कितने प्रकार का होता है गले का कैंसर? जानें इसके चरण, लक्षण, कारण, परीक्षण और बचाव

गले के कैंसर के लक्षण, कारण और उपचार के साथ ये भी जानना जरूरी है कि ये कितने प्रकार का होता है। जानें इसके चरण भी...

Garima Garg
Written by: Garima GargUpdated at: Feb 04, 2021 14:33 IST
कितने प्रकार का होता है गले का कैंसर? जानें इसके चरण, लक्षण, कारण, परीक्षण और बचाव

गले का कैंसर, जैसा कि नाम से पता चल रहा है कि गले में होने वाला ट्यूमर। टॉन्सिल्स (Tonsil) से लैरिंक्स (Layrnx) तक अगर कहीं भी गांठ या बाहरी त्वचा टाइट लगती है तो हो सकता है कि ये कैंसर के लक्षण हों। बता दें कि गले में कोशिकाएं मौजूद होती हैं जो अधिक शराब या धूम्रपान का सेवन करने से संक्रमित हो जाती हैं और उनमें कैंसर हो जाता है। गले की नली नाक के पीछे से शुरू होती है और गर्दन तक ये नली जाती है। बता दें कि लैरिंक्स नरम हड्डी की बनी होती है, जिसमें voice box मौजूद होती हैं, जिससे आवाज आती है। ऐसे में गले की कैंसर से वह नरम हड्डी भी प्रभावित होती है। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि गले के कैंसर के कितने प्रकार होते हैं। साथ ही जानेंगे कि इसके लक्षण, कारण और बचाव क्या हैं? इस विषय पर हमने  मेक्स मल्टी स्पेशियलिटी सेंटर वैशाली और नोएडा के प्रिसिपल कंसल्टेंट- मेडिकल ओनकोलॉजी एंड सेंटर हेड डॉक्टर सज्जन राजपुरोहित से भी बात की है। पढ़ते हैं आगे...

गले के कैंसर के प्रकार (Types of throat cancer)

गले के कैंसर के निम्न प्रकार है- 

1 - ग्लोटिक कैंसर- यह कैंसर वोकल कॉर्ड्स में पैदा होता है।

2 - सुपराग्लोटिक कैंसर- यह कैंसर गले के ऊपरी हिस्से में पैदा होता है। बता दें कि श्वास नली में भोजन जाने से रोकने वाली नली को यानि एपिग्लोटिस को यह कैंसर प्रभावित करता है।

3 - सब ग्लोटिक कैंसर- वोकल कॉर्ड्स के नीचे यानी कंठ नली के नीचे हिस्से में ये कैंसर पैदा होता है।

4 - हाइपोफैरिंजीयल कैंसर- यह कैंसर गले के निचले हिस्से में फैलना शुरू होता है और खाने की नली और स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करता है।

5 - ओरोफैरिंजीयल कैंसर- मुंह के पीछे हिस्से में यह फैलना शुरू होता है। यह वह हिस्सा होता है, जिसमें टॉन्सिल हो जाते हैं।

6 - नसोफैरिंजीयल कैंसर-  यह कैंसर गले की नली के ऊपरी भाग में शुरू होता है। यह नली नाक के पीछे स्थित होती है।

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गले के कैंसर के लक्षण (throat symptoms)

गले के कैंसर के निम्न लक्षण हैं- 

1 - सांस लेने में दिक्कत महसूस करना।

2 - गले में खराश हो जाना।

3 - गर्दन या कान में दर्द पैदा होना।

4 - खांसी में खून का आना।

5 - आवाज में परिवर्तन होना।

6 - बिना किसी कारण वजन बढ़ना

7 - निगलने में कठिनाई महसूस करना है। ऐसा लगना जैसे गले में कुछ अटक रहा है।

अगर आपको इस तरीके के लक्षण दिख रहे हैं और यह लक्षण काफी समय तक हैं तो तुरंत डॉक्टर को संपर्क करें। ऐसा हो सकता है कि लक्षण जल्दी कैंसर का गंभीर रूप ले लें।

गले के कैंसर के चरण (Steps of Throat Cancer)

गले के कैंसर को समझाने के लिए डॉक्टर कुछ चरणों की मदद लेते हैं। इन चरणों से ये पता चलता है कि कैंसर का स्तर कितना बड़ा है या कितना घटा है। जानते हैं चरणों के बारे में-

चरण 1 - इस चरण में ट्यूमर गले तक सीमित है यानी 2 सेंटीमीटर से छोटा है। 

चरण 2 -  इस चरण कैंसर गले तक सीमित है लेकिन 4 सेंटीमीटर से छोटा है।

चरण 3 - इस चरण में कैंसर ऊतक और अंगों में फैल गया है। यानी बड़ा हो गया है।

चरण 4- ट्यूमर आपके लसीका नोड्स के साथ-साथ दूर के अंगों तक फैल गया है।

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गले में कैंसर के कारण (Causes of Throat Cancer)

गले के कैंसर के पीछे निम्न कारण छिपे होते हैं-
1 -  धूम्रपान करने के कारण
2 - तंबाकू चबाने के कारण 
3 - ह्यूमन पैपिलोमा वायरस होने के कारण
4 - बहुत अधिक शराब पीने के कारण
5 - फल या सब्जियों का सेवन भरपूर ना करने के कारण

गले के कैंसर का परीक्षण

1 - एंडोस्कोपी - इसमें डॉक्टर एक पतली लचीली ट्यूब गले में डालते हैं, जिसमें आगे कैमरा लगा होता है इस ट्यूब को एंडोस्कोप कहा जाता है।
2 - बायोप्सी- इसमें डॉक्टर सुई एंडोस्कोपी सर्जरी के माध्यम से गले में टिश्यू निकालते हैं और उस टिश्यू का परीक्षण किया जाता है।
3 -  इमेजिन टेस्ट-  इसमें डॉक्टर m.r.i. पीटीआई सीटी स्कैन x-ray आदि करके यह चेक किया जाता है कि कैंसर आपके गले से बाहर शरीर के किन-किन अंगों में पहुंचता है।

गले के कैंसर से बचाव (prevention of Throat cancer)

गले के कैंसर को निम्न तरीकों से रोका जा सकता है-
1 - धूम्रपान न करने से बचें
अगर आपको धूम्रपान करने की आदत है तो आप निकोटिन की मदद से इस लत को छोड़ सकते हैं। इसके अलावा डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों के सेवन से भी धूम्रपान की लत को कम कर सकते हैं। ऐसा करने से गले के कैंसर की संभावना भी कम हो जाएगी।
2 - स्वस्थ आहार के माध्यम से
जो लोग स्वस्थ डाइट लेते हैं। भरपूर मात्रा में फल, सब्जियां, कम फैट वाला मांस आदि का सेवन करते हैं, उनमें गले के कैंसर की संभावना कम हो जाती है। ऐसे में आप अपनी डाइट में सोडियम के स्रोत भी जोड़ें। ज्यादा वजन को कम करने के साथ-साथ अपनी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि को भी अपनी दिनचर्या में जोड़ें।
3 - शराब का सेवन ना करने से
अगर आप गले के कैंसर से दूर रहना चाहते हैं तो जरूरी है कि शराब का सेवन न करें। और अगर आप शराब का सेवन कर भी रहे हैं तो सीमित मात्रा में करें।

गले के कैंसर का रिस्क -

अगर किसी व्यक्ति को गले का कैंसर हो जाए तो वयक्ति को कई तरीकों से क्षति पहुंच सकती है। जानें कैसे-
1 - गर्दन की त्वचा कठोर या सख्त हो सकती है।
2 - आवाज जा सकती है या बोलने की क्षमता कम हो सकती है।
3 - निगलने में कठिनाई महसूस हो सकती है।
4 - कैंसर अन्य क्षेत्र में फैल सकता है।
5 - सांस लेने में दिक्कत महसूस हो सकती है।
नोट- वैसे तो गले के कैंसर का इलाज कई तरीकों से किया जा सकता है। इसके लिए डॉक्टर सर्जरी की मदद लेते हैं जिससे ट्यूमर को हटाया जाता है। इसके अलावा कई ऐसा दवाईयां भी उपयोग में लाई जाती है जिससे ट्यूमर को नष्ट किया जाता है। ऐसे में अगर आपको उपर दिए गए लक्षणों में से कुछ लक्षण नजर आए तो उन्हें आम समझने की गलती न करें। हो सकता है कि वो कैंसर के शुरुआती दौर का संकेत हो रहे हों। इसलिए बिना देरी के एक्सपर्ट से संपर्क करें। 
याद रखें कि खुद से अपनी डाइट में बदलाव न करें। खासकर तब जब ट्यूमर का शुरुआती दौर चल रहा है। ट्यूमर को दूर करने के लिए डॉक्टर विशेष डाइट को फॉलो करने की सलाह देते हैं। अगर आपको अपनी गर्दन को छूने पर टाइट या कोई गांठ महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। अगर आपके आसपास कोई घूम्रपान कर रहा है तो तुरंत अपने मुंह को कपड़े या मास्क के माध्यम से कवर करें। पानी में मौजूद विषैले कण गले की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में पानी को उबालकर सेवन करें। 
ये लेख मेक्स मल्टी स्पेशियलिटी सेंटर वैशाली और नोएडा के प्रिसिपल कंसल्टेंट- मेडिकल ओनकोलॉजी एंड सेंटर हेड डॉक्टर सज्जन राजपुरोहित से बातचीच पर आधारित है।

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