Depression: किशोरावस्‍था में नकारात्‍मक विचार नींद की कमी के साथ बन सकते हैं डिप्रेशन का भी कारण

यदि आप अपने बच्चे को परेशान या नेगेटिव बातों की ओर जाते देखते हैं, तो उसे दूर करने में उसकी मदद करें, क्‍योंकि वह उसे डिप्रेशन का शिकार बना सकता है। 

Sheetal Bisht
Written by: Sheetal BishtUpdated at: Mar 19, 2020 12:53 IST
Depression: किशोरावस्‍था में नकारात्‍मक विचार नींद की कमी के साथ बन सकते हैं डिप्रेशन का भी कारण

यदि आप अपने बच्चे को खोए हुए विचारों में या परेशान देखते हैं, तो सुनिश्चित करें कि वह ठीक है। क्‍योंकि नेगेटिव सोचने की वजह से उाकी नींद पर असर पड़ता है और उसकी नींद खराब हो सकती है, जो उसके स्वास्थ्य के लिए अच्‍छा नहीं है। नेगेटिव सोच खराब नींद का कारण बनती है और यह डिप्रेशन का कारण। डिप्रेशन एक ऐसी चीज है, जिससे हम सभी डरते हैं, क्‍योंकि यह आत्‍महत्‍या और आपा खोने जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। बच्चों सहित सभी के लिए नकारात्मक विचार बुरे हैं। आज के समय में कॉम्पिटिशन काफी तगड़ा है, जिसकी वजह से बच्‍चे अपनी जी जान लगा देते हैं। लेकिन यही कारण है कि वे नकारात्‍मक सोच की ओर भी जाते हैं। यह आदत उनके स्वास्थ्य के लिए विनाशकारी है क्योंकि यह अनिद्रा, चिंता और डिप्रेशन जैसी गंभीर बीमारियों का विकास कर सकती है। ऐसे विचारों को दूर करने और सकारात्मक बने रहने में मदद करने के लिए माता-पिता को नियमित रूप से अपने बच्चे के व्यवहार का आंकलन करना चाहिए।

क्‍या कहती है रिसर्च? 

Depression in Teens

फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया द्वारा किए गए शोध के अनुसार, नकारात्मक विचार किशोरों की स्‍लीप साइकिल को प्रभावित करते हैं, जिसके कारण वह सांउड स्‍लीप पाने और जागने में असमर्थ होते है। लंबे समय में, यह अनिद्रा का कारण बन सकता है, जो उनमें डिप्रेशन को बढ़ा सकता है। यह शोध ऑनलाइन आयोजित किया गया था, जहां लगभग 400 टीनएर्जस को शामिल किया गया, जिनकी उम्र 13 से 20 वर्ष के बीच थी।

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खराब नींद और डिप्रेशन का कारण बन सकते हैं नकारात्मक विचार

अध्‍ययन के निष्कर्षों ने शोधकर्ताओं के दावों को साबित कर दिया कि नकारात्मक विचारों के परिणामस्वरूप नींद में देरी या खराब नींद और टीनएर्जस में मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ता है। फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी में चाइल्‍ड एण्‍ड अडोलेसेंस स्‍लीप क्लिनिक के निदेशक, और अध्‍ययन के वरिष्ठ शोधकर्ता प्रोफेसर माइकल ग्रैडिसर ने कहा,  "बार-बार एक ही बात सोचन या दोहराव वाली सोच नकारात्मक सोच की आदत है और यह नींद को मुश्किल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। इसके अलावा, यह टीनएर्जस में उदास मनोदशा पैदा करती है, जो पहले से ही देर रात रहना पसंद करते हैं। यह अध्ययन पूर्णतावाद और मनोदशा में व्यक्तिगत अंतर के साथ-साथ नींद की समस्याओं को रोकने और उनके इलाज में दोहराव वाली नकारात्मक सोच को पहचानने की आवश्यकता का समर्थन करता है। "

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कई अध्ययन यह दावा कर रहे हैं कि लगभग 3 से 8 प्रतिशत किशोर एक या अन्‍य कई वजहों से डिप्रेशन से ग्रस्त हैं। यदि समस्या को समय पर रोका जाता है, तो लक्षण बच्चे को अन्य गंभीर डिप्रेशन और मानसिक विकारों का शिकार बना सकते हैं। दोहरावदार सोच, विशेष रूप से नकारात्मकताओं के बारे में, दृढ़ता से नींद की गड़बड़ी से जुड़ी होती है जो बाद में अवसाद में बदल जाती है।

depression in teenager due to negative thoughts

किशोरावस्‍था में डिप्रेशन के परिणाम 

डिप्रेशन एक अकेले रहने जैसा महसूस करने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्‍या है। लेकिन यह अन्य स्वास्थ्य समस्याओं जैसे खराब एकाग्रता, चीजों को करने में कठिनाई, बातचीत के मुद्दों और यहां तक कि आत्महत्या के विचारों को भी पैदा कर सकता है।

माता-पिता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चे को पर्याप्त नींद मिल रही है, जो डिप्रेशन में नकारात्‍मक विचारों को दूर करने में मदद कर सकता है। सोने के समय को ठीक करने और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग को सीमित करने के लिए बेहतर है कि वे साउंड स्‍लीप लें और डिप्रेशन की शुरुआत को रोकने में मदद करें।

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