Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dt Meena Kumari , Dietician

चीनी छोड़ गुड़ को हेल्दी समझकर खा रहे हैं? न्यूट्रिशनिस्ट ने जानें गुड़ से जुड़ी ऐसी 5 गलतफहमियां

लोग चीनी छोड़कर गुड़ का इस्तेमाल करते हैं और सोचते हैं कि यह हेल्दी है, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। हालांकि, गुड़ के फायदे होते हैं, लेकिन उसे चीनी की जगह बहुत ज्यादा इस्तेमाल करने के नुकसान भी हैं। इस लेख में न्यूट्रिशनिस्ट ने गुड़ से जुड़ी गलतफहमियों की सच्चाई बताई है।

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चाय में चीनी की जगह गुड़, खाने के बाद थोड़ा सा गुड़ और सर्दियों में गुड़-चने या गुड़ की रोटी खाना आम है। लोग चीनी के बजाय गुड़ खाना प्रेफर करते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि चीनी का प्राकृतिक और ज्यादा हेल्दी विकल्प गुड़ ही है, लेकिन क्या गुड़ वाकई चीनी से बेहतर है? यह जानने के लिए हमने Meena Kumari, Chief Dietician - Dietetics, Sarvodaya Hospital, Faridabad से बात की।

उन्होंने बताया कि गुड़ को थोड़ी मात्रा में डाइट में शामिल किया जा सकता है, लेकिन इसे हेल्दी शुगर मानकर ज्यादा खाना सही नहीं है।

गुड़ से जुड़ी 5 गलतफहमियों की सच्चाई

Chief Dietician Meena Kumari कहती हैं, “गुड़ बनाने की प्रक्रिया चीनी से अलग जरूर होती है और इसमें कुछ मात्रा में मिनरल्स भी पाए जाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि गुड़ को जितना चाहें उतना खाया जा सकता है। गुड़ में भी शुगर और कैलोरी काफी मात्रा में होती है। इसलिए इसे हेल्दी समझकर ज्यादा खाना सही नहीं है।”

1. चीनी के मुकाबले गुड़ ज्यादा हेल्दी है।

Meena Kumari कहती हैं, “गुड़ प्राकृतिक तरीके से तैयार किया जाता है, लेकिन इसमें मौजूद मुख्य चीज शुगर ही है। इसलिए अगर कोई इसे चाय, दूध या किसी मिठाई में चीनी की जगह गुड़ डालकर खा रहा है, तो इससे शरीर में शुगर और कैलोरी की मात्रा काफी ज्यादा चली जाती है। उदाहरण के तौर पर अगर दिनभर में गुड़ थोड़ा-थोड़ा खाते हैं, तो शरीर में कुल कैलोरी और शुगर बहुत ज्यादा चला जाएगा। लंबे समय तक रूरत से ज्यादा गुड़ के जरिए कैलोरी लेना वजन बढ़ने की वजह बन सकता है। इसलिए गुड़ को नेचुरल समझकर खाना सही नहीं है।”

2. डायबिटीज में चीनी के बजाय गुड़ सुरक्षित है।

Meena Kumari का कहना है, “डायबिटीज से पीड़ित लोगों के बीच एक आम सवाल होता है कि क्या चीनी की जगह गुड़ खाया जा सकता है। इसका जवाब है कि गुड़ डायबिटीज के लिए शुगर फ्री या सुरक्षित स्वीटनर नहीं है। इसमें मौजूद शुगर से ब्लड ग्लूकोज बढ़ सकता है। इसलिए डायबिटीज रोगियों को चाय या खाने में चीनी हटाकर उसकी जगह ज्यादा गुड़ डालना ब्लड शुगर बढ़ा सकता है। डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए गुड़ पर निर्भर रहने के बजाय डायटिशियन की सलाह पर डाइट प्लान बनाना बेहतर रहता है।”

3. गुड़ में मौजूद मिनरल्स सेहत के लिए फायदेमंद हैं।

Meena Kumari के अनुसार, चीनी और गुड़ के बीच एक बड़ा अंतर यह है कि गुड़ में कुछ मात्रा में आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम और कई अन्य मिनरल्स हो सकते हैं। इसलिए कई बार लोग कह देते हैं कि गुड़ खाने से खून बढ़ता है, लेकिन यहां भी मात्रा को समझना जरूरी है। गुड़ में मिनरल्स मौजूद होने का मतलब यह नहीं है कि इसे आयरन सप्लीमेंट या मिनरल सप्लीमेंट बना दिया जाए। अगर शरीर में आयरन की कमी है, तो सिर्फ गुड़ खाने से ठीक नहीं होगी। इसके लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

jaggery vs sugar

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4. गुड़ दांतों को चीनी जितना नुकसान नहीं पहुंचाता है।

Meena Kumari ने कहा, “मीठी चीजें दांतों की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं और यह गुड़ के साथ भी हो सकता है। गुड़ चिपचिपा होता है और अगर खाने के बाद इसके कण दांतों पर रह जाएं या ओरल हाइजीन ठीक न हो, तो दांतों में कैविटी का रिस्क बढ़ सकता है। कई लोग गुड़ को प्राकृतिक मानते हैं और सोचते हैं कि दांतों को नुकसान नहीं होगा, लेकिन ऐसा नहीं होता। इसलिए गुड़ खाने के बाद ओरल हाइजीन का भी ध्यान रखना जरूरी है। दिन में दो बार ब्रश और रेगुलर डेंटल चेकअप कराना चाहिए।”

5. सभी गुड़ एक जैसे होते हैं।

Meena Kumari के अनुसार, गुड़ की क्वालिटी पर भी ध्यान देना जरूरी है। खुले में रखा हुआ या खराब तरीके से तैयार और स्टोर किया गया गुड़ धूल या गंदगी से भर जाता है। इसलिए अगर संभव हो, तो साफ-सुथरी पैकेजिंग और भरोसेमंद स्रोत से गुड़ खरीदना चाहिए। कुछ लोग गुड़ के गहरे या हल्के रंग को देखकर उसकी क्वालिटी की पहचान करने लगते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होता। गुड़ वही खरीदें, जिसके पैकेट पर इंग्रेडिएंट्स लिखे हों और साथ ही गुड़ बनाने व एक्सपायरी डेट साफ शब्दों में लिखी हो।

रिसर्च क्या कहती है?

International Journal of Applied Home Science के अनुसार, डायबिटीज के रोगियों के लिए गुड़ खाना पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है, क्योंकि इसमें भी सुक्रोज की मात्रा होती है।

  • मानसून के सीजन में गुड़ को सही तरीके से न रखने के कारण उसमें संक्रमण होने का खतरा काफी ज्यादा बढ़ सकता है।
  • कुछ लोग गुड़ के रंग को क्वालिटी का पैमाना मापते हैं, लेकिन अगर गुड़ को LDPE पैकेट में रखते हैं, तो गुड़ का रंग गहरा हो सकता है। कुछ ऐसा ही PET पैकेट में रखा गुड़ का रंग भी भूरा हो सकता है।

गुड़ में न्यूट्रिशनल वैल्यू कितनी होती है?

US Department of Agriculture ने 4 ग्राम गुड़ में पोषक तत्वों की मात्रा बताई है।

पोषक तत्व 

मात्रा

एनर्जी

15 Kcal 

प्रोटीन 

0 ग्राम 

कुल फैट 

0 ग्राम

कार्बोहाइड्रेट 

4 ग्राम

टोटल शुगर 

4 ग्राम

सोडियम 

10 मिलीग्राम 

 रोज कितना गुड़ खाना चाहिए?

Chief Dietician Meena Kumari कहती हैं, “गुड़ खाने की मात्रा का कोई यूनिवर्सल नियम नहीं है। उम्र, कुल कैलोरी, फिजिकल एक्टिविटी और हेल्थ कंडीशन के हिसाब से अलग-अलग जरूरत हो सकती है। एक स्वस्थ व्यक्ति को करीब एक चम्मच यानी करीब 5 से 7 ग्राम तक गुड़ ले सकता है, लेकिन इस रोजाना की जरूरत न समझे। डायबिटीज, प्री-डायबिटीज या वजन कम कर रहे लोगों को गुड़ की मात्रा के साथ-साथ दिनभर में लिया जाने वाले कार्बोहाइड्रेट्स और मीठे पर ध्यान देना चाहिए।”

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निष्कर्ष
Meena Kumari सलाह देती हैं कि गुड़ और चीनी दोनों ही मीठे होते हैं। हालांकि, गुड़ में जरूरी मिनरल्स होते हैं, लेकिन इसमें कैलोरी और शुगर होता है। इसलिए गुड़ की ज्यादा मात्रा लेना सेहत के लिए अच्छा नहीं होता। डाइट में गुड़ की मात्रा कम रहनी चाहिए और डाइट को बैलेंस रखना ज्यादा जरूरी है। डायबिटीज और वजन कम करने वाले लोगों को गुड़ के पोर्शन का ज्यादा ध्यान रखना चाहिए।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • क्या सुबह खाली पेट गुड़ और पानी पीने से वजन तेजी से घटता है?

    गुड़ खुद में एक प्राकृतिक स्वीटनर है। हालांकि यह पाचन क्रिया को सुधारता है, लेकिन इसे खाने से सीधे तौर पर फैट बर्न नहीं होता। ज्यादा मात्रा में गुड़ खाने से शरीर में कैलोरीज बढ़ेंगी जिससे वजन घटने के बजाय बढ़ सकता है।
  • क्या गर्मियों के मौसम में गुड़ का सेवन करना सही है?

    गुड़ की तासीर गर्म होती है। गर्मियों में इसका बहुत ज्यादा इस्तेमाल करने से पेट में गर्मी, नकसीर फूटना या पिंपल्स की समस्या हो सकती है। गर्मियों में इसका सेवन बहुत सीमित मात्रा में ही करें।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 01, 2026 17:36 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dt Meena Kumari

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