Flat Foot: फ्लैट फुट (सपाट तलवे) को न करें नजरअंदाज, कुछ बीमारियों का भी हो सकता है संकेत

अगर किसी व्यक्ति के तलवे जमीन से पूरी तरह छू जाते हैं यानी सपाट हो गए हैं, तो ये किसी बीमारी का भी संकेत हो सकता है, इसलिए इसे नजरअंदाज न करें।

Kunal Mishra
Written by: Kunal MishraPublished at: Apr 04, 2021Updated at: Apr 04, 2021
Flat Foot: फ्लैट फुट (सपाट तलवे) को न करें नजरअंदाज, कुछ बीमारियों का भी हो सकता है संकेत

पैरों के आकार में भी कई बार बदलाव देखे जाते हैं। कई बार किन्हीं कारणों से पैरों में कुछ असमान्यताएं रहती हैं। इन्हीं में से एक है फ्लैट फुट। पैरों के तलवों (Soles of Feet) में बनने वाली आर्च अगर आपके शरीर में मौजूद नहीं है तो इससे फ्लैट फुट (Flat Feet) कहा जाता है। फ्लैट फुट पैरों के तलवों में आर्च (Arch) का काम होना या ना होना होता है। यह कोई गंभीर समस्या नहीं है बल्कि आम समस्या है, जो कुछ लोगों में पाई जाती है। लेकिन अगर इसका इलाज सही समय पर न करवाया जाए तो आगे जाके इससे कई दिक्कतें हो सकती है। पैरों में दर्द के साथ-साथ सूजन की भी शिकायत हो सकती है। फ्लैट फुट में पैरों के तलवे पूरी तरह से सपाट होते है। उनमें बिलकुल भी जगह नहीं होती है। तलवों में कोई आर्च नहीं होती। तलवे ज़मीन को पूरी तरह से छूते हैं। वहीं आम पैरों के तलवों में आर्च मौजूद होती हैं। एड़ी और उंगलियों के बीच खाली स्थान होता है जिससे आर्च कहते हैं। फ्लैट फुट अक्सर बच्चो में पाया जाता है।

नवजात शिशु (New Born Baby) पैदा ही फ्लैट फीट के साथ होते हैं। लेकिन समय के साथ-साथ करीबन दो या तीन साल के अंतराल में उनके पैरों का विकास होने लगता है और तलवों में आर्च आने लगती है। बच्चों में फ्लैट फुट दो तरह से पाए जाते है। पहला, जब बच्चा बैठा हो तो तलवों में आर्च दिखाई देती है, लेकिन जैसे ही बचा खड़ा होता है या चलने लगता है तो पैर एकदम सपाट हो जाते हैं और आर्च गायब हो जाती है। दूसरा, जब बच्चा बैठा हो तब आर्च ना दिखाई देना और खड़े होने पर या चलने पर भी पैरों का सपाट रहना। पहली स्थिति में इलाज करना आसन होता है या यूं कहे कि पहली स्थिति बहुत आम है और इसेमें बच्चे का विकास खुद ही हो जाता है। लेकिन दूसरी स्थिति में उपचार करना थोड़ा मुश्किल होता है। इसलिए कहा जाता है कि फ्लैट फुट को नज़र अंदाज़ करना एक भूल है। इस भूल से बचें।

फ्लैट फुट केवल बच्चों में ही नहीं बल्कि बड़ों में भी यह स्थिति देखी जाती है। ज़्यादा शारीरिक गतिविधियां कर लेने से होने वाली इंजरी से भी फ्लैट फुट की समस्या आ सकती है। कई बार यह बीमारी जेनेटिक्स डिसऑर्डर की वजह से भी होती है। प्रेगनेंट महिलाओं में फ्लैट फुट की समस्या की आशंका ज़्यादा रहती है। इस समस्या में कहीं दर्द तो नहीं होता, लेकिन अगर ज़्यादा समय तक इससे नजरअंदाज किया जाए तो आगे चलकर टखनों में सूजन, घुटनें, कमर, पैरों और तलवों के दर्द की शिकायत हो सकती है। साथ ही इससे तनाव भी बढ़ता है। जिन लोगो को फ्लैट फीट की समस्या होती है उन्हें सेना या मिलिट्री में दाखिल नहीं किया जाता है। इसलिए वक्त रहने पर ही इसका इलाज करा लेना चाहिए। फ्लैट फुट का इलाज घर में रहकर ही काफी आसानी से किया जा सकता है।

आइए जानते है फ्लैट फुट के कारण

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मधुमेह (Diabities)

मधुमेह यानी डायबिटीज़ भी फ्लैट फुट का एक प्रमुख कारण है। डायबिटीज़ का असर सीधा नर्वस सिस्टम पर पड़ता है जिसका दुष्परिणाम सबसे ज़्यादा पैरों को भुगतना पड़ता है। इसलिए डायबिटीज के रोगियों में फ्लैट फीट होने की संभावनाएं अधिक रहती हैं।

जेनेटिक कारक (Genetic Factors)

फ्लैट फुट की समस्या माता-पिता से बच्चों में भी स्थानांतरित होता है। जींस के द्वारा बच्चों में भी यह बीमारी हो सकती है। अगर किसी खानदान में फ्लैट फुट की समस्या हमेशा से चली आ रही है तो आगे की पीढ़ी में भी फ्लैट फुट की शिकायत होना स्वाभाविक है। ऐसी स्थिति में इसकी आशंकाएं बढ़ जाती हैं। 

इंजरी (Injury)

पैरों में लगी किसी चोट के कारण भी तलवों में आर्च की शिकायत हो सकती है। ज़्यादा अधिक व्यायाम, दौड़ने या खेलने कूदने से होने वाली इंजरी से भी फ्लैट फुट की परेशानी झेलनी पड़ सकती है। इसलिए ध्यान रहे कि खेलते या व्यायाम करते समय भी इंजरी नहीं होने का ध्यान रखें। 

ऑस्टियोअर्थराइटिस (Osteoarthritis)

ऑस्टियोअर्थराइटिस जोड़ो में दर्द पैदा करने वाली बीमारी है। यह अर्थराइटिस का ही प्रकार है। इसके कारण पैरों के लिगामेंट्स में असामान्यता बढ़ने लगती है और स्थिरता में ढीलापन आने लगता है। परिणाम स्वरूप फ्लैट फुट भुगतना पड़ सकता है।

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मोटापा (Fat)

मोटापा होने से भी पैर सपाट हो सकते है। शरीर का सारा वज़न हमारे तलवों पर होता है। ऐसे में तलवों के लिए भारी शरीर का बोझ उठाना मुश्किल हो जाता है और कई समस्याओं को जन्म देता है। उन्हीं में से एक है फ्लैट फुट। वज़न ज़्यादा होने के कारण पैरों पर दबाव पड़ता है और तलवे धीरे-धीरे सपाट होने लगते है। 

तन्त्रिका तन्त्र और अन्य मांसपेशियों का रोग (Muscular Diseases)

तन्त्रिका तंत्र यानी नर्वस सिसटम (Nervous System) में होने वाली गड़बड़ी के कारण भी फ्लैट फुट हो सकता है। नर्वस सिस्टम और साथ ही मांसपेशियों के रोग जैसे कि प्रमस्तिष्क घात, स्पाइना बिफ़िडा आदि का सीधा असर शरीर के विकास पर पड़ता है। ऐसे में विकास में रुकावट आने से तलवों पर आर्च का आना रुक सकता है।

कैसे पहचानें फ्लैट फुट के लक्षण (Symptoms of Flat Feet)

  • तलवों में दर्द (Pain in Soles)
  • हिप, कमर और पैरों में दर्द (Pain in Hip Waist and feet)
  • टखनों में सूजन (Swelling In Ankles)
  • आर्च का कम हो जाना (Weak Arch)

फ्लैट फुट के उपचार (Treatment of Flat Feet)

फ्लैट फुट रिकंस्ट्रक्शन (Flat Feet Reconstruction) 

फ्लैट फुट को सही करने का एक उपाय है फ्लैट फुट रिकंस्ट्रक्शन। यह एक प्रकार की सर्जरी है, जो तलवों को एक नया आकार देती है। इस सर्जरी से फ्लैट फुट का परमानेंट इलाज हो जाता है। लेकिन इसके दुष्परिणामों में खून का थक्का जमने के साथ ही नर्व भी खराब होने की संभावना रहती है। 

योगभ्यास (Yoga)

फ्लैट फुट को आप घर पर योगा करने से भी ठीक कर सकते हैं। योगासन जैसे कि वीरासन, त्रिकोणासन आदि समेत बहुत से ऐसे य़ोगासन हैं, जिनका नियमित रूप से अभ्यास करकर आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। 

फीजियो थेरेपी (Physical therapy)

शरीर के तमाम विकारों को ठीक करने के लिए फीजियो थेरेपी एक कामगर विकल्प है। इस चिकित्सा के जरिए भी आप अपने तलवों में आर्च का निर्माण कर सकते हैं। डॉक्टर द्वारा बताई गई कुछ एक्सरसाइज और फिजियो थेरेपी से आप फ्लैट फुट की समस्या को जड़ से ठीक कर सकते है।

स्ट्रेचिंग और दवाई (Stretching and Medicine)

आप फ्लैट फुट को ठीक करने के लिए स्ट्रेचिंग व्यायाम ज़रूर करें। साथ ही डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाइयों और इंजेक्शन का भी सहारा ले सकते हैं। इस समस्या में स्ट्रेचिंग आपके लिए बहुत लाभदायक साबित हो सकती है, क्योंकि इससे तलवों के लिगामेंट्स पर ज़ोर और खींचाव बनता है।

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वज़न घटना (Weight Loss)

फ्लैट फुट को बढ़ावा देने में मोटापे का बहुत योगदान रहता है। ऐसे में आपको अपने शरीर का पूरा ध्यान रखना चाहिए और तलवों पर ज़ोर ना पड़े इसलिए वज़न को नियंत्रित करना चाहिए। वजन नियंत्रित करने से पैर के तलवों पर पड़ा भार कम होने से पैर को राहत मिलती है।

डायबिटीज को कंट्रोल करें (Control Diabetes)

बीमारी ठीक करने के लिए सबसे जरूरी है उसके कारण को समझना और उन्हें रोकना। ऐसे में आपको देखना होगा कि क्या डायबिटीज़ आपके फ्लैट फुट का कारण है। अगर है तो आपको सबसे पहले अपनी डायबिटीज़ को नियंत्रित करना होगा। ऐसा करने से आपको अपने फ्लैट फुट के उपचार में बहुत मदद मिलेगी।

पैरों के तलवों में आर्च बनाना कोई बहुत मुश्किल कार्य नहीं है। इस लेख में दिए गए उपचारों को अपनाकर और उनका नियमित अभ्यास करकर अपने पैरों के तलवों में आर्च बना सकते हैं। 

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