स्तन कैंसर से जुड़े जीन का पता चला

By  ,  दैनिक जागरण
Oct 31, 2011

breats cancerअब स्तन कैंसर के लिए जिम्मेदार जीन चिकित्सकों की नजरों से बच नहीं पाएंगे क्योंकि विज्ञानियों ने एक उच्च कोटि की तकनीक विकसित की है, जो ऐसे जीनों की सटीक जानकारी दे देगी। साथ ही वैज्ञानिकों ने स्तन कैंसर का खतरा बढ़ाने वाले चार नए जीनों का पता लगाने का दावा किया है।

 

नेचर पत्रिका में छपे एक शोध के मुताबिक इस तकनीक के जरिये कुछ ही माह में स्तन कैंसर के लिए दोषी सभी जीनों का पता लग जाएगा। इस शोध में लगे अमेरिका के नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के दल की अगुवाई कर रहे डेविड हंटर ने कहा कि स्तन कैंसर रोगी के खून की जांच से जीन का पता लगाया जाएगा। यह तकनीक स्तन कैंसर के खतरे के बारे में भी बताने में सक्षम है। इस तकनीक का इस्तेमाल हम अन्य बीमारियों के लिए जिम्मेदार जीनों को खोजने में भी करेंगे। हंटर ने कहा कि हमें चार नए जीनों का पता भी लगा है। इसमें से एक का नाम एफजीएफआर-2 है।

 

जिन लोगों में इस जीन की एक कापी पाई गई, उन्हें स्तन कैंसर होने का खतरा 20 फीसदी अधिक मिला। वहीं जिनके शरीर में इसकी दो कापी मिली, उनमें स्तन कैंसर का खतरा 60 फीसदी अधिक पाया गया। इसके अलावा टीएनआरसी-9, एमएपी-3के-1 और एलएसपी-1 जीन का पता लगा है, जो स्तन कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं।

 

शोधार्थियों को करीब 50 हजार महिलाओं की डीएनए जांच के बाद इन जीनों की खबर लगी। इनमें से आधी महिलाएं स्तन कैंसर से पीडि़त थीं। शोधार्थियों को उम्मीद है कि नई तकनीक जल्द ही और जीनों का सुराग देगी, जो

 

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