गर्भाशय, ब्लैडर जैसे अंगों की जांच के लिए किया जाता है 'सोनोहिस्टेरोग्राम टेस्ट', जानें इसके बारे में

प्रेगनेंसी या आईवीएफ के समय महिलाओं के गर्भाशय, ब्लैडर और पेल्विक अंगों की जांच के लिए सोनोहिस्टेरोग्राम टेस्ट किया जाता है। जानें क्या है ये टेस्ट।

Monika Agarwal
Written by: Monika AgarwalUpdated at: Aug 01, 2021 10:30 IST
गर्भाशय, ब्लैडर जैसे अंगों की जांच के लिए किया जाता है 'सोनोहिस्टेरोग्राम टेस्ट', जानें इसके बारे में

सोनोहिस्टेरोग्राम (Sonohysterogram) एक खास तरह का अल्ट्रासाउंड होता है। जो यूटरस और फैलोपियन ट्यूब को जांच कर यह बताता है कि आपके शरीर में कौन कौन सी इंट्रायूटरीन (गर्भ के अंदर) परेशानियां हैं। अगर आपकी डॉक्टर आपको यह टेस्ट करवाने को बोलती हैं तो इसका मतलब है वह आपके यूटरिन (Uterine) से जुड़ी कुछ समस्या जैसे असमान्य रूप से ब्लीडिंग होना, क्रैंपिग, इनफर्टिलिटी (Infertility) या पेल्विक पेन (Pelvic Pain) के बारे में जानना चाहती हैं। अगर आप आईवीएफ प्रक्रिया करवा रही हैं तो डॉक्टर एंब्रियो (Embryo) इंप्लांट (Implant) करने से पहले भी यह देखने के लिए कि इस प्रक्रिया में क्या क्या मुसीबत आती है, इस टेस्ट या अल्ट्रा साउंड को कराने को बोल सकती हैं। आइए इस टेस्ट के बारे में थोड़ा गहनता से जानते हैं।

sonohysterogram-inside1

क्या होता है सोनोहिस्टेरोग्राम -What Is Sonohysterogram

डॉक्टर रंजना बेकन, गायनोकोलॉजिस्ट, कोलंबिया एशिया अस्पताल बताती है कि यह एक प्रकार का नॉन इनवेसिव ट्रांस वेजिनल अल्ट्रा साउंड होता है, जो यूटरिन कैविटी के अंदर सलाइन यानी नमकीन पानी को इंट्रोड्यूस करता है। इस एग्जाम में किसी तरह की रेडिएशन का प्रयोग नहीं किया जाता है और यह पूरी तरह से दर्द रहित होता है। इसमें साउंड वेव का प्रयोग होता है जिसके द्वारा मॉनिटर पर आपके यूटरस की फोटो लाई जाती है। 

इस प्रक्रिया के दौरान एक स्किनी ट्यूब जिसे कैथेटर कहा जाता है, आपके सर्विक्स की ओपनिंग के अंदर डाल दी जाती है। फिर इस ट्यूब के माध्यम से एक सेलाइन सॉल्यूशन यूटरिन कैविटी तक पहुंचाया जाता है। यह सॉल्यूशन यूटरस को थोड़ा स्ट्रेच करता है ताकि यूटरस की वॉल्स थोड़ी एक दूसरे से अलग हो जाएं और इसके बाद यूटरस की स्थिति को जांच किया जाता है। उस ट्यूब के माध्यम से ही यह टेस्ट अल्ट्रा साउंड के रूप में यूटरस या फैलोपियन ट्यूब के डिफेक्ट के बारे में बताता है।

इसे भी पढ़ें : FSSAI ने बताया कैंटीन को कीड़ा मुक्त करने का 4D नियम, इन्हें अपनाकर आप भी किचन से भगा सकते हैं कीड़े-मकोड़े

इसके बाद आपकी वेजाइना में एक लंबी छड़ डाली जाती है । यह साउंड वेव को निकालती है। जो बाद में बाउंस बैक हो कर इको की तरह सुनाई देती हैं। यह छड़ साउंड वेव्स  की इको को रिकॉर्ड करता है और कंप्यूटर स्क्रीन पर भेजता है। जहां से यूट्रस के अंदर की इमेज कंप्यूटर पर दिखाई देती हैं। यह प्रेगनेंसी के दौरान किया जाता है। इसलिए आपके डॉक्टर सलाइन सॉल्यूशन के बिना भी इस टेस्ट को कर सकते हैं।

sonohysterogram-Social

सोनोहिस्टेरोग्राम के कुछ लाभ-Benefits Of Sonohysterogram

  • यह बहुत ही आसान और दर्द रहित प्रक्रिया होती है जो फाइब्रॉइड्स या कैंसर जैसी स्थिति को डिटेक्ट कर सकती है।
  • इसके दौरान बहुत कम असहजता महसूस करने को मिलती है और कुछ महिलाओं को तो वो भी नहीं होती है।
  • इसमें इंफेक्शन होने का कोई रिस्क जुड़ा नहीं होता है।
  • यह मॉनिटर पर फोटो लाने के लिए किसी तरह की रेडिएशन का नहीं बल्कि साउंड वेव्स का प्रयोग करता है।
  • यह बाकी टेस्टों के मुकाबले बहुत कम महंगा है।
  • यह आपके यूटरस की बहुत साफ और अच्छी इमेज देता है।

सोनोहिस्टेरोग्राम के नुकसान (Side Effects)

इस टेस्ट से कभी-कभी कुछ महिलाओं में योनि से ब्लड या स्पॉटिंग या हल्का दर्द हो सकता है। लेकिन घबराने की बात नहीं यह एक या दो दिनों में ठीक हो जाता है। यह प्रोसेस बहुत सिंपल है और इसके दौरान आपको किसी तरह के रिस्क भी उठाने नहीं पड़ते । जब यह किया जाता है तो बस मामूली सी बेचैनी हो सकती है। 

हालांकि इससे आपको इंफेक्शन होने का खतरा भी नहीं होता है, जोकि एक बहुत अच्छी बात है। इसकी कीमत भी 35 हजार से लेकर 50 हजार के बीच की ही होती है। जो बाकी के महंगे टेस्टों के मुकाबले बहुत कम है। इसलिए अगर आपका डॉक्टर यह टेस्ट करवाने के लिए बोलता है तो बिलकुल भी घबराएं न और इसे करवा लें।

Read more articles on Miscellaneous in Hindi

Disclaimer