केरल बाढ़ : पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं पीड़ित, जानें क्या है ये खतरनाक रोग

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 27, 2018
Quick Bites

  • मानसिक आघात का नतीजा आत्महत्या के तौर पर सामने आ रहा है।
  • केरल में आई तबाही बारिश से अब तक भयंकर नुकसान हो चुका है।
  • शहर में राहत शिवरों, कैम्पों और लोगों को बचाने का कार्य जोरों पर है। 

भारत के दक्षिणी राज्य केरल में आई तबाही बारिश से अब तक भयंकर नुकसान हो चुका है। जानमाल का नुकसान होने के साथ ही लोगों के घर तक डूब चुक हैं। आलम यह है कि यह बारिश और तबाही अब भी जारी है। हालांकि शहर में राहत शिवरों, कैम्पों और लोगों को बचाने का कार्य जोरों पर है। इसके बावजूद भयंकर नुकसान हो चुका है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि यह तबाही न सिर्फ लोगों के लिए बाहरी तौर पर घातक है बल्कि यह लोगों को अंदर से भी खोखला कर रही है। इन इलाकों में बाढ़ के पानी से कई तरह के संक्रामक रोगों और जलजनित रोगों का खतरा तो तेजी से बढ़ ही रहा है। साथ ही लोगों में मानसिक बीमारी होने का भी खतरा है। बाढ़ से जान-माल की हानि के बाद इससे लोगों को पहुंचे मानसिक आघात का नतीजा आत्महत्या के तौर पर सामने आ रहा है।

क्या है इसका कारण

दरअसल, केरल में बाढ़ के चलते एक 19 साल के छात्र ने सिर्फ इसलिए आत्महत्या कर ली क्योंकि बाढ़ की वजह से पानी में उसके सारे डॉक्यूमेंट्स और जरूरी कागजात बग गए थे। सिर्फ यही नहीं, एक 54 वर्षीय शख्स ने भी बाढ़ की वजह से अपना लापता होने के चलते फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बाढ़ के बाद तमाम बीमारियां फैलने की आशंका के मद्देनजर जिस तरह केरल में डॉक्टरों की टीम तैनात कर दी गई है। उसी तरह बाढ़ से प्रभावित लोगों के मानसिक स्वास्थ्य का भी ख्याल रखने की जरूरत है, ताकि वो इस सदमे से उबर सकें।

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इन मानसिक रोगों का है खतरा

बाढ़ के चलते हुई तबाही का सदमा लोगों में इस कदर बढ़ गया है कि वह गंभीर मानसिक बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि इन मानसिक रोगों में पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD), अवसाद और चिंता का सबसे ज्यादा खतरा है। अफसोस की बात यह है कि यह बीमारियों अपने साथ कई अन्य बीमारियों को भी साथ लाती हैं। 

तेजी से फैल रहा है लेप्टोस्पायरोसिस

लेप्टोस्पायरोसिस एक तरह का बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जो आदमियों और जानवरों दोनों को प्रभावित करता है। आमतौर पर ये रोग पालतू जानवरों जैसे- गाय, भैंस, बकरी, मुर्गों, कुत्तों और चूहों से फैलता है। आमतौर पर इस रोग के लक्षण जल्दी दिखाई नहीं देते हैं मगर बाढ़ और पानी आदि के प्रभाव में ये रोग तेजी से एक से दूसरे व्यक्ति या जानवर में फैलते हैं। आमतौर पर दूषित पानी और जानवरों के मल-मूत्र के संपर्क में आने से फैलने वाला लेप्टोस्पायरोसिस रोग जानलेवा नहीं होता है मगर ये किडनी को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

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बाढ़ से होने वाली अन्य बीमारियां

बाढ़ के दौरान कई तरह के जलजनित रोगों जैसे- मियादी बुखार, हैजा और हेपटाइटिस-ए, लेप्टोस्पायरोसिस आदि का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा मच्छरों से पैदा होने वाली बीमारियां जैसे- मलेरिया, डेंगू, हेमरहेजिक बुखार, पीतज्वर और वेस्ट नाइल फीवर आदि का भी खतरा बहुत ज्यादा होता है।

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