलनात्मक रूप से लैरिंजियल कैंसर होने का खतरा ज्यादा रहता है। 

लैरिंजियल कैंसर का निदान (Diagnosis of Laryngeal Cancer)

डॉक्टर के पास जाने पर डॉक्टर आपसे कुछ जरूरी सवाल कर सकते हैं। जैसे गर्दन के किस हिस्से में दर्द हो रहा है, खाने में कोई परेशानी है या नहीं, कब से दर्द हो रहा है इत्यादि। अगर डॉक्टर को किसी तरह का संदेह महसूस होता है, तो वह आपको निम्न टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं। 

  • बायोप्सी
  • सीटी स्कैन
  • पीईटी स्कैन
  • बोन स्कैन
  • एमआरआई
  • बेरियम स्वालो

लैरिंजियल कैंसर का इलाज (Treatment of Laryngeal Cancer)

लैरिंजियल कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी के उपचार के लिए विशेषज्ञों की टीम सलाह देती है। एक टीम द्वारा मिलकर ही यह निर्णय लिया जाता है कि मरीज का किस तरह इलाज किया जाएगा। इसके इलाज में निम्न तरीकों को अपनाया जा सकता है। 

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सर्जरी

मरीजों की स्थिति के आधार पर सर्जरी के माध्यम से  लैरिंजियल कैंसर का इलाज किया जा सकता है। इस सर्जरी में लैंरिक्स के उस हिस्से को हटाया जाता है, जहां पर ट्यूमर बना होता है। मरीज के लैंरिक्स का कौन सा हिस्सा कैंसर से प्रभावित हुआ है, उस आधार पर ही डॉक्टर सर्जरी करते हैं। 

कीमोथेरेपी

कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इसमें मरीज को कुछ ऐसी दवाइयां दी जाती है, जिससे कैंसर की कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होती हैं और उन्हें बढ़ने से रोकती हैं। इसके अलावा सर्जरी से पहले कैंसर के ट्यूमर को छोटा करने के लिए भी कीमोथेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। 

इम्यूनोथेरेपी

इस थेरेपी में कैंसर से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता का इस्तेमाल किया जाता है। इस उपचार में डॉक्टर ऐसी चीजों का इस्तेमाल करते हैं, जो प्राकृतिक या फिर प्रयोगशाला में तैयार किया गया होता है। यह कैंसर के खिलाफ लड़ने में मददगार होता है। इससे शरीर के प्राकृतिक रक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में असरदार होती है। 

रेडियोथेरेपी

इस थेरेपी में डॉक्टर कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए हाई एनर्जी रेडिएशन का इस्तेमाल करते हैं। रेडियोथेरेपी का अधिकतर इस्तेमाल कैंसर की शुरुआती अवस्था में किय़ा जाता है। 

जैविक चिकित्सा 

इस चिकित्सा प्रणाली में डॉक्टर मरीज को ऐसी दवाई देते हैं, जिससे कैंसर की कोशिकाओं का विकास कम हो जाता है। हालांकि, इसका इस्तेमाल रेडियोथेरेपी के साथ किया जाता है। ताकि लैंरिजियल कैंसर का बेहतर तरीके से उपचार किया जा सके। 

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लैरिंजियल कैंसर के बचाव (Prevention of Laryngeal Cancer)

लैंरियजल कैंसर से बचाव के लिए अपने खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव करें। जैसे-

  • नियमित रूप से एक्सरसाइज करें। 
  • धूम्रपान के सेवन से दूर रहें। 
  • तंबाकू उत्पादों का सेवन न करें। 
  • शराब से सेवन से दूर हें। 
  • हेल्दी आहार (फल, साग-सब्जियां, नट्स) को अपने डाइट में शामिल करेँ। 

अपनी छोटी-मोटी परेशानियों को अनदेखा न करें।गले और आवाज में किसी तरह की परेशानी महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ताकि लैंरिजियल कैंसर के खतरे से बचा जा सके। धूम्रपान और शराब से दूर रहें।  हेल्दी लाइफस्टाइल को चुनें, ताकि खुद को और अपने परिवार को स्वस्थ रख सकें। 

Image Credit - Pixabay

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