इन 4 जानलेवा रोगों का कारण बनता है बढ़ता डायबिटीज

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 14, 2017
Quick Bites

  • यह एक लाइफस्टाइल से जुड़ी हुई बीमारी है।
  • शुगर के मरीजों में दांतों से जुड़ी बीमारी अधिक होती है।
  • डायबिटीज से इससे श्वेत रक्तकणों को नुकसान पहुंचता है।

डायबिटीज एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है, जो व्यक्ति के पूरे शरीर को प्रभावित करती है। इस रोग को अगर चलती फिरती मौत कहें तो कुछ गलत नहीं होगा। वैसे तो ये लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी है, लेकिन कई बार इसके होने का कारण आनुवंशिकता भी होता है। डायबिटीज होने पर व्यक्ति में कई रोग और होने का खतरा भी बढ़ जाता है। शुगर के मरीजों में दांतों से जुड़ी बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।

इसकी प्रमुख वजह यह है कि उनके खून में ग्लूकोज़ की मात्रा अनियंत्रित रहती है। इससे श्वेत रक्तकणों को नुकसान पहुंचता है, जो हमारे शरीर को बैक्टीरिया के संक्रमण से बचाते हैं। अगर ओरल हाइजीन का ध्यान न रखा जाए तो इससे इन्फेक्शन होना स्वाभाविक है। अगर किसी को पहले से डायबिटीज हो तो यह खतरा और बढ़ जाता है। अगर डायबिटीज एक सीमित स्तर से ज्यादा बढ़ जाता है तो कई अन्य रोगों के होने का भी खतरा रहता है। आइए जानते हैं क्या हैं वो रोग—

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मसूड़ों में सूजन

कुछ लोगों को अक्सर मसूड़ों में सूजन की समस्या होती है। अगर पहले से डायबिटीज न हो तो भी ऐसी स्थिति में एक बार शुगर लेवल की जांच करवा लेनी चाहिए, क्योंकि डायबिटीज की वजह से भी यह समस्या हो सकती है।

फंगल इन्फेक्शन

व्यक्ति के मुंह में कैडिला ऐलबिकंस नामक एक खमीर स्वाभाविक रूप से रहता है। मुंह में इसकी मात्रा सामान्य से अधिक बढ़ जाने पर फंगल इन्फेक्शन हो जाता है, जिसे ओरल थ्रस कहते हैं। मुंह के लार में मौजूद ज्य़ादा शुगर कई बार मुंह के सूखेपन का कारण बनता है। ऐसे में व्यक्ति को कुछ भी निगलने में समस्या होती है। इससे मुंह में सफेद या लाल रंग के चकत्ते भी हो सकते हैं।

जख्म भरने में देर

डायबिटीज के कारण शरीर में श्वेत रक्तकणों की संख्या कम हो जाती है और ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। इसी वजह हीलिंग की प्रक्रिया बहुत धीमी हो जाती है। इससे मुंह का घाव भरने में काफी समय लगता है और इन्फेक्शन के साथ व्यक्ति को दर्द भी हो सकता है।

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दांतों में खराबी

जब रक्त में ग्लूकोज का स्तर अधिक होता है, तब मुंह के लार में शुगर और स्टार्च की मात्रा भी बढ़ जाती है। इसे पचाने के लिए मुंह में खास तरह के एसिड का स्राव होने लगता है, जिससे दांतों की बाहरी परत के खराब होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। अगर हम ज्य़ादा शुगर या स्टार्च वाली चीजें खाते हैं तो इससे दांतों के बीच में प्लाक जमा होता है और उसमें बैक्टीरिया पनपते हैं। ऐसे में एसिड के मामूली अटैक से भी दांतों को बड़ा नुकसान होता है। रक्त में शुगर का स्तर जितना अधिक होगा, दांत उतनी जल्दी खराब होंगे।

कैसे करें बचाव

  • शुगर के स्तर को नियंत्रित रखें।
  • नियमित रूप से डेंटल चेकअप कराएं और डॉक्टर के सभी निर्देशों का पालन करें।
  • डायबिटीज के मरीज अगर क्राउन, ब्रेसेज या किसी अन्य ऑर्थोडेंटिक साधन का इस्तेमाल करते हैं तो उन्हें उनकी विशेष देखभाल करने की जरूरत पड़ती है क्योंकि इनकी वजह से मुंह के भीतर लगने वाली मामूली सी खरोच भी घाव में तब्दील हो जाती है, जो आसानी से ठीक नहीं हो पाती।
  • डायबिटीज के जो मरीज ज्यादा स्मोकिंग करते हैं, सिगरेट के धुएं से उनके मसूड़ों के रक्त संचार में बाधा पहुंचती है। इससे उनके दांतों में दर्द और सड़न की समस्या होने लगती है। इसलिए सिगरेट से दूर रहें।

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