स्किन पर खुजली, रैशेज और सूजन हो सकते हैं डर्मेटाइटिस का संकेत, एक्सपर्ट से जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव

स्किन पर तेज खुजली होने पर हम उसे नाखून से खुजलाने लगते हैं, जिसके कारण हमारी समस्याएं बढ़ जाती हैं। डर्मेटाइटिस भी से जुड़ी एक समस्या है।

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraPublished at: Jan 18, 2021
स्किन पर खुजली, रैशेज और सूजन हो सकते हैं डर्मेटाइटिस का संकेत, एक्सपर्ट से जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव

डर्मेटाइटिस एक स्किन संबंधी बीमारी है, जिसमें मरीजों के स्किन पर रैशेज, सूजन और खुलजी की समस्याएं काफी ज्यादा होने लगती हैं। इस समस्या को जिल्द की सूजन भी कहते हैं। यह स्किन संबंधी बहुत ही आम समस्या है। स्किन से जुड़ी समस्याएं जैसे खुजली, रैशेज पड़ना और सूजन होना बहुत ही आम है। लेकिन अगर यह समस्या आपको काफी लंबे समय से हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर्स से संपर्क करें। भले ही डर्मेटाइटिस की परेशानी (dermatitis) गंभीर नहीं होती है, लेकिन खुजली होने पर आप स्किन को काफी तेज से रगड़ते हैं, जिसके कारण आपकी स्किन पर खरोंच होते हैं,जिसमें संक्रमण फैलने का काफी ज्यादा खतरा रहता है। स्किन स्पेशलिस्ट डॉक्टर अभिनव सिंह बताते हैं कि डर्मेटाइटिस की परेशानी (dermatitis) होने पर मरीजों को काफी तेज खुजली और जलन का अनुभव होता है। ऐसे में व्यक्ति प्रभावित हिस्से पर काफी तेजी से खुजलाते हैं, जिसके कारण उस स्थान पर घाव बनने का खतरा रहता है। ऐसी स्थिति होने पर स्किन को ज्यादा खुजलाएं नहीं, बल्कि डॉक्टर के पास जाएं। अगर आपको तेज खुजली हो रही है, तो उसे सहलाएं। नाखून से उस स्थान को रगड़ने आपकी स्किन में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं डर्मेटाइटिस (dermatitis Symptoms and Causes in hindi) के लक्षणों, कारण और उपचार के बारे में-

डर्मेटाइटिस के प्रकार (Types of dermatitis in Hindi)

  • कांटेक्ट डर्मेटाइटिस (Contact dermatitis)
  • एटॉपिक डर्मेटाइटिस (Atopic dermatitis (eczema)
  • सेबोरिक डर्मेटाइटिस (Seborrheic dermatitis)
  • डिशिड्रोटिक डर्मेटाइटिस (Dyshidrotic dermatitis)

किन कारणों से होता है डर्मेटाइटिस (Dermatitis causes in hindi)

डर्मेटाइटिस के प्रकारों के आधार पर इसके कारण भी अलग-अलग होते हैं। कुछ डर्मेटाइटिस की समस्या, जैसे - न्यूरोडर्माटाइटिस, डिशिड्रोटिक डर्मेटाइटिस  और नुम्मूलर डर्मेटाइटिस अज्ञात कारणों से हो सकते हैं। आइए जानते हैं अन्य डर्मेटाइटिस के कारण- 

कांटेक्ट डर्मेटाइटिस के कारण (Contact dermatitis causes)

  • निकेल धातु के गहने पहनने से व्यक्ति को कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस की परेशानी हो सकती है।
  • डिटर्जेंट से एलर्जी होने
  • परकॉस्मेटिक चीजों से एलर्जी होने पर (जैसे- क्रीम, लोशन इत्यादि)
  • परफ्यूम से एलर्जी होने पर
  • पॉइज़न आइवी और ओक

एटॉपिक डर्मेटाइटिस या एक्जिमा (eczema)

  • ड्राई स्किन बैक्टीरियल समस्या होने पर
  • पर्यावरणीय कारक
  • आनुवांशिक या एक जीन भिन्नता, इत्यादि।

सेबोरिक डर्मेटाइटिस का कारण (Seborrheic dermatitis causes) 

ऑयली स्किन सेल्स में खमीर या कवक (yeast (fungus) की वजह से आपको सेबेरिक डर्मेटाइटिस की परेशानी हो सकती है। यह समस्या बरसात और सर्दियों में अधिक होती है।

स्टैसिस डर्मेटाइटिस का कारण (Stasis dermatitis causes)

शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सही से ना होने के कारण व्यक्ति को निचले पैरों में स्टैसिस डर्मेटाइटिस की परेशानी हो सकती है।

डर्मेटाइटिस के लक्षण  (Symptoms of Dermatitis Symptoms)

डर्मेटाइटिस स्किन संबंधित परेशानी हैं। यह हमारे शरीर के भिन्न हिस्सों को प्रभावित करता है। इसकी वजह से आपको स्किन पर रैशेज, खुजली, लालिमा, सूजन इत्यादि की परेशानी होती है। आइए जानते हैं डर्मेटाइटिस की परेशानी होने पर अन्य क्या-क्या लक्षण दिखते हैं।

  • स्किन रूखी और फटी हुई दिखना
  • स्किन पर चकत्ते दिखना (rashes)
  • स्किन पर काफी तेज खुजली होना
  • शरीर पर फफोले पड़ना (blisters)
  • प्रभावित हिस्से पर दर्द और जलन का अनुभव होना।
  • स्किन पर रैशेज पड़ना
  • त्वचा पर सूजन होना इत्यादि डर्मेटाइटिस के लक्षण होते हैं। 

डर्मेटाइटिस के जोखिम कारक  (Risk Factor of Dermatitis)

इन कारणों से डर्मेटाइटिस की परेशानी होने का खतरा अधिक हो सकता है। आइए जानते हैं इस बारे में-

  • व्यक्ति की आयु
  • पर्यावरण या ठंडा
  • शुष्क मौसम
  • स्किन ऑलयी होना।
  • अनुवांशिक कारणअस्वस्थ होना।
  • एलर्जी की समस्या होना।
  • अस्थमा के मरीजों को
  • अधिक स्ट्रेस लेने वालों को
  • हार्मोनल परिवर्तन इत्यादि के कारण डर्मेटाइटिस का जोखिम ज्यादा रहता है। 

डॉक्टर अभिनव सिंह बताते हैं कि नवजात शिशुओं और 30 से 60 वर्ष के लोगों को सेबोरिक डर्मेटाइटिस (Seborrheic dermatitis) होने का खतरा ज्यादा रहता है। इसके अलावा ऐसे लोग, जिन्हें बार-बार हाथ धोने और उसे सुखाने की आदत होती है, उन्हें भी रह बीमारी होने का खतरा ज्यादा रहता है। दरअसल, बार-बार हाथ धोने से हमारी स्किन से तेलीय परत निकल जाती है, जिसके कारण शरीर का पीएच लेवल संतुलित हो जाता है। ऐसे में डर्मेटाइटिस की परेशानी बढ़ने का खतरा अधिक रहता है। 

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डर्मेटाइटिस का निदान ( Diagnosis of Dermatitis in hindi)

स्किन स्पेशलिस्ट अधिकतर मामलों में स्किन को देखकर ही डर्मेटाइटिस की स्थिति जान लेते हैं। इसके कारण कुछ शारीरिक परीक्षण और मेडिकल इतिहासा जानकर भी इस समस्या का पता लगाया जाता है। मरीजों को देखकर अगर डॉक्टर को डर्मेटाइटिस होने का संदेह लगता है, तो उन्हें पैच टैस्ट या फिर स्किन एलर्जी टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में डॉक्टर मरीजों को बायोप्सी करवाने की भी सलाह देते हैं। 

डर्मेटाइटिस (त्वचा रोग) का इलाज (Treatment of Dermatitis)

डर्मेटाइटिस की परेशानी यानी जिल्द की सूजन का इलाज डॉक्टर मरीज की गंभीरता, प्रकार और लक्षणों के आधार पर करते हैं। विभिन्न कारणों से हुए स्किन की परेशानी को उसी आधार पर इलाज करने की कोशिश की जाती है। इन तरीकों से डॉक्टर कर सकते हैं डर्मेटाइटिस का उपचार- 

  • दवाएं से करते हैं उपचार
  • फोटोथेरेपी (phototherapy)
  • सामयिक क्रीम (topical creams) 
  • शुष्क त्वचा के लिए क्रीम या लोशन लगाने की सलाहएंटीबायोटिक्स या एंटिफंगल दवाएं खाने की सलाह।
  • घरेलू इलाज (home treatment) 
  • खानपान में बदलाव

डर्मेटाइटिस का बचाव (Prevention of Dermatitis)

    • कॉस्मेटिक चीजों के अधिक इस्तेमाल से बचें। 
    • अधिक केमिकल्स युक्त प्रोडक्ट्स का इल्तेमाल ना करें। 
    • अधिक गर्म पानी से ना लगाएं। सर्दियों में हल्के गुनगुने पानी से ही नहाएं।
    • 5 से 10 मिनट तक ही शॉवर लें। 
    • सौम्य, नॉनसोप क्लीनर (no soap cleanser) का ही इस्तेमाल करें। 
    • नहाने के बाद तौलिए से अपनी स्किन को रगड़ें नहीं, हल्के हाथों से तौलिए को स्किन पर थपथपाएं।
    • नहाने के बाद स्किन पर मॉइस्चराइजर लगाना ना भूलें। 
    • एलर्जी होने पर ऐसी चीजों से बचें, जिससे आपको एलर्जी हो। 
    • प्रभावित हिस्से को खरोंचे नहीं। 
    • संक्रमण से बचें।
    • खानपान का ध्यान रखें।

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