Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Karuna Malhotra , Cosmetologist, Skin specialist & Homoeopath Physician

क्या पेट की सेहत का हो सकता है स्किन पर असर? जानें डॉक्टर की राय

क्या आप उन लोगों में से हैं, जिनकी त्वचा पर अक्सर दाने या दाग-धब्बे हो जाते हैं? अगर हां, तो जरा एक बार अपनी पेट की सेहत पर नजर दौड़ाएं। कई बार आपकी आंतों से जुड़ी समस्या त्वचा को प्रभावित कर सकती है। कैसे? जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।

आमतौर पर स्किन में किसी भी तरह की समस्या होने पर हम उसे हार्मोनल असंतुलन से जोड़कर देखते हैं या माना जाता है कि स्किन की सही देखभाल नहीं की गई है। इसी वजह से त्वचा में कील-मुंहासे या अन्य समस्याएं हो जाती हैं। हालांकि, कुछ लोगों का यह भी मानना है कि पेट की सेहत भी स्किन पर असर डाल सकती है। सवाल है, क्या यह वाकई सच है? आइए, जानते हैं राजौरी गार्डन स्थित कॉस्मेटिक स्किन क्लिनिक की कॉस्मेटोलॉजिस्ट और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. करुणा मल्होत्रा की राय।

क्या पेट की सेहत स्किन पर असर डालती है?

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साल 2025 में International Journal of Molecular Medicine में प्रकाशित एक साइंटिफिक रिव्यू रिसर्च पेपर के अनुसार, यह पूरी तरह सच है कि पेट से जुड़ी तमाम समस्याओं का त्वचा पर असर पड़ता है। इस बात को जरा भी नकारा नहीं जा सकता है। असल बात यह है कि पेट साफ है या नहीं, इससे स्किन सीधे तौर पर कनेक्टेड होती है। इसे चिकित्सकीय भाषा में गट-स्किन एक्सिस कहा जाता है। अगर डाइजेस्टिव ट्रैक में बैक्टीरिया असंतुलित हो जाते हैं, तो इसकी वजह से सोरायसिस, एटोपिक डर्मेटाइटिस/एक्जिमा और मुंहासे जैसी बीमारियां बढ़ जाती हैं। इसे आप सरल भाषा में समझें कि अगर पेट खराब है, तो त्वचा से जुड़ी समस्याएं भी होने लगती हैं।

आंत त्वचा को कैसे प्रभावित करती है?

यह स्पष्ट है कि आंत या कहें पेट का हमारी त्वचा पर सीधा असर पड़ता है। यहां यह जान लेना जरूरी है कि आखिर इसका आपस में क्या कनेक्शन है और आंत त्वचा को कैसे प्रभावित करती है। इस बारे में डॉ. करुणा मल्होत्रा बताती हैं-

1. रोग-प्रतिरोधक क्षमता का संतुलन

जब हम अच्छा खाते-पीते है, तो इसी वजह से हमारी इम्यूनिटी यानी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है। असल में हमारी पेट में ऐसे सेल्स होते हैं, जो कि इम्यूनिटी को बूस्ट करते हैं। अगर किसी वजह से पेट के अच्छे तथा बुरे बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाता है, तो ऐसे में हमारी प्रतिरोधक प्रणाली बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाती है। ऐसे में त्वचा पर सूजन, रेडनेस और दाने आदि हो जाते हैं।

2. शरीर में सूजन का बढ़ना

पेट साफ न हो आंतों में बैक्टीरिया का असंतुलन हो जाए, तो पूरे शरीर पर इसका असर पड़ता है। आंतों की सेहत खराब होने से उनकी अंदरूनी परत कमजोर पड़ जाती है। ऐसे में पेट के जहरीले टॉक्सिन्स खून में घुलने लगते हैं, जिससे स्किन सेल्स को नुकसान पहुंचाता है।

3. पोषक तत्वों का अवशोषण

आप जो भी खाते हैं, वह पेट में जाता है। जब आप डाइट में जरूरी विटामिनों और मिनरल्स (जैसे जिंक, विटामिन ए और डी) लेते हैं, तो बॉडी उन्हें एब्जॉर्ब कर लेती है। इससे त्वचा नियमित रूप से रिपेयर होती है, सीबम प्रोडक्शन संतुलित रहता है और समय-समय पर नई त्वचा भी बनती रहती है।

पेट खराब होने पर त्वचा पर होने वाली समस्याएं

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पेट खराब हो या आंत से जुड़ी समस्या हो, तो त्वचा पर इसके असर नजर आते हैं यानी त्वचा संबंधी कई समस्याएं होने लगती हैं, जैसे-

  • एक्नेः आंत में आई सूजन और माइक्रोबायल इंबैलेंस के कारण हार्मोनल असंतुलन भी पैदा हो जाता है। ऐसे में सीबम प्रोडक्शन प्रभावित होता है और त्वचा पर दाने आदि निकल आते हैं।
  • एक्जिमाः हालांकि, एक्जिमा का सीधा-सीधा कनेक्शन पेट की सेहत से नहीं है, लेकिन DermNet की मानें, तो आंत में माइक्रोबायोम का असंतुलन बढ़ने के कारण त्वचा की सुरक्षा परत कमजोर हो सकती है। ऐसे में खुजली, सूजन और रैशेज जैसी समस्याएं हो जाती हैं, जो कि एक्टोपिक डर्माटाइटिस यानी एक्जिमा होने का कारण बन सकती हैं।
  • रोजेशियाः साल 2021 में Advances In Therapy नाम के जर्नल में प्रकाशित रिसर्च पेपर के अनुसार पेट से जुड़ी कई समस्याओं का सीधा संबंध रोजेशिया से है। असल बात यह है कि रोजेशिया सिर्फ स्किन से जुड़ी प्रॉब्लम नहीं है। IBD, IBS जैसी कई समस्याओं के कारण आंत में सूजन आ जाती है, जो कि रोजेशिया को ट्रिगर कर सकती है।
  • सोरायसिसः साल 2024 में नेचर के प्रसिद्ध जर्नल Scientific Reports में प्रकाशित रिसर्च पेपर से यह बात साबित होती है कि आंत में पाए जाने वाले कुछ खास तरह के बैक्टीरिया सोरायसिस होने के खतरे को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं।
    दरअसल, बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ने के कारण इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है और शरीर में सूजन को बढ़ा देती है। ऐसे में सोरायसिस की बीमारी होने या इसके लक्षण बिगड़ने का जोखिम बढ़ जाता है।
  • डर्मेटाइटिस हर्पेटिफॉर्मिसः अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) से जुड़े संस्थान NIDDK (National Institute Of Diabetes And Digestive And Kidney Diseases) में प्रकाशित एक रिपोर्ट की मानें, तो डर्मेटाइटिस हर्पेटिफॉर्मिस एक गंभीर त्वचा की बीमारी है, जिसमें अत्यधिक खुजली और फफोले होने लगते हैं।
    यह असल में सीलिएक बीमारी का ही एक रूप है, जिसका प्रभाव पेट के बजाय त्वचा पर दिखाई देता है। जब मरीज गेहूं, जौ या राई में पाया जाने वाला ग्लूटेन प्रोटीन का सेवन करता है, तो शरीर का इम्यून सिस्टम त्वचा में एंटीबॉडीज स्टोर करने लगता है, जिससे कोहनी, घुटने, पीठ और नितंब पर तेज खुजली और दाने निकल आते हैं।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर कहने का मतलब यह है कि पेट और त्वचा का आपस में गहरा संबंध है। इसे इग्नोर नहीं किया जा सकता है। हैरानी की बात यह है कि कई गलत चीजें खाने से गंभीर समस्या भी हो सकती है। जैसे किसी को प्रोटीन से एलर्जी है, तो त्वचा में खुजली और दाने निकल आ सकते हैं। बेहतर होगा कि उन खाने की चीजों से दूर रहें, जिनसे आपको एलर्जी है। इसके अलावा, सीबम प्रोडक्शन बढ़ाने वाली चीजों का सेवन भी न करें। हां, अगर त्वचा से जुड़ी कोई समस्या हो जाए, तो तुरंत डाइट में बदलाव करने से पहले एक्सपर्ट की सलाह लेना न भूलें।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • क्या अत्यधिक तनाव भी हमारी त्वचा को प्रभावित कर सकता है?

    हां, तनाव की वजह से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो आंतों के बैक्टीरिया के संतुलन को बिगाड़ देता है और पाचन प्रक्रिया धीमी कर देता है। ऐसे में त्वचा पर दाने या एक्जिमा के लक्षण बढ़ जाते हैं।
  • क्या एंटीबायोटिक दवाओं का अधिक सेवन करने से भी चेहरे पर पिंपल्स हो सकते हैं?

    बार-बार एंटीबायोटिक्स लेने से आंतों के हानिकारक बैक्टीरिया के सह गुड बैक्टीरिया भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे आंत का माइक्रोबायोम असंतुलित हो जाता है। ऐसे में त्वचा पर मुंहासे का रिस्क बढ़ जाता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jul 28, 2026 10:55 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Jul 28, 2026 10:55 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Karuna Malhotra

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