बरसात में पालतू जानवरों से हो सकती है कई गंभीर बीमारियां, जानें इनके लक्षण, कारण और बचाव के तरीके

पालतू जानवरों से हो सकती है बीमारी, इन बीमारियों से कैसे करें बचाव जानने के लिए पढ़ें यह आर्टिकल।

Satish Singh
Written by: Satish SinghPublished at: Jul 29, 2021Updated at: Jul 29, 2021
बरसात में पालतू जानवरों से हो सकती है कई गंभीर बीमारियां, जानें इनके लक्षण, कारण और बचाव के तरीके

बरसात के समय में लोगों के साथ जानवरों को आसानी से बीमारी हो सकती है। क्योंकि इस सीजन में एक से दूसरे में आसानी से बीमारी फैल सकती है। इसलिए इस सीजन में पेट्स की देखभाल करना जरूरी हो जाता है। अगर उनका ख्याल न रखा गया तो आपको कई प्रकार की बीमारी हो सकती है। जैसे इंसान बीमार पड़ते हैं ठीक उसी प्रकार पेट्स को भी कई बीमारियां होती हैं, खास तौर पर बरसात के मौसम में। जैसे कि इंसान दूसरे इंसानों को संक्रमित कर सकते हैं ठीक उसी प्रकार कई की बीमारी एक से दूसरे व्यक्ति को हो सकती है। पालतू पशुओं के संपर्क में आने से यह बीमारियां इंसानों तक जा पहुंच सकती हैं, अगर समय पर इसका इलाज नहीं हुआ तो यह जानलेवा भी हो सकती हैं। जमशेदपुर के कदमा, सोनारी में डॉग केयर क्लीनिक के पशु चिकित्सक डॉ. दीपक महतो ने कहा- अगर कोई पशु पालक है तो उनको इन बीमारियों के बारे में जानकारी होनी चाहिए। ताकि बीमारी से बचाव कर सकें। खासतौर पर वैसे लोग जिनके घरों में पेट्स हैं, उन लोगों को खास एहतियात बरतने की आवश्यकता होती है।

पालतू जानवरों की वजह से हो सकती है कई बीमारी

डॉक्टर दीपक महतो बताते हैं कि पालतू जानवरों से बैक्टीरियल डायरिया व इंफेक्शन, रैबीज, खुजली, स्किन डिजीज जैसी बीमारियां होती हैं। इससे यह बीमारियां इंसानों में आ जाती है। बैक्टीरियल इंफेक्शन बिल्लियों की खरोंच से होता है। ये खरोंच बिल्ली ने गुस्से में मारी हो या खेलते हुए खरोंच लग गई हो, ये बरसात में खतरनाक हो सकती है। छोटे बच्चों, गर्भवती महिला, बुजुर्गों या पहले से ही बीमार लोगों के लिए पालतू बिल्ली की मामूली खरोंच भी इंफेक्शन हो सकता है। इंफेक्शन होने के कारण मरीज में कुछ खास लक्षण दिखते हैं। इसके लक्षण हैं फूली हुई लिंफ नोड्स, बुखार का आना और लगातार थकान इसके लक्षण हैं।

पेट्स से टीबी की बीमारी का खतरा

पशु चिकित्सक डॉ. दीपक बताते हैं कि बरसात में टीबी की बीमारी भी पालतू भेड़-बकरियों से इंसानों में फैल सकती है। जानवरों की छींक, बगलम या स्किन-टु-स्किन कॉन्टेक्ट से भी ये बीमारी फैलती है। टीबी के लक्षणों में सीने में दर्द, खांसी, बुखार, थकान व लगातार वजन घटता है। 

पेट्स से रेबीज की बीमारी है आम, यह है लाइलाज

डॉक्टर बताते हैं कि यदि आपने पालतू जानवर का समय पर टीका नहीं करवाया तो उससे आपको बीमारी होने का खतरा रहता है। रैबीज बीमारी को पालतू जानवरों से होने वाली सबसे खतरनाक बीमारियों में गिना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह बीमारी लाइलाज है। यह बीमारी पालतू जानवरों में आसपास रहने वाले जंगली जानवरों से आती है व पालतू जानवरों की सफाई के दौरान इंसानी शरीर में इसके वायरस प्रवेश कर जाते हैं। फ्लू की तरह लक्षणों से बीमारी की शुरुआत होती है, जो जल्द ही मति भ्रम, बेहोशी या पैरालिसिस में बदल जाती है। बरसात में इस बीमारी की चपेट में ज्यादा लोग आते हैं। 

इसके साथ इबोला, स्वाइन फ्लू, बर्ड फ्लू, लैप्टोस्पायरोसिस बीमारियां जानवरों से इंसानों में बरसात में आती है। अगर आपके घर में बच्चे या आप ज्यादा समय बिल्ली, कुत्ता, खरगोश के साथ बिताते हैं तो आपको इनसे बचने उपाय करने होंगे। इनकी साफ-सफाई का खासतौर पर ध्यान रखना होगा

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खतरनाक बीमारी है लेप्टोस्पाइरता, इससे बचाव है जरूरी

पशु चिकित्सक डॉ. दीपक बताते हैं कि चूहे के यूरीन से निकली बीमारी कुत्ते से होते हुए इंसानों तक पहुंचती है। जानवरों से इंसानी शरीर में पहुंचने वाली यह बीमारी सबसे खतरनाक मानी जाती है। यह बीमारी मुख्य रूप से चूहे के यूरीन से पालतू जानवरों में फैलता है। इसके बाद यह इंसानों तक पहुंच जाता है। बरसात में यह बीमारी पशु से इंसानों तक पहुंचने वाली सबसे तेज बीमारी है। यह बीमारी लेप्टोस्पाइरता नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। बरसात में जहां तहां पानी जमा होता है। इससे बीमारी से संक्रमित जानवर पानी में मूत्र त्यागते हैं। इसके बाद प्रदूषित पानी यदि किसी के कटे हुए घाव या स्किन में लग जाए तो लेप्टोस्पाइरता  बैक्टीरिया उसके अंदर चला जाता है और बीमार कर देता है। कुत्ते, गिलहरी, भैंस, घोड़े, सुअर, जब चूहे का यूरीन चाटते हैं तो यह बीमारी उनके अंदर चली जाती है। उनके द्वारा पानी में पेशाब करने से यह बीमारी पानी से होते हुए इंसानों तक पहुंचती है। मानसून में यह बीमारी तेजी से फैलती है। बीमारी से ग्रसित लोगों में 20 प्रतिशत लोगों की मौत हो जाती है।

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इसके लक्षणों पर एक नजर

  • लेप्टोस्पाइरता के लक्षण कोरोना के जैसे होते हैं।
  • बीमारी में मरीज को ठंड लगता है
  • शरीर के विभिन्न अंग दर्द करते हैं
  • उल्टी होती है
  • अचानक सिर दर्द शुरू हो जाता है
  • आंखें लाल हो जाती है व जलन होती है
  • सांस लेने में परेशानी होती है
  • कम सुनाई देता है
  • ज्यादा थकान लगता है

इसके बचाव के तरीकों पर नजर

लेप्टोस्पाइरता से बचना है तो आपको सड़क पर जलजमाव, नाली, नदी, तालाब से बचना होगा। तैराकी का शौक है तो दूषित पानी में नहीं तैरें। गंदे पानी से जितना हो सके बचें। उसमें स्नान न करें। घर में पानी का जमाव नहीं करें। बीमार जानवरों को न छुए और स्वच्छ पानी का ही इस्तेमाल करें।

इबोला वायरस का भी खतरा

जानवरों की चपेट में आने से इबोला वायरस फैलता है। संक्रमित जानवरों से होने स्त्राव से यह इंसनों तक पहुंच जाता है। इबोला वायरस जानवरों के काटने या उसे खाने से फैलता है। मानसून में यह ज्यादा फैलता है। इबोला से पीड़ित व्यक्ति से यह बीमारी एक से दूसरे में फैलती है। इसलिए इबोला के मरीज को अलग रखा जाता है। यह बीमारी एक तरह से कोरोना की जैसी ही होती है। इबोला वायरस से मरने के बाद भी व्यक्ति में संक्रमण रहता है। शव के संपर्क में आने वायरस फैलता है। चमगादड़ों के मल मूत्र के संपर्क में आने से यह बीमारी फैलती है।

इबोला के लक्षणों पर एक नजर

उल्टी होना, पेट दर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी, शरीर पर फुंसी होना, मुंह नाक से खून का बहना

ऐसे करें बीमारी से बचाव

जानवरों का मांस नहीं खाएं जिससे इबोला खतरा है। संक्रमित व्यक्ति का देख भाल करते हुए उसके शरीर से निकले तरल पदार्थ जैसे खून, लार आदि के संपर्क में ना आए।

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पक्षियों से इंसानों को होने वाली बीमारी

बर्ड फ्लू

बर्ड फ्लू पक्षियों से इंसानों में फैलता है। बर्ड फ्लू का इंफेक्शन मोर , मुर्गा, बत्तख जैसी पक्षी में तेजी से फैलता है। इंसान में यह बीमारी मुर्गियों या संक्रमित पक्षी के बेहद निकट रहने से फैलती है। इंसानों में बर्ड फ्लू का वायरस आंख, नाक और मुंह के जरिए प्रवेश करता है। इस वजह से इसका बचाव यही है कि संक्रमित पक्षियों खासकर मरे पक्षियों से दूर रहें। संक्रमण वाले एरिया में कोशिश करें कि ना जाएं। मांस और अंडे खाने से बचें।

बर्ड फ्लू के लक्षण

उल्टी जैसा महसूस होना, पेट के निचले हिस्से में दर्द रहना सांस लेने में दिक्कत, हमेशा कफ बने रहना, सिर में दर्द, नाक बहना, गले में सूजन, मशल्स में दर्द आदि।

साइकोसिस

पक्षी पालने वाले लोगों को इस बीमारी का खतरा रहता है।  इसे पैरट फीवर भी कहते हैं। बरसात में यह बीमारी ज्यादा होती है। ये बीमारी संक्रमित पक्षी के शरीर से हवा के जरिए फैलती है और अगर हम भी उसी हवा में सांस ले रहे हैं तो बीमारी के वायरस नाक के जरिए हमारे फेफड़ों में पहुंच जाते हैं। बीमारी के लक्षणों में बुखार, डायरिया, सूखी खांसी और ठिठुरन शामिल हैं। एंटीबायोटिक से ये इंफेक्शन 1 से 3 हफ्तों में चला जाता है।

पेट्स का रखें ध्यान, बीमार होने पर लें डॉक्टरी सलाह

बरसात के मौसम में अपनी सेहत के साथ पेट्स की सेहत का भी ख्याल रखना चाहिए। यदि न रखा जाए तो आप बीमार पड़ सकते हैं। यदि आपका पेट बीमार है तो उसके लिए भी डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए। यदि बीमारी को नजरअंदाज किया जाए तो उससे यह बीमारी दूसरों को भी फैल सकती है। यदि आप पेट लवर हैं तो उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य, खानपान पर ध्यान देने के लिए एक्सपर्ट की सलाह भी ले सकते हैं।

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