Fri Sep 25, 2026 | 01:35 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

क्‍या अंडा खाने से यूर‍िक एस‍िड बढ़ता है? एक्‍सपर्ट से जानें

हाई यूर‍िक एस‍िड में अक्‍सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है क‍ि वे अंडा खाएं या नहीं क्‍योंक‍ि इसमें प्रोटीन होता है। एक्‍सपर्ट से जानें क्‍या है सही न‍ियम?
क्‍या अंडा खाने से यूर‍िक एस‍िड बढ़ता है? एक्‍सपर्ट से जानेंक्‍या अंडा खाने से यूर‍िक एस‍िड बढ़ता है? एक्‍सपर्ट से जानें

कुछ लोगों की ब्‍लड र‍िपोर्ट में जब यूर‍िक एस‍िड बढ़ा हुआ द‍िखता है, तो वे अंडे का सेवन बंद कर देते हैं क्‍योंक‍ि इसमें प्रोटीन होता है। हालांक‍ि, एक्‍सपर्ट्स मानते हैं क‍ि प्रोटीन र‍िच फूड्स का सेवन करने से यूर‍िक एस‍िड की मात्रा नहीं बढ़ती है, बल्‍क‍ि प्‍यूर‍िन र‍िच फूड्स के सेवन से यूर‍िक एस‍िड बढ़ता है। ऐसा नहीं है क‍ि यूर‍िक एस‍िड बढ़ा हुआ है, तो शरीर को प्रोटीन र‍िच फूड्स की जरूरत नहीं होगी। हाई यूर‍िक एस‍िड में भी व्‍यक्‍त‍ि प्रोटीन का सेवन कर सकता है। आइए समझते हैं क‍ि आख‍िर हाई यूर‍िक एस‍िड में अंडे का सेवन क‍ितना सुरक्ष‍ित है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

शरीर में यून‍िक एस‍िड बनना नॉर्मल है

शरीर में यूर‍िक एस‍िड का बनना एक नॉर्मल बायोलॉज‍िकल प्रोसेस है। यह हमारे शरीर में तब बनता है जब हमारा शरीर प्‍यूर‍ि‍न र‍िच फूड्स को डाइजेस्‍ट करता है या जब शरीर पुराने सेल्‍स को तोड़ता है। इसल‍िए शरीर में यूर‍िक एस‍िड का बनना सामान्‍य बात है। समस्‍या तब होती है जब क‍िडनी यूर‍िक एस‍िड को बाहर नहीं न‍िकाल पाती है या शरीर में यूर‍िक एस‍िड की मात्रा ज्‍यादा हो जाती है।

अंडे में प्‍यूर‍िन की मात्रा कम होती है

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अंडे, टोफू, पनीर वगैरह का सेवन हाई यूर‍िक ए‍स‍िड में कर सकते हैं। अंडे और पनीर में प्‍यूर‍िन की मात्रा कम होती है इसल‍िए इनका सेवन क‍िया जा सकता है। अगर क‍िसी फूड में प्‍यूर‍िन की मात्रा ज्‍यादा होगी, तो वह शरीर में जाकर यूर‍िक एस‍िड को तेजी से बढ़ा सकता है। 100 ग्राम अंडे में करीब 2 से 5 एमजी प्‍यूर‍िन होता है जो क‍ि बहुत कम है इसल‍िए हाई यूर‍िक एस‍िड में भी अंडे की सही मात्रा का सेवन कर सकते हैं।

साल 2014 में Biological & Pharmaceutical Bulletin में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, अंडे और डेयरी प्रोडक्ट्स में प्यूरिन की मात्रा या तो लगभग न के बराबर थी या 13 mg/100 ग्राम से कम थी। इसलिए इन्हें कम प्यूरिन वाले फूड्स की श्रेणी में रखा गया।

एक मीड‍ियम अंडे में 6 से 7 ग्राम प्रोटीन

  • एक मीड‍ियम अंडे में 6 से 7 ग्राम प्रोटीन होता है। इसल‍िए रोज 1 से 3 अंडे का सेवन कर सकते हैं।
  • अंडे को ज्‍यादा मक्‍खन या ज्‍यादा फैट वाली चीजों के साथ पकाकर न खाएं।

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शरीर में हाई यूर‍िक एस‍िड की समस्‍या क्‍यों होती है?

हाई यूर‍िक एस‍िड बनने के पीछे अक्‍सर तीन मुख्‍य कारण देखे जाते हैं-

1. ल‍िवर में ज्‍यादा यूर‍िक एस‍िड बनना

इंसुल‍िन र‍ेज‍िस्‍टेंस, कैलोरी इनटेक ज्‍यादा होना, क्रोन‍िक इंफ्लेमेशन जैसी कंडीशन में प्‍यूर‍िन जल्‍दी ब्रेकडाउन जल्‍दी होता है और ल‍िवर में यूर‍िक एस‍िड अध‍िक मात्रा में बनने लगता है।

2. क‍िडनी द्वारा यूर‍िक एस‍िड को बाहर न न‍िकाल पाना

मेटाबॉल‍िक स्‍ट्रेस, ड‍िहाइड्रेशन और क‍िडनी में हाई टॉक्‍स‍िन की मात्रा होने के कारण क‍िडनी पर लोड बढ़ जाता है और क‍िडनी द्वारा यूर‍िक एसिड को बाहर न न‍िकाल पाने की कंडीशन में यूर‍िक एस‍िड, ब्‍लड में जमा होने लगता है।

3. जोड़ों और क‍िडनी में क्र‍िस्‍टल्‍स बनना

जब ब्‍लड में यूर‍िक एस‍िड ज्‍यादा हो जाता है, तो क्र‍िस्‍टल्‍स बनने लगते हैं। ये क्र‍िस्‍टल्‍स जोड़ों में इकट्ठा होने लगते हैं ज‍िसके कारण जोड़ों में दर्द, सूजन और स्‍ट‍िफनेस की समस्‍या होती है। ये क्र‍िस्‍टल्‍स क‍िडनी स्‍टोन का कारण भी बन सकते हैं।

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यूर‍िक एस‍िड कंट्रोल करने के डाइट ट‍िप्‍स

ड‍िहाइड्रेशन से बचें

पर्याप्‍त पानी प‍िएं। क‍िडनी को द‍िनभर हाइड्रेशन की जरूरत होती है इसल‍िए एक साथ 1 लीटर पानी पीने के बजाय द‍िनभर में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी प‍िएं। द‍िन में स‍िर्फ 2 से 3 बार पानी पीने से क‍िडनी को फायदा नहीं म‍िलता, इसल‍िए समय-समय पर पानी का सेवन करना चाह‍िए।

मील्‍स स्‍क‍िप करने से बचें

जब हम लंबे समय तक खाते नहीं है, तो ल‍िवर ग्‍लूकोज की तलाश करने लगता है ज‍िससे इंटरनल प्‍यूर‍िन ब्रेक डाउन होने की प्रक्र‍िया तेज हो जाती है। इससे यूर‍िक एसिड बढ़ सकता है।

प्रोटीन के साथ कार्ब्स लेने से बचें

अगर आप प्रोटीन र‍िच फूड्स जैसे अंडे या दाल के साथ कार्ब्स का सेवन करेंगे, तो यूर‍िक एस‍िड बढ़ सकता है। कई लोग दाल के साथ चावल और रोटी दोनों का सेवन करते हैं। इससे प्‍यूर‍िन लोड बढ़ता है और शुगर स्‍पाइक होता है और यूर‍िक एस‍िड की मात्रा भी बढ़ सकता है। इससे बचना चाह‍िए।

न‍िष्‍कर्ष:

अंडे में प्‍यूर‍िन की मात्रा कम होती है। 100 ग्राम अंडों में करीब 2 से 5 एमजी प्‍यूर‍िन होता है जो क‍ि बहुत कम है। एक मीड‍ियम अंडे में 6 से 7 ग्राम प्रोटीन है और हाई यूर‍िक एस‍िड में प्रोटीन र‍िच फूड्स ले सकते हैं। इस बात का ध्‍यान रखें क‍ि प्रोटीन के साथ कार्ब्स की मात्रा ज्‍यादा न हो। जैसे अंडे को ज्‍यादा मक्‍खन या घी में पकाकर या फ्राई करके न खाएं। इसी तरह दाल को भी कार्ब्स जैसे रोटी या चावल या दोनों के साथ पेयर करके खाने से यूर‍िक एस‍ि‍ड बढ़ सकता है। हाई यूर‍िक एस‍िड बनने के पीछे अक्‍सर तीन कारण होते हैं जैसे- जोड़ों और क‍िडनी में क्र‍िस्‍टल्‍स बनना, क‍िडनी द्वारा यूर‍िक एस‍िड को बाहर न न‍िकाल पाना और ल‍िवर में अधि‍क यूर‍िक एस‍िड बनना। यूर‍िक एस‍िड कंट्रोल करने के ल‍िए ड‍िहाइड्रेशन से बचें और मील्‍स को स्‍क‍िप न करें।

image credit: magnific

FAQ

  • क‍िन चीजों को खाने से बढ़ सकता है यूर‍िक एस‍िड? 

    हाई फ्रुक्‍टोज शुगरी ड्र‍िंक्‍स, सॉफ्ट ड्र‍िंक्‍स, पैक्‍ड जूस, एनर्जी ड्र‍िंक्‍स, अल्‍कोहल, ऑर्गन मीट, रेड मीट, बेकरी, फ्राइड फूड्स, नमकीन वगैरह। 
  • यूर‍िक एस‍िड को कंट्रोल करने वाले फूड्स कौन से हैं?

    लेमन वॉटर, कोकोनट वॉटर, लौकी, तोरई, व‍िटाम‍िन सी र‍िच फ्रूट्स, लो फैट डेयरी जैसे छाछ वगैरह। 

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Modified By : Yashaswi Mathur
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