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बहरापन दूर करने के लिए की जाती है कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी, एक्सपर्ट से जानें इसके बारे में

बहरेपन की समस्या दूर करने के लिए कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी बहुत उपयोगी मानी जाती है, जानें इस सर्जरी के बारे में।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Mar 04, 2022Updated at: Mar 04, 2022
बहरापन दूर करने के लिए की जाती है कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी, एक्सपर्ट से जानें इसके बारे में

बहरेपन की समस्या से बचाव के लिए समय रहते इलाज कराना बहुत उपयोगी होता है। कुछ बच्चों में जन्म के समय से ही सुनने और बोलने में दिक्कत होती है इसका समय पर इलाज न होने से यह समस्या जीवन भर बनी रह सकती है। शुरूआती समय में अगर बच्चों के अभिभावक इस समस्या पर ध्यान देते हैं तो कुछ इलाज और सर्जरी की सहायता से इसे ठीक किया जा सकता है। बहरेपन की समस्या को दूर करने और इससे बचने के लिए कई तरह के इलाज और सर्जरी का प्रयोग किया जाता है। अगर किसी को जन्मजात सुनने में दिक्कत होती है या पूरी तरह से सुनाई नहीं देता है तो इसके लिए कॉक्लियर इम्प्लांट (Cochlear Implant Surgery in Hindi) सर्जरी की जाती है। बहरेपन या हियरिंग लॉस को दूर करने के लिए यह बहुत ही प्रभावी सर्जरी मानी जाती है। आइये विस्तार से जानते हैं इस सर्जरी के बारे में।

कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी क्या है? (What Is Cochlear Implant Surgery in Hindi?)

Cochlear-Implant-Surgery

बच्चों में जन्मजात बोलने या सुनने में दिक्कत होने की समस्या को दूर करने के लिए कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी की जाती है। गोंडा जिला अस्पताल के नाक, कान और गला रोग विशेषज्ञ डॉ एए खान के मुताबिक आमतौर पर बच्चों में छह महीने की उम्र तक बोलने या सुनने की क्षमता का अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसे में अगर बच्चा कुछ बोल पाने या सुन पाने में सक्षम नहीं है तो सबसे पहले ईएनटी विशेषज्ञ से इसके बारे में सलाह जरूर लेनी चाहिए। अगर बच्चे में हियरिंग लॉस या बोल न पाने की समस्या होती है तो आप इसके निदान के लिए कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी का विकल्प चुन सकते हैं। कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी में एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को कान के भीतरी और बाहरी भाग में फिट किया जाता है जिससे आपकी सुनने की क्षमता ठीक होती है। कान में मौजूद कॉक्लियर नर्व को इस डिवाइस की सहायता से जोड़ा जाता है जो आवाज को समझने के लिए मदद करती है। इस सर्जरी से सुनने की क्षमता को बेहतर करने का काम किया जाता है लेकिन यह जरूरी नहीं है कि हर मरीज में इस सर्जरी के बाद सुनने की क्षमता बढ़ जाए। 

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कैसे की जाती है कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी? (Cochlear Implant Surgery Process)

कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी ऐसी स्थिति में की जाती है जब मरीज के दोनों कानों से सुनने की क्षमता खत्म हो जाती है या कम होती है। इस सर्जरी का इस्तेमाल जन्मजात सुनने की क्षमता में कमी होने पर भी किया जाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस सर्जरी का इस्तेमाल ऐसी स्थिति में भी किया जाता है जब मरीज के कान में फिट उपकरण सुनने की क्षमता में सुधार नहीं कर पाते हैं। कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी में एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें मरीज को सबसे पहले बेहोश करने के बाद कान के पीछे और भीतर में एक चीरा लगाया जाता है। इसके बाद कॉक्लियर इंप्लांट डिवाइस को कान के बीच में फिट किया जाता है, इस डिवाइस का एक भाग कान के बाहर की तरफ रहता है। सामान्यतः इस सर्जरी को करने में 2 से 4 घंटे का वक्त लगता है लेकिन अगर मरीज को किसी प्रकार की समस्या है तो उसकी सर्जरी में अधिक समय भी लग सकता है।

कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी के बाद सावधानियां (Precaution Tips After Cochlear Implant Surgery)

कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी के बाद मरीज को डॉक्टर कुछ दवाओं के सेवन की सलाह देते हैं। इस सर्जरी के तुरंत बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी नहीं दी जाती है। कुछ दिनों तक डॉक्टर की निगरानी में रहने के बाद मरीज को अस्पताल से घर जाने की इजाजत मिलती है। डॉक्टर इस सर्जरी के बाद समय-समय पर आपको हॉस्पिटल आने की सलाह दे सकते हैं। सर्जरी के बाद डिवाइस के इस्तेमाल के बारे में सही जानकारी मरीज को जरूर रहनी चाहिए। इसके लिए आप स्पीच लैंग्वेज थेरेपिस्ट या ऑडियोलोजिस्ट की सलाह ले सकते हैं। इसके अलावा समय-समय पर डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

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