इन दिनों इंटरनेट में एक खबर ने खासा तूल पकड़ ली है कि सीमा हैदर के घर छठी बार नन्हीं किलकारियां गूंज रही हैं। इसका मतलब है कि उन्होंने अपने छठे बच्चे को जन्म दिया है। हैरानी की बात ये कि सीमा हैदर ने 11 महीने के अंदर ही दो बच्चों को जन्म दिया है। इस खबर से इंटरनेट पर यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि दो बच्चों के बीच इतना कम गैप कितना सही है और इसका महिला स्वास्थ्य पर किस तरह का असर पड़ता है? अगर आप भी उन महिलाओं में हैं, जो अपने दूसरे बच्चे की प्लानिंग कर रही हैं, तो इस लेख को जरूर पढ़ें। इस लेख में Mumma's Blessing IVF और वृंदावन स्थित Birthing Paradise की Medical Director and IVF Specialist डॉ. शोभा गुप्ता आपको बताएंगी कि 11 महीने में दो बच्चों को जन्म देना कितना सेफ है?
क्या 11 महीने में दो बच्चों को जन्म देना सुरक्षित है?
11 महीने में दो बच्चों को जन्म देना किसी भी लिहाज से सही नहीं माना जाता है। इस संबंध में डॉ. शोभा गुप्ता समझाती हैं, ‘11 महीने में दो बच्चों को जन्म देने का मतलब है कि डिलीवरी के बाद दो-तीन महीने के अंदर ही महिला ने कंसीव कर लिया। आमतौर पर इसे हाई रिस्क प्रेग्नेंसी माना जाता है।’ डॉ. शोभा गुप्ता आगे बताती हैं, ‘दो बच्चों के बीच कम से कम 18 महीने का गैप होना चाहिए। यह न सिर्फ दो बच्चों की ग्रोथ के लिए बेहतर होता है, बल्कि महिला की रिकवरी बेहतर होती है और दूसरी प्रेग्नेंसी में किसी भी तरह का जोखिम कम होता है।’ NCBI की रिपोर्ट भी यह साबित करती है कि 6-18 महीने से पहले दूसरी बार कंसीव करने से महिला की हेल्थ बुरी तरह प्रभावित होती है, गर्भाशय को भारी नुकसान हो सकता है और यह शिशु के लिए भी सही नहीं है।
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शिशु के लिए जोखिम
अगर मां 11 महीने में दो बच्चों को जन्म देती हैं, तो इसकी वजह से शिशु का स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है-
- समय से पहले बच्चे का जन्मः अगर महिला 11 महीने में ही दो बच्चों को जन्म देती है, तो यह दूसरे बच्चे के लिए ज्यादा खतरनाक होता है। उसका समय से पहले जन्म हो सकता है। जाहिर है, इसका उनके विकास पर भी असर पड़ता है।
- जन्म के समय अंडरवेट होनाः 11 महीने में दो बच्चों के जन्म का मतलब है कि दूसरी प्रेग्नेंसी में महिला को पर्याप्त पोषण और रेस्ट नहीं मिला है। वहीं, अगर महिला पहले बच्चे को ब्रेस्टफीड करवा रही है, तो गर्भ में पल रहे शिशु दूसरे शिशु के विकास पर असर पड़ता है। नतीजतन, डिलीवरी के दौरान बच्चा जन्म के समय अंडरवेट हो सकता है।
- जन्म के समय मृत्युः 11 महीने के अंदर दो बच्चों का जन्म दूसरे बच्चे के बचने की संभावना को कम कर देता है। इसका मतलब है कि अगर प्रेग्नेंसी के दौरान महिला को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता है, तो इसका गर्भ पर बुरा असर पड़ सकता है। यहां तक कि महिला को मेडिकल कंडीशन जैसे जेस्टेशनल डायबिटीज आदि हो सकते हैं।
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महिला के लिए जोखिम
- गर्भाशय का फटनाः महज 11 महीने के गैप में दो बच्चों को जन्म देने के कारण महिला का गर्भाशय कमजोर हो जाता है। इसी वजह से डिलीवरी के दौरान गर्भाशय के फटने का जोखिम बढ़ जाता है।
- प्लेसेंटल एब्रेप्शनः डिलीवरी के तुरंत बाद कंसीव करने से प्लेसेंटा एब्रेप्शन का रिस्क बढ़ जाता है। इस कंडीशन में डिलीवरी से पहले ही प्लेसेंटा गर्भाशय से अलग हो जाता है। यह एक गंभीर स्थिति है। इसमें महिला को ब्लीडिंग हो सकती है और शिशु में ऑक्सीजन तथा पोषक तत्व की कमी हो सकती है।
- एनीमिया का रिस्कः इतने कम से समय में दो बार कंसीव करना, एक बच्चा ब्रेस्टफीड करे और दूसरे का गर्भ में विकास हो रहा है। इस तरह की स्थिति में महिला के शरीर को पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिलते हैं और उन्हें एनीमिया होने का रिस्क बढ़ जाता है। ध्यान रखें कि एनीमिया होने पर शरीर में ब्लड सप्लाई कम हो जाती है, जो कि गर्भ में पल रहे दूसरे शिशु के विकास के लिए सही नहीं है।
निष्कर्ष
वैसे तो महिला को कब कंसीव करना है और अपने दो बच्चों के बीच कितने साल का गैप रखना है, यह सभी बातें महिला का निजी फैसला होता है। हालांकि, डॉक्टर सुझाव देते हैं कि दो बच्चों के बीच कम से कम 18 महीने का गैप होना जरूरी है। महिला को पहली डिलीवरी के बाद रिकवरी के लिए समय चाहिए होता है। दो बच्चों के बीच कम समय का गैप रखने के कारण महिला का शरीर बहुत कमजोर हो जाता है, जिससे सेकेंड बेबी की डिलीवरी में जटिलताएं बढ़ जाती हैं।
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FAQ
दो बच्चों के बीच कम से कम कितना अंतर होना चाहिए?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दो बच्चों के बीच कम से कम 18 से 24 महीने का अंतर होना चाहिए। यह मां की हेल्थ के लिए जरूरी है।क्या सिजेरियन के बाद तुरंत दोबारा कंसीव करना अधिक खतरनाक है?
एक्सपर्ट्स की मानें, तो यह सच है कि सिजेरियन डिलीवरी के तुरंत बाद कंसीव करना अध्कि खतरनाक हो सकता है। महिलाओं को सेकेंड प्रेग्नेंसी के लिए कम से कम 18 महीने का इंतजार जरूर करना चाहिए।ब्रेस्टफीडिंग के दौरान दोबारा प्रेग्नेंट होने पर क्या चुनौतियां आती हैं?
अगर महिला ब्रेस्टफीडिंग के दौरान कंसीव कर लेती है, तो इससे उनके शरीर पर दुगना बोझ बढ़ जाता है। दरअसल, पहले से ही ब्रेस्टफीड कराने के कारण महिला कमजोर होती है और कंसीव करने की वजह से गर्भ में पल रहे शिशु के विकास का बोझ भी महिला स्वास्थ्य पर पड़ने लगता है।
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Feb 18, 2026 18:23 IST
Modified By : Meera Tagore Feb 18, 2026 18:23 IST
Modified By : Meera TagoreFeb 18, 2026 18:23 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta