अगर भोजन करने के बाद पोस्ट मील शुगर 200 mg/dL से ज्यादा है, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे रिफाइंड कार्ब्स का ज्यादा सेवन करना, फाइबर कम लेना, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स को अनदेखा करना, सही समय पर भोजन न करना, पोर्शन कंट्रोल पर गौर न करना, रोटी-चावल जैसे कॉम्बिनेशन का सेवन करने से भी शुगर लेवल अधिक बढ़ सकता है। आइए जानते हैं पोस्ट मील शुगर को कैसे कंट्रोल कर सकते हैं और किन गलतियों से बचना चाहिए? बेहतर जानकारी के लिए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।
American Diabetes Association के मुताबिक, भोजन शुरू करने के करीब 10 मिनट बाद ब्लड ग्लूकोज बढ़ना शुरू हो जाता है, खासतौर पर भोजन से कार्ब्स के एब्जॉर्ब होने की प्रक्रिया के कारण। स्वस्थ लोगों में ब्लड ग्लूकोज आमतौर पर खाना शुरू करने के लगभग 60 मिनट बाद पीक करता है, आमतौर पर 140 mg/dL से ऊपर नहीं जाता और 2 से 3 घंटे में प्री-मील स्तर के करीब लौट आता है।
पोस्ट मील शुगर 200 mg/dL से ऊपर होने का क्या मतलब है?
जब भी हम भोजन करते हैं, तो भोजन से मिलने वाला कार्ब्स, ग्लूकोज में बदलता है जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है। पोस्ट मील शुगर का सामान्य स्तर 140 mg/dL या उससे कम होना चाहिए। अगर पोस्ट मील शुगर 200 से ज्यादा है, तो यह सामान्य नहीं है। जिन लोगों को पहले से डायबिटीज है और पोस्ट मील शुगर ज्यादा है, तो इसके पीछे डाइट, दवा, डायबिटीज मैनेजमेंट से जुड़े कारक हो सकते हैं।
हाई पोस्ट मील शुगर से जुड़ी गलतियां
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1. रिफाइंड कार्ब्स का अधिक सेवन और शुगर स्पाइक
अगर आप भी व्हाइट ब्रेड, मैदा से बनी चीजें, मिठाई, मीठी ड्रिंक्स का अधिक सेवन करते हैं, तो पोस्ट मील शुगर तेजी से बढ़ सकती है। इन चीजों में रिफाइंड कार्ब्स मौजूद होती हैं जिसे बार-बार लेने से ब्लड शुगर लेवल और वजन दोनों ही बढ़ सकता है।
2. भोजन का समय और शुगर लेवल का संबंध
ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए समय पर भोजन करना जरूरी है खासकर अगर व्यक्ति को डायबिटीज है। लंबे समय तक भूखे रहने के बाद एक साथ ज्यादा भोजन करने से ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए संतुलित डाइट और समय पर भाेजन करना जरूरी है।
3. रोटी-चावल जैसे कॉम्बिनेशन का सेवन करना
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अगर आप भी ज्यादातर लोगों की तरह रोटी और चावल दोनों का सेवन एक ही थाली में करते हैं, तो आपको बता दें कि ऐसा करने से टोटल कार्ब्स की मात्रा बढ़ सकती है और इससे पोस्ट मील शुगर लेवल भी बढ़ने लगता है।
4. प्रोटीन और हेल्दी फैट्स की अनदेखी
सिर्फ कार्ब्स रिच फूड्स जैसे चावल या गेहूं की रोटी खाने के बजाय दाल, अंडे, पनीर, दही, नट्स या अन्य प्रोटीन स्रोत और हेल्दी फैट्स को डाइट में शामिल करने से भोजन ज्यादा संतुलित हो सकता है और शुगर स्पाइक से बचाव हो सकता है।
साल 2021 में Diabetes & Metabolic Syndrome: Clinical Research & Reviews में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, प्रोटीन और फैट लेने से पोस्ट मील ग्लूकोज प्रतिक्रिया पर पॉजिटिव प्रभाव देखा गया। प्रोटीन लेने से खाने के तुरंत बाद शुगर लेवल बढ़ने के बजाय करीब 3 से 4 घंटे बाद शुगर लेवल बढ़ा।
5. पोर्शन कंट्रोल पर गौर करें
अगर आप हेल्दी चीजों का सेवन कर रहे हैं, लेकिन अधिक मात्रा में ले रहे हैं, तो भी ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है इसलिए पोर्शन साइज पर गौर करना जरूरी है।
6. फाइबर की कमी और पाचन पर असर
शुगर स्पाइक से बचने के लिए साबुत अनाज, सब्जियां, फल जैसे फाइबर रिच फूड्स लें। ये फूड्स धीरे पचते हैं और इससे शुगर स्पाइक की संभावना भी घटती है जिससे पोस्ट मील शुगर लेवल बढ़ने की संभावना कम हो सकती है।
शुगर कंट्रोल के लिए डाइट में ये 5 बदलाव करें
- भाेजन में आलू जैसी स्टार्च युक्त सब्जियों के बजाय नॉन-स्टार्च वाली सब्जियों जैसे लौकी, तोरई, भिंडी, पालक, गोभी और खीरे की मात्रा बढ़ाएं।
- डीप फ्राई मेथड चुनने के बजाय भाेजन को एयर फ्राई या शैलो फ्राई प्रक्रिया से पकाएं।
- रिफाइंड चीनी के हेल्दी विकल्प जैसे गुड़ या शहद का सेवन करने से भी शुगर लेवल बढ़ सकता है इसलिए इनके सेवन से बचें।
- केवल जूस पीने के बजाय सेब, अमरूद, संतरा, नाशपाती जैसे फल खाएं क्योंकि फलों के रेशों से फाइबर भी मिलता है। केवल जूस के सेवन से शुगर लेवल बढ़ सकता है।
- नाश्ते में केवल कार्ब्स जैसे पोहा या कॉर्नफ्लैक्स खाने के बजाय प्रोटीन और फाइबर के स्रोत जैसे फल, अंडे, पनीर वगैरह को शामिल करें।
निष्कर्ष:
अगर पोस्ट मील शुगर लेवल 200 पार है, तो इस पर गौर करें। खासकर अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं। रिफाइंड कार्ब्स की मात्रा कम करें, रोटी और चावल को एक साथ खाने के बजाय मील में किसी एक अनाज को शामिल करें, सही समय पर भोजन करें, दो मील्स के बीच पर्याप्त गैप रखें वरना शुगर लेवल बढ़ सकता है। प्रोटीन और हेल्दी फैट्स जब डाइट में नहीं होंगे, तो शुगर स्पाइक की संभावना बढ़ सकती है इसलिए इन्हें डाइट का हिस्सा बनाएं। पोर्शन कंट्रोल पर गौर करें और फाइबर की कमी से भी बचना चाहिए। इस तरह हाई पोस्ट मील शुगर लेवल से बचा जा सकता है। भाेजन में स्टार्च के बजाय नॉन-स्टार्च सब्जियां जैसे लौकी, तोरई का सेवन करें, डीप फ्राई मेथड चुनने के बजाय शैलो फ्राई या एयर फ्राई चुनें, रिफाइंड चीनी के हेल्दी विकल्प के तौर पर गुड़ या शहद का सेवन न करें, जूस के बजाय फल खाएं, नाश्ते में कार्ब्स विकल्प जैसे पोहा या कॉर्नफ्लैक्स खाने के बजाय फाइबर स्रोत जैसे फल, प्रोटीन स्रोत जैसे अंडा या पनीर का सेवन करें।
image credit: magnific
FAQ
क्या पोस्ट मील शुगर ज्यादा होने का मतलब डायबिटीज है?
ऐसा जरूरी नहीं है। एक रीडिंग से डायबिटीज की पुष्टि नहीं होती। शक होने पर डॉक्टर फास्टिंग ग्लूकोज या HbA1c टेस्ट करने की सलाह दे सकते हैं।क्या सिर्फ मीठा खाने से पोस्ट मील शुगर बढ़ती है?
मीठा खाने से शुगर लेवल बढ़ता है और इसके अलावा चावल, रोटी, ब्रेड, आलू, कार्ब्स रिच फूड्स से भी शुगर लेवल बढ़ सकता है।
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Oct 05, 2026 13:47 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Neha Mohan Sinha
