Fri Sep 11, 2026 | 09:04 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

पैकेट वाले दूध के ज्यादातर ब्रांड्स ब्लाइंड टेस्ट में फेल, जानें क्या Tetra Pack वाला दूध है ज्यादा सुरक्षित?

एफएसएसआई को गुजरात में दूध के सैंपल में म‍िलावट म‍िली। यह म‍िलावट आपके दूध में भी हो सकती है। ऐसे में यह सवाल मन में आता है क‍ि आख‍िर पैकेट वाले दूध का सेवन बेहतर है या टेट्रा पैकेट? इस सवाल का जवाब एक्‍सपर्ट की मदद से जानेंगे।

लोग सुबह-सुबह उठकर दूध वाली चाय पीते हैं, बच्‍चे दूध पीकर स्‍कूल जाते हैं, श‍ि‍शुओं को बोतलोंं में दूध प‍िलाया जाता है। ऐसे में अगर आपको पता चले क‍ि जो दूध आप पी रहे हैं वो म‍िलावटी है, तो कैसा लगेगा? हाल ही में दूध में म‍िलावट पाई गई है ज‍िसके बाद यह सवाल मन में आता है क‍ि पैकेट वाला दूध चुनें या टेट्रा पैक वाले दूध का सेवन करें। फूड सेफ्टी एंड स्टैडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने बताया क‍ि गुजरात के एक फैक्ट्री यून‍िट में छापा मारा जहां स‍िंथेट‍िक दूध बनाया जा रहा था। जांच में खुलासा हुआ क‍ि डिटर्जेंट पाउडर, यूरिया खाद, कॉस्टिक सोडा, रिफाइंड पाम, सोयाबीन ऑयल, व्हे पाउडर और स्किम्ड मिल्क पाउडर जैसी चीजों को म‍िलाकर दूध तैयार क‍िया जा रहा था।
Trustified नाम के YouTube Channel ने हाल ही में अपने एक वीड‍ियो में दावा किया गया था कि अमूल ताजा और गोल्‍ड म‍िल्‍क, अमूल टेट्रा पैक, मदर डेयरी दूध और कंट्री डिलाइट का दूध लैब टेस्‍ट में फेल हो गया। अमूल दूध में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया एफएसएसएआई की सुरक्ष‍ित मात्रा से ज्‍यादा पाए गए। मदर डेयरी म‍िल्‍क और कंट्री ड‍िलाइट टोटल प्‍लेट काउंट की सेफ ल‍िम‍िट तय सीमा से ज्‍यादा न‍िकली। ऐसी खबरें पढ़कर मन में सवाल आता है क‍ि पैकेट वाले दूध को प‍िएंं या टेट्रा पैक वाले दूध का सेवन करें? दोनों में से ज्‍यादा हेल्‍दी व‍िकल्‍प क्‍या है? इस सवाल का जवाब आगे एक्‍सपर्ट से जानेंगे। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

पैकेट वाले दूध और टेट्रा पैक वाले दूध में अंंतर- Difference Between Packet Milk And Tetra Pack Milk

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  • टेट्रा पैक वाले दूध को लंबे समय तक स्‍टोर करने के ल‍िए बनाया जाता है। वहीं दूसरी ओर पैकेट वाले दूध की शेल्‍फ लाइफ एक से तीन द‍िन के बीच होती है।
  • पोषक तत्‍वों की बात करें, तो दोनोंं में ही प्रोटीन और कैल्‍श‍ियम जैसे पोषक तत्‍व मौजूद होते हैं, लेक‍िन टेट्रा पैक में यूएचटी प्रोसेस‍िंग के कारण न्‍यूट्रि‍एंट्स थोड़े कम हो सकते हैं।
  • स्‍वाद की बात करें, तो मेरे न‍िजी अनुभव के आधार पर मैं यह कह सकती हूं क‍ि आपको टेट्रा पैक वाले दूध का स्‍वाद उतना पसंद नहींं आएगा, ऐसा लगेगा जैसे दूध ज्‍यादा पका हुआ है वहीं पैकेट वाले दूध का स्‍वाद ताजा लगता है और इसे ज्‍यादातर लोग पसंद करते हैं।
  • टेट्रा पैक वाले दूध को अल्‍ट्रा हाई तापमान प्रोसेसि‍ंग से गुजरना पड़ता है ज‍िसके कारण इसके सारे बैक्‍टीर‍िया मर जाते हैं, यहां तक क‍ि लैक्‍ट‍िक एस‍िड भी खत्‍म हो जाता है ज‍िससे दही बनता है। साथ ही इसे उबालने की जरूरत नहीं होती वहीं दूसरी ओर पाश्चुरीकृत दूध में कुछ बैक्‍टीर‍िया होते हैं ज‍िस वजह से इसे ज्‍यादा समय हो जाने पर उबालने की जरूरत पड़ती है।

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क‍िस दूध को चुनें?

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Nutritionist Neha Sinha ने बताया क‍ि अगर लंबे समय तक स्‍टोर करने वाले व‍िकल्‍प को चुनना है, तो टेट्रा पैक वाले दूध को चुनें और अगर ज्‍यादा ताजगी और स्‍वाद वाला दूध चाह‍िए, तो पैकेट वाले दूध को चुनें, लेक‍िन इसकी शेल्‍फ लाइफ का ध्‍यान रखें। पैकेट वाले दूध का स्‍वाद बेहतर होता है, लेक‍िन इसमें बैक्‍टीर‍िया ज्‍यादा होते हैं। अगर पैकेट वाले दूध को सही तापमान और हाइजीन के साथ स्‍टोर करेंगे, तो रोगजनक बैक्टीरिया का काउंंट कम हो सकता है।

न‍िष्‍कर्ष:

अपनी जरूरत के मुताब‍िक पैकेट वाला दूध या टेट्रा पैकेट वाले दूध को चुन सकते हैं। दोनों के ही पोषक तत्‍व लगभग समान होते हैं। पैकेट वाले दूध में न्‍यूट्र‍िएंट्स थोड़े ज्‍यादा होते हैं लेक‍िन उसकी शेल्‍फ लाइफ कम होती है वहीं टेट्रा पैक वाले दूध की शेल्‍फ लाइफ ज्‍यादा होती है, लेक‍िन इसका स्‍वाद आपको थोड़ा अलग लग सकता है।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Feb 11, 2026 20:25 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Feb 11, 2026 20:25 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Neha Mohan Sinha

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