गेहूं से है एलर्जी तो खाएं इन 4 आटों की रोटियां, सेहत को भी मिलेंगे कई जबरदस्त फायदे

कुछ लोगों को गेंहू के आटे से बनी रोटियों को न खाने की सलाह दी जाती है। ऐसे में अन्य अनाज के आटो को डाइट में शामिल किया जा सकता है।  

 
Vikas Arya
Written by: Vikas AryaUpdated at: Jan 25, 2023 20:24 IST
गेहूं से है एलर्जी तो खाएं इन 4 आटों की रोटियां, सेहत को भी मिलेंगे कई जबरदस्त फायदे

गेंहू की रोटियां हमारी आहार का एक मुख्य हिस्सा होती है। इसके बिना हम अपनी कंप्लीट डाइट की कल्पना भी नहीं करते हैं। जबकि कुछ लोगों को गेंहू की रोटियों से एलर्जी होती है। वहींं डॉक्टर भी कई बीमारियों में रोगी को गेंहू की रोटी को कम खाने की सलाह देते हैं। साथ ही उन्हें गेंहू की रोटी के स्थान पर अन्य अनाज की रोटियों को खाने की सलाह दी जाती है,लेकिन कई बार लोगों को गेंहू की रोटियों का विकल्प नहीं मिल पाता है। ऐसे में आज हम आपको इस लेख में ऐसे कुछ आनाज बताने जा रहे हैं जिनके आटे की रोटियों को खाने से आप रोग मुक्त और स्वस्थ बने रहेंगे। आगे जानते हैं इनके बारे में।  

गेंहू के आटे से एलर्जी क्यों होती है 

गेंहू में मौजूद ग्लोबुलिन,ग्लिएडिन,एल्बुमिन व प्रोटीन की वजह से कुछ लोगों को एलर्जी की समस्या हो जाती है। सिलिएक रोग में गेंहू में मौजूद ग्लूटेन के कारण व्यक्ति को एलर्जी हो जाती है। इसके अलावा कई रोगों में डॉक्टर व्यक्ति को गेंहू की रोटियों की जगह पर अन्य अनाज की रोटियों का खाने की सलाह देते हैं।  

गेंहू के अलावा किस अनाज की रोटियों का करें सेवन  

इस लेख में हम आपको गेंहू के वैकल्पिक अनाज के आटो के विषय में आगे विस्तार से बता रहे हैं। जानते हैं इन अनाज के विषय में 

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मकई का आटा  

मकई का आटा भारत में गेंहू के आटे के बाद सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है। यह आटा कई अलग-अलग रूपों में पाया जा सकता है। पंजाब आदि कुछ प्रांतों में इसका उपयोग किया जाता है। मक्के के आटे में विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन के, बीटा-कैरोटीन व सेलेनियम पाया जाता है। इस आटे में आयरन की भी मात्रा भरपूर होती है। ये एनीमिया को कम करने में मददगार होता है।  

ज्वार का आटा  

शरीर की गर्माहट को बनाए रखने के लिए ज्वार का आटा खाया जाता है। ज्वार के आटे में ग्लूटेन नहीं होता होता है। ज्वार से आप घर में डोसा या रोटी बना सकते हैं। इससे व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। इस आटे में पोटैशियम, कैल्शियम और आयरन पाया जाता है।  

रागी का आटा  

रागी का आटा देश के कई राज्यों में इस्तेमाल किया जाता है। उत्तर भारत में तो ये आसानी से उपलब्ध होता है। उत्तराखंड में इसे मंडुआ के नाम से पहचाना जाता है। रागी में प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर, व आयरन की मात्रा पाई जाती है। डायबिटीज के रोगियों के लिए ये एक बेहतर आटा होता है।  

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कुट्टू का आटा 

कुट्टू के आटे का  सेवन मुख्यतः व्रत में किया जाता है। नवरात्रों में इसका सेवन कई घरों में किया जाता है। इस आटे में विटामिन बी 2, नियासिन, राइबोफ्लेबिन और बी कॉम्प्लेक्स पाया जाता है। इसमें फैट, कार्ब्स, प्रोटीन, फॉस्फोरस, व आयरन भी होता है। इस आटे से रक्त संचार बेहतर बनता है।  

 

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