Wed Oct 7, 2026 | 12:23 PM IST

Medically Reviewed by Dr Anju Suryapani , Senior Consultant – Obstetrics, Gynaecology

क्या गर्भावस्था के दौरान गैस बनने से बच्चे को कोई नुकसान होता है? डॉक्टर से जानें

प्रेग्नेंसी में गैस बनना नॉर्मल है और इससे शिशु को कोई नुकसान नहीं होता है, क्योंकि एम्नियोटिक फ्लूइड व गर्भाशय बच्चे को सुरक्षित रखते हैं। प्रेग्नेंसी में हार्मोनल बदलाव, गर्भाशय का बढ़ना और खान-पान गैस के कारण हैं। छोटे मील, पानी व वॉक से राहत मिलती है।
क्या गर्भावस्था के दौरान गैस बनने से बच्चे को कोई नुकसान होता है? डॉक्टर से जानेंक्या गर्भावस्था के दौरान गैस बनने से बच्चे को कोई नुकसान होता है? डॉक्टर से जानें

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई बदलाव आते हैं, जिसमें हार्मोनल बदलाव और पाचन के स्लो होने जैसी समस्याएं शामिल हैं। पाचन के स्लो होने पर कई महिलाएं गैस, कब्ज, ब्लोटिंग, ऐंठन और एसिडिटी जैसी समस्याएं हो जाती हैं। प्रेग्नेंसी में महिलाएं छोटी-छोटी चीजों को लेकर कॉन्शियस रहती हैं। ऐसे में कई महिलाओं के मन में सवाल आता है प्रेग्नेंसी के दौरान अगर गैस होती है, तो क्या इससे बच्चे के स्वास्थ्य पर असर होता है? आइए इस बारे में Dr.(Prof.) Anju Suryapani, Sr. Consultant - Obstetrics & Gynaecology, Metro Hospital, Noida से जानें।

प्रेग्नेंसी में गैस से बच्चे पर बुरा असर होता है?

डॉ. अंजू सूर्यपानी का कहना है, "प्रेग्नेंसी में बनने वाली गैस से आपके भ्रूण पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है। महिलाओं का यह डर नेचुरल है कि मां के पेट में गैस, ब्लोटिंग या ऐंठन हो तो बच्चे पर असर हो सकता है या उसे ऑक्सीजन या पोषण मिलने में परेशानी हो सकती है, लेकिन ऐसा नहीं है। एम्नियोटिक फ्लूइड और शारीरिक स्ट्रक्चर के कारण गैस जैसी समस्याओं से बच्चे का बचाव होता है।"

  • एम्नियोटिक फ्लूइड (Amniotic Fluid): आपका शिशु गर्भाशय (Uterus) के अंदर 'एम्नियोटिक सैक' नाम की एक थैली में तैरता रहता है, जो एक एम्नियोटिक फ्लूइड नामक खास फ्लूइड से भरी होती है। यह फ्लूइड एक नेचुरल शॉक एब्जॉर्बर की तरह काम करता है।
  • मजबूत शारीरिक स्ट्रक्चर: गर्भाशय की मजबूत मांसपेशियां और एम्नियोटिक फ्लूइड मिलकर बच्चे को बाहर के हर दबाव, गैस की ऐंठन या ब्लोटिंग से पूरी तरह सुरक्षित रखते हैं।

ऐसे में आपके पाचन तंत्र में बनने वाली गैस या ब्लोटिंग का असर आपके गर्भ में पल रहे बच्चे तक बिल्कुल नहीं पहुंचता है। बच्चा अंदर पूरी तरह सुरक्षित और आरामदायक स्थिति में रहता है।

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प्रेग्नेंसी में गैस क्यों होती है?

डॉ. अंजू बताती हैं, प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को गैस और ब्लोटिंग होने की समस्या शरीर में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के असंतुलित होने और गर्भाशय का साइज बढ़ने जैसे दो कारण अहम हो सकते हैं, लेकिन कई बार प्रेग्नेंसी के दौरान कब्ज, तेजी से खाना खाने, ज्यादा तला-भुना या मसालेदार खाना खाने, गैस वाली सब्जियों का सेवन करने (पत्तागोभी, ब्रोकली, बीन्स, छोले, राजमा, मैदा, और अत्यधिक कार्बोनेटेड ड्रिंक्स या सॉफ्ट ड्रिंक्स) और फिजिकल एक्टिविटीज न करने जैसी आदतों के कारण भी गैस बनने जैसी समस्याएं होती हैं।

प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के असंतुलित होने

प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन तेजी से बढ़ता है। इसके कारण शरीर की सभी चिकनी मांसपेशियों को रिलैक्स कर देता है। इसके कारण आंतों की स्पीड स्लो हो जाती है और पाचन प्रक्रिया स्लो पड़ जाती है। ऐसे में खाने के लंबे समय तक आंतों में रहने से गैस बनने की समस्या होती है।

गर्भाशय का साइज बढ़ना

प्रेग्नेंसी में बढ़ते समय के साथ गर्भाशय का साइज बढ़ता रहता है। इसके कारण आंतों और पेट पर दबाव बढ़ता है। ऐसा में कम जगह के कारण गैस आंतों में फंसने लगती है। जिसके कारण महिलाओं को आंतों में ब्लोटिंग महसूस हो सकती है।

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क्या कहती है स्टडी?

साल 2010 में Clinics in Colon and Rectal Surgery में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, प्रेग्नेंसी में कब्ज या गैस की समस्या शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोनल बदलाव, गर्भाशय पर दबाव बढ़ने, फिजिकल एक्टिविटीज न करने, मोटिलिन का कम स्तर और पानी का ज्यादा अवशोषण होने के कारण हो सकती है।

प्रेग्नेंसी में गैस की समस्या से राहत के लिए क्या करें?

डॉ. अंजू कहती हैं, प्रेग्नेंसी में गैस और ब्लोटिंग की समस्या से बचने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल और अच्छा आदतों को अपनाना जरूरी हो जाता है।

  • छोटे-छोटे मील लें। एक साथ ज्यादा खाना न खाएं। दिन में 5-6 बार थोड़ा-थोड़ा करके खाएं।
  • खाना धीरे-धीरे चबाकर खाएं।
  • दिनभर में पर्याप्त पानी पिएं।
  • डॉक्टर की सलाह के साथ नियमित रूप से 15-20 मिनट की हल्की वॉक करें।
  • फाइबर युक्त फूड खाएं।

ध्यान रहे, बिना डॉक्टर की सलाह के गैस या एंटासिड की कोई भी दवा का सेवन खुद से न करें। इनका सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

डॉक्टर से सलाह कब लें?

डॉ. अंजू का कहना है, प्रेग्नेंसी में गैस होना पूरी तरह से नॉर्मल है और इससे कोई नुकसान नहीं होता है, लेकिन कभी-कभी महिलाएं गर्भाशय के संकुचन या अन्य गंभीर पेट दर्द को गलती से गैस का दर्द समझ लेती हैं। ऐसे में अगर महिलाओं को पेट से जुड़ी कोई समस्या होती है, तो इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें। जैसे -

  • लगातार पेट दर्द
  • पेट में ऐंठन के साथ ब्लीडिंग
  • कमर के निचले हिस्से में तेज दर्द
  • शिशु की हलचल
  • उल्टी और बुखार

इन समस्याओं के होने पर डॉक्टर से तुरंत सलाह लें। ताकि समय रहते इलाज मिल सके।

निष्कर्ष

प्रेग्नेंसी में गैस और ब्लोटिंग होने जैसी समस्या नॉर्मल है। इनसे बच्चे को कोई परेशानी नहीं होती है। प्रेग्नेंसी में शरीर में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के असंतुलित होने और गर्भाशय का साइज बढ़ने, कब्ज, ज्यादा तला-भुना खाना खाने, गैस बनाने वाली सब्जियों का सेवन करने और फिजिकल एक्टिविटीज न करने जैसी आदतों के कारण महिलाओं को गैस बनने की समस्या होती है।

ध्यान रहे, प्रेग्नेंसी में गैस की समस्या से बचने के लिए महिला को दिनभर में पर्याप्त पानी पिएं, हल्की वॉक करें, फाइबर युक्त फूड्स खाएं, छोटे-छोटे मील लें और खाना धीरे-धीरे चबाकर खाएं। प्रेग्नेंसी के दौरान कोई भी परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

All Images Credit- Freepik

FAQ

  • प्रेग्नेंसी में पाचन से जुड़ी समस्याएं क्यों होती हैं?

    प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोन्स में बदलाव आने और पाचन के स्लो होने की समस्या होती है। इसके कारण लोगों को कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी पाचन संबंधी समस्याएं होने लगती हैं।
  • प्रेग्नेंसी में क्या-क्या परेशानियां होती हैं?

    प्रेग्नेंसी के दौरान शारीरिक और मानसिक बदलावों के कारण महिलाओं को जी मिचलाने, थकान, कमजोरी, गैस, कब्ज, एसिडिटी, बार-बार पेशाब आने, पीठ और पैरों में दर्द होने की समस्या हो सकती है। 

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Priyanka Sharma

Health & Lifestyle Journalist

प्रियंका शर्मा पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 2 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर हैं। वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, प्रेगनेंसी, स्किनकेयर, हेयरकेयर, आयुर्वेद, योग और हार्ट हेल्थ जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखती हैं और जटिल स्वास्थ्य जानकारी को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञों की राय और भरोसेमंद मेडिकल स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह Grehlakshmi (महिला केंद्रित हिंदी पत्रिका) और Noida Khabar के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 09, 2026 18:32 IST

    Published By : Priyanka Sharma
    Reviewed By : Dr Anju Suryapani