Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vijay S Dahiphale , Consultant Urologist, Andrologist & Sexologist

उम्र बढ़ने के अलावा टेस्टोस्टेरोन कम होने के हो सकते हैं ये 5 कारण, न करें अनदेखी

Low Testosterone Causes: क्या आप जानते हैं कि सिर्फ बढ़ती उम्र ही टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम नहीं करती है? कई ऐसे बड़े कारण भी हैं, जो टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन को कम कर देते हैं। क्या आप उनके बारे में जानना चाहते हैं? तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

जैसा कि आप जानते ही होंगे कि टेस्टोस्टेरोन पुरुषों के लिए बहुत जरूरी हार्मोन है। इसे सेक्स हार्मोन भी कहा जाता है। आमतौर पर बढ़ती उम्र के साथ-साथ इसके स्तर में कमी आने लगती है, जो कि पूरी तरह नॉर्मल है। हालांकि, यह सवाल पुरुषों के मन में अक्सर उठता होगा कि बढ़ती उम्र के अलावा टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के स्तर में कमी आने के और क्या कारण हो सकते हैं? आइए, जानते हैं मेडिकवर अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट और सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. विजय दहिफले से।

1. बढ़ता मोटापा

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टेस्टोस्टेरोन पर सबसे बुरा प्रभाव मोटापे का पड़ता है। मोटापे के कारण हमारे शरीर में कई समस्याएं होने लगती हैं, जैसे डायबिटीज, थायराइड आदि। इस तरह की समस्याओं के कारण हार्मोनल परेशानियां भी होने लगती है, जिसकी वजह से टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के स्तर में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।

साल 2014 में Asian Journal Of Andrology में प्रकाशित एक साइंटिफिक रिव्यू के अनुसार पुरुषों में मोटापा और टेस्टोस्टेरोन का आपस में गहरा संबंध है। मोटापा शरीर में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को घटाता है और टेस्टोस्टेरोन कम होने से शरीर में चर्बी और ज्यादा जमने लगती है, जिससे यह एक हानिकारक चक्र बन जाता है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि मोटापे को संतुलित करके हार्मोनल बदलाव को कंट्रोल किया जा सकता है, जिससे टेस्टोस्टेरोन प्रोडक्शन में भी संतुलन देखने को मिलता है।

2. टाइप 2 डायबिटीज

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टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी के पीछे एक बड़ा कारण टाइप 2 डायबिटीज को भी माना जाता है। डॉक्टर की मानें, तो अगर समय रहते टाइप 2 डायबिटीज को कंट्रोल न किया जाए, तो हमारी रक्त वाहिकाएं डैमेज हो सकती हैं। इसका असर हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य पर पड़ता है।

साल 2011 में The Journal Of Clinical Endocrinology & Metabolism में प्रकाशित एक साइंटिफिक रिव्यू आर्टिकल इस बात का पता चलता है कि टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी होना, टाइप 2 डायबिटीज का एक संकेत है। इस शोध में आगे बताया गया है कि जब टाइप 2 डायबिटीज को मैनेज न किया जाए, तो इसकी वजह से एंडोक्राइन फंक्शन प्रभावित होने लगता है, जो कि पुरुषों के सेक्स हार्मोन पर भी असर डालता है।

3. अंडकोश से जुड़ी समस्या

कहने की जरूरत नहीं है कि अगर पुरुषों में अंडकोश यानी टेस्टिकल्स में किसी तरह की समस्या आती है, तो टेस्टोस्टेरोन का स्तर अपने आप प्रभावित होने लगता है। विशेषज्ञ की मानें, तो टेस्टोस्टेरोन मुख्य रूप से टेस्टिकल्स से ही रिलीज होते हैं। यही कारण है कि टेस्टिकल्स में किसी भी तरह की समस्या के कारण टेस्टोस्टेरोन प्रभावित हो जाते हैं।

साल 2020 में Trends in Urology & Men's Health नाम की एक मेडिकल पत्रिका में प्रकाशित रिव्यू में भी बताया गया है कि टेस्टिकुलर कैंसर जैसी बीमारी भी टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम कर सकती है, जिससे मेटाबोलिक सिंड्रोम यानी मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि कैंसर का पूरा इलाज होने के बावजूद मरीज की बार-बार जांच की जाती है।

4. पुरानी और गंभीर बीमारियां

डॉ. विजय दहिफले बताते हैं कि लंबी चलने वाली बीमारियां शरीर में टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन का स्तर कम कर देती हैं। सवाल है, ऐसा क्यों होता है? इस संबंध डॉ. विजय दहिफले स्पष्ट करते हैं, "पुरानी बीमारी के कारण शरीर में अंदरूनी सूजन आ जाती है, जिससे दिमाग के सिग्नल्स में रुकावट पैदा होने लगती है। इसका मतलब है कि हार्मोन प्रोडक्शन के लिए दिमाग से टेस्टिकल्स को जो सिग्नल मिलने चाहिए, वे सही तरह से नहीं मिल पाते हैं यानी सिग्नल्स के रास्ते में रुकावट पैदा हो जाती है। ऐसे में टेस्टोस्टेरोन के स्तर में गिरावट आने लगती है।"

डॉ. विजय दहिफले आगे बताते हैं, "कई बार पुरानी बीमारियों के कारण मरीज लंबे-लंबे समय तक दवाइयां लेते हैं। इसमें कई तरह की दवाइयां शामिल होती हैं, जैसे दर्द निवारक या स्टेरॉइड आदि। इनकी वजह से शरीर में हार्मोन बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इसका प्रभाव टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन में भी दिखता है।"

5. जेनेटिक सिंड्रोम

जेनेटिक सिंड्रोम भी टेस्टोस्टेरोन के प्रोडक्शन में कमी का एक बड़ा कारण माना जाता है। दरअसल, जेनेटिकल बीमारियां भी शरीर में हार्मोनल सिग्नल के रास्ते में रुकावट पैदा करती हैं और अंडकोष की टेस्टोस्टेरोन बनाने वाली कोशिकाओं को सीधे नुकसान पहुंचाती है, जिससे इस हार्मोन के स्तर में कमी आने लगती है।

इस तथ्य को European Urology Open Science में प्रकाशित एक रिसर्च से और भी विस्तार से समझाया गया है। साल 2021 में प्रकाशित इस रिसर्च में शोधकर्ताओं ने बताया है कि डीएनए में 100 से भी अधिक ऐसे नए जेनेटिक मार्करों की पहचान की है, जो यह तय करने में मदद करते हैं कि किसी पुरुष में उम्र बढ़ने के साथ टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होगा या नहीं। इसका सीधा मतलब यह है कि कम टेस्टोस्टेरोन की समस्या के पीछे इंसान के जींस भी जिम्मेदार होते हैं।

टेस्टोस्टेरोन के स्तर को संतुलित कैसे करें?

अगर आपकी उम्र अधिक नहीं है, तो टेस्टोस्टेरोन के स्तर को मैनेज किया जाना मुश्किल नहीं है। डॉ. विजय दहिफले कुछ टिप्स दे रहे हैं, आप उन्हें जरूर फॉलो करें-

  • नियमित रूप से वजन को कंट्रोल में रखें।
  • शारीरिक रूप से सक्रिय रहें यानी रेगुलर एक्सरसाइज करें।
  • ज्यादा तनाव लेने से बचें। इसके लिए योग या मेडिटेशन करें।
  • संतुलित आहार का भी टेस्टोस्टेरोन के स्तर पर अहम असर पड़ता है।
  • टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के लिए डाइट में विटामिन डी, जिंक और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व शामिल करें।
  • शराब का सेवन बिल्कुल न करें और स्मोकिंग से भी बचें।

निष्कर्ष

इसमें कोई दो राय नहीं है कि बढ़ती उम्र के साथ टेस्टोस्टेरोन के स्तर में गिरावट आ जाती है। यह प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसे रोका नहीं जा सकता है। हालांकि, कई बार सिर्फ बढ़ती उम्र की वजह से टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी नहीं आती है। कई ऐसे कारक होते हैं, जो कि सीधे-सीधे टेस्टोस्टेरोन प्रोडक्शन को प्रभावित करते हैं। इसमें मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और हार्मोनल असंतुलन आदि शामिल हैं। बेहतर होगा कि टेस्टोस्टेरोन कम होने के पीछे इसके कारकों पर गौर करें और जरूरी हो, तो डॉक्टर के पास जाने में देरी न करें।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होने पर पुरुष के शरीर में कौन से लक्षण नजर आते हैं?

    अत्यधिक थकान महसूस होना, मांसपेशियों का कमजोर होना, हड्डियों में कमजोरी, मूड में बदलाव या चिड़चिड़ापन, बालों का झड़ना और सेक्स ड्राइव में भारी कमी जैसे मुख्य लक्षण दिखाई देते हैं।
  • क्या नींद की कमी भी टेस्टोस्टेरोन के स्तर को प्रभावित कर सकती है?

    हां, नींद की कमी का टेस्टोस्टेरोन पर गहरा असर पड़ता है। ध्यान रखें कि टेस्टोस्टेरोन का प्रोडक्शन गहरी नींद के दौरान होता है। अगर पुरुष रोजाना 5 घंटे से कम सोता है, तो उसके टेस्टोस्टेरोन के स्तर में भारी गिरावट आ सकती है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jul 27, 2026 18:35 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Vijay S Dahiphale

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