बच्चों में शारीरिक-मानसिक विकास से जुड़ी गंभीर बीमारी है 'डेवलपमेंटल डिसऑर्डर', जानें इसके लक्षण, कारण और इलाज

डेवलपमेंटल डिसऑर्डर की वजह से बच्चा कम उम्र से ही शारीरिक और मानसिक रूप से  कमजोर हो जाता है, जानें इस समस्या के कारण और उपचार। 

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Sep 09, 2021Updated at: Sep 09, 2021
बच्चों में शारीरिक-मानसिक विकास से जुड़ी गंभीर बीमारी है 'डेवलपमेंटल डिसऑर्डर', जानें इसके लक्षण, कारण और इलाज

बचपन में बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में देरी या कमी की स्थिति को डेवलपमेंटल डिसऑर्डर कहा जाता है। इसकी वजह से बच्चों को कुछ नया सीखने, ध्यान केंद्रित करने और याद रखने की क्षमता कम हो जाती है। अगर आप बच्चे में ऐसे लक्षण देखते हैं तो तुरंत इसके इलाज के लिए चिकित्सक के पास जाना जरूरी है। डेवलपमेंटल डिसऑर्डर (Developmental Disorder) को न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर (Neurodevelopmental Disorder) के नाम से भी जाना जाता है। आमतौर पर बच्चे जन्म के कुछ माह बाद चीजों को सीखने और समझने लगते हैं और उनका शारीरिक विकास भी तेजी से होता है। लेकिन अगर किसी भी बच्चे में बचपन से कुछ सीखने, समझने और याद रखने के साथ-साथ बोलने में दिक्कत हो या उसके शारीरिक विकास में कमी दिख रही है तो इसका कारण  डेवलपमेंटल डिसऑर्डर हो सकता है। आइये जानते हैं बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास से जुड़ी इस गंभीर समस्या के बारे में। 

आसान भाषा में कहें तो डेवलपमेंटल डिसऑर्डर एक ऐसी बीमारी है जिसमें बच्चों के शारीरिक, मानसिक और व्यावहारिक विकास में प्रभाव पड़ता है। ऐसे बच्चे जो इस बीमारी से पीड़ित होते हैं उनके शारीरिक विकास में देरी के साथ-साथ मानसिक विकास जैसे किसी भी चीज को समझना, बोलना और याद रखने के अलावा दूसरे लोगों से मेल मिलाप में दिक्कतें आती हैं। इस समस्या के कारण बच्चों का रोजमर्रा का कार्यकलाप भी प्रभावित होता है। डेवलपमेंटल डिसऑर्डर कई तरह के होते हैं जिनके अपने अलग-अलग प्रभाव हैं। 

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डेवलपमेंटल डिसऑर्डर के प्रकार (Types of Developmental Disorders)

बचपन से ही बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में दिक्कत डेवलपमेंटल डिसऑर्डर के कारण होती है। इस बीमारी में बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास तो प्रभावित ही होता है इसके साथ इसकी वजह से कई अंगों पर भी असर पड़ता है। डेवलपमेंटल डिसऑर्डर का कोई सटीक इलाज अभी तक नहीं मिल पाया है लेकिन इस बीमारी के लक्षण दिखने पर बच्चों को कई तरह की थेरेपी और दवाएं देकर इसके प्रभाव से काफी हद तक बचाया जा सकता है। डेवलपमेंटल डिसऑर्डर कई तरह के होते हैं, आइये जानते हैं इनके बारे में।

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डेवलपमेंटल डिसऑर्डर के कारण (What Causes Developmental Disorders?)

बच्चों में डेवलपमेंटल डिसऑर्डर की समस्या जन्म से पहले के कई कारणों की वजह से होती है। यह समस्या माता-पिता में कई कमियों की वजह से या गर्भावस्था के दौरान कुछ कारणों से भी हो सकती है। मुख्य रूप से डेवलपमेंटल डिसऑर्डर की समस्या आनुवंशिक कारणों या गर्भावस्था के दौरान की गगई गलतियों के कारण होती है। डेवलपमेंटल डिसऑर्डर के कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं।

  • आनुवंशिक कारणों से बच्चों में डेवलपमेंटल डिसऑर्डर।
  • क्रोमोसोम अबनोर्मलिटीज के कारण।
  • गर्भावस्था के दौरान संक्रमण की वजह से।
  • पर्यावरण में मौजूद विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आने से।
  • गंभीर चोट लगने के कारण।
  • गर्भावस्था के दौरान मां द्वारा शराब या ड्रग्स का सेवन
  • समय से पहले डिलीवरी की वजह से।

डेवलपमेंटल डिसऑर्डर के लक्षण (Developmental Disorder Symptoms)

डेवलपमेंटल डिसऑर्डर की वजह से बच्चों का बचपन से ही मानसिक और शारीरिक विकास प्रभावित होता है। इस समस्या से ग्रसित होने के बाद बच्चों में मानसिक चेतना, याददाश्त और कुछ करने या सीखने की क्षमता में कमी भी आती है। डेवलपमेंटल डिसऑर्डर की समस्या दिखने वाले प्रमुख लक्षण इस प्रकार से हैं। 

  • बच्चों का शारीरिक विकास देरी से होना। 
  • बच्चे द्वारा मां को न पहचान पाना। 
  • अपने शरीर को न संभाल पाना। 
  • एक साल का हो जाने के बाद भी खड़े न हो पाना। 
  • बच्चों को बोलने में तकलीफ। 
  • अन्य लोगों से बातचीत या मेलजोल में दिक्कत। 
  • किसी भी काम को करने की रूचि न होना। 
  • सीखने की क्षमता का प्रभावित होना। 

डेवलपमेंटल डिसऑर्डर का इलाज (Developmental Disorder Treatment)

डेवलपमेंटल डिसऑर्डर का अभी तक कोई सटीक इलाज नहीं मिल पाया है लेकिन बच्चों में इसके लक्षण दिखने पर चिकित्सक के पास ले जाना फायदेमंद होता है। इस समस्या में कई तरह की थेरेपी और दवाओं के सहारे इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। डॉक्टर इस समस्या में बच्चों में दिखने वाले लक्षण को कम करने का इलाज करते हैं। यह समस्या किसी को भी हो सकती है। इसके लक्षण दिखने पर चिकित्सक से संपर्क जरूर करें।

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