कितने तरह के होते हैं दमा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 29, 2017
Quick Bites

  • दमा का सबसे ज्यादा प्रभाव या दबाव फेफड़ों पर पड़ता है।
  • बच्चों और बड़ों में होने वाले दमा में काफी अंतर होता है।
  • दमा के प्रकारों और उनके बचाव के बारे में जानना जरूरी है।
  • दमा के इलाज के लिए इनहेलर है जिसका अपना दुष्‍प्रभाव भी है।

दमा फेफड़ों को खासा प्रभावित करता है। दमा के कारण व्यक्ति को श्वसन संबंधी कई बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। दमा सिर्फ युवाओं और व्यस्कों को ही नहीं बल्कि बच्चों को भी अपनी चपेट में ले लेता है। हालांकि अस्‍थमा के इलाज के लिए इनहेलर दिया जाता है लेकिन इनहेलर के दुष्‍प्रभाव भी होते हैं। इन सबके अलावा सवाल ये उठता है कि क्या दमा के प्रकार अलग-अलग होते हैं। बच्चों और बड़ों में होने वाला अस्थमा एक ही प्रकार का होता है। ये आपके लिए जानना बहुत जरूरी हैं। आइए जाने दमा के तमाम प्रकारों के बारे में।

Asthma

  • एलर्जिक अस्थमा – एलर्जिक अस्थमा के दौरान आपको किसी चीज से एलर्जी है जैसे धूल-मिट्टी के संपर्क में आते ही आपको दमा हो जाता है या फिर मौसम परिवर्तन के साथ ही आप दमा के शिकार हो जाते हैं।
  • नॉनएलर्जिक अस्थमा- इस तरह के अस्थमा का कारण किसी एक चीज का एक्सिक्ट्रीम पर जाने से ऐसा होता है। जब आप बहुत अधिक तनाव में हो  या बहुत तेज-तेज हंस रहे हो, आपको बहुत अधिक सर्दी लग गई हो या बहुत अधिक खांसी-जुकाम हो। 
  • मिक्सड अस्थमा- इस प्रकार का अस्थमा किन्हीं भी कारणों से हो सकता है। कई बार ये अस्थमा एलर्जिक कारणों से तो है तो कई बार नॉन एलर्जिक कारणों से। इतना ही नहीं इस प्रकार के अस्थमा के होने के कारणों को पता लगाना भी थोड़ा मुश्किल होता है।
  • एक्सरसाइज इनड्यूस अस्थमा- कई लोगों को एक्सरसाइज या फिर अधिक शारीरिक सक्रियता के कारण अस्थमा हो जाता है तो कई लोग जब अपनी क्षमता से अधिक काम करने लगते हैं तो वे अस्थमा के शिकार हो जाते हैं।
  • कफ वेरिएंट अस्थमा- कई बार अस्थमा का कारण कफ होता है। जब आपको लगातार कफ की शिकायत होती है या खांसी के दौरान अधिक कफ आता है तो आपको अस्थमा अटैक पड़ जाता है।
  • ऑक्यूपेशनल अस्थमा- ये अस्थमा अटैक अचानक काम के दौरान पड़ता है। नियमित रूप से लगातार आप एक ही तरह का काम करते हैं तो अकसर आपको इस दौरान अस्थमा अटैक पड़ने लगते हैं या फिर आपको अपने कार्यस्थल का वातावरण सूट नहीं करता जिससे आप अस्थमा के शिकार हो जाते हैं।
  • नॉक्टेर्नल यानी नाइटटाइम अस्थमा- ये अस्थमा का ऐसा प्रकार है जो रात के समय ही होता है यानी जब आपको अकसर रात के समय अस्थमा का अटैक पड़ने लगे तो आपको समझना चाहिए कि आप नॉक्टेर्नल अस्थमा के शिकार हैं।
  • मिमिक अस्थमा- जब आपको कोई स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी कोई बीमारी जैसे निमोनिया, कार्डियक जैसी बीमारियां होती हैं तो आपको मिमिक अस्थमा हो सकता है। आमतौर पर मिमिक अस्थमा तबियत अधिक खराब होने पर होता है।
  • चाइल्ड ऑनसेट अस्थमा- ये अस्थमा का वो प्रकार है जो सिर्फ बच्चों को ही होता है। अस्‍थमैटिक बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता जाता है तो बच्चा इस प्रकार के अस्थमा से अपने आप ही बाहर आने लगता है। ये बहुत रिस्की नहीं होता लेकिन इसका सही समय पर उपचार जरूरी है।
  • एडल्ट ऑनसेट अस्थमा- ये अस्थमा युवाओं को होता है। यानी अकसर 20 वर्ष की उम्र के बाद ही ये अस्थमा होता है। इस प्रकार के अस्थमा के पीछे कई एलर्जिक कारण छुपे होते हैं। हालांकि इसका मुख्य कारण प्रदूषण, प्लास्टिक, अधिक धूल मिट्टी और जानवरों के साथ रहने पर होता है।

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