पब्लिक प्लेस में चिल्लाता है बच्चा, तो ऐसे करें उसे हैंडल

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 14, 2018
Quick Bites

  • बच्चे की जरूरत का सामान अपने साथ अवश्य कैरी करें।
  • ऐसे बच्चों का बिहेवियर आगे चलकर और भी एग्रेसिव बनता है।
  • हर घर में पैरेंट्स कुछ नियम तय करते हैं और उसे फाॅलो भी करते हैं।

जरा सोचिए, कि आप कहीं बस, मेटो या पब्लिक प्लेस में हों और आपका बच्चा किसी चीज की जिद करें और अपनी डिमांड पूरी करवाने के लिए वह जोर-जोर से चिल्लाने या जमीन पर ही लेटकर रोने लगे तो। यकीनन यह स्थिति किसी भी अभिभावक के लिए काफी इम्बेरसिंग होगी। अधिकतर पैरेंट्स ने कभी न कभी इस स्थिति का सामना अवश्य किया है। ऐसे में माता-पिता को समझ ही नहीं आता कि वह क्या करें या तो वह डांटकर व मारकर बच्चे को चुप करा देते हैं या फिर उनकी डिमांड को पूरा कर देते हैं। पैरेंट्स द्वारा अपनाए गए यह दोनों ही रास्ते गलत हैं। इससे बच्चों का बिहेवियर आगे चलकर और भी एग्रेसिव बनता है। तो चलिए जानते हैं कि बच्चे की इस हरकत को किस तरह करें हैंडल-

न करें यह भूल

नोएडा के कैलाश अस्पताल की स्पेशल एजुकेटर व चाइल्ड साइकोलाॅजिस्ट डाॅ. रूमकी मित्रा कहती है कि अधिकतर पैरेंट्स यह गलती करते हैं कि वह बच्चे को शांत करने के लिए उसकी जिद पूरी कर देते हैं। इस भूल को कभी भी नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से बच्चों के मन में यह बात बैठ जाती है कि अगर पब्लिक प्लेस में चिल्लाया या रोया जाए तो पैरेंट्स उनकी बात को बेहद आसानी से मान लेंगे। बाद में अपने इस व्यवहार को एक टूल की तरह इस्तेमाल करते हैं ताकि वह पैरेंट्स से अपनी बात मनवा सके।

बनाएं रखें अनुशासन

हर घर में पैरेंट्स कुछ नियम तय करते हैं और उसे फाॅलो भी करते हैं। लेकिन पब्लिक प्लेस में वह बच्चे के व्यवहार को देखकर उन नियमों को बदल देते हैं। वास्तव में ऐसा करना गलत है। जिस तरह आप बच्चे के साथ घर में रहते हैं, उन्हीं रूल्स को पब्लिक प्लेस में भी फाॅलो करंे। मसलन, कोई गलत हरकत करने पर या जिद करने पर अगर आप उनसे बात नहीं करते या फिर दूसरे कमरे में चले जाते हैं तो पब्लिक प्लेस में भी ऐसा ही करें। इससे बच्चों को समझ आएगा कि वह अपनी बात मनवाने के लिए गलत तरीके का इस्तेमाल नहीं कर सकते। हो सकता है कि शुरूआत में एक या दो बार आपको दिक्कत हो लेकिन बाद में बच्चों में आपको बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

समझें परेशानी

वहीं लाइफ एंड पैरेंटिंग कोच सलोनी सिंह का मानना है कि कई बार बच्चे परेशान होकर भी रोने व चिल्लाने लगते हैं। जैसे कुछ बच्चे लंबे सफर में असहज हो जाते हैं या फिर बच्चों को एक जगह देर तक बैठना पसंद नहीं होता या फिर हो सकता है कि उन्हें भूख लगी हो। ऐसे में माता-पिता की यह जिम्मेदारी है कि वह न सिर्फ बच्चे की परेशानी को समझें, बल्कि उनकी समस्या को दूर करने का प्रयास भी करंे। 

इसे भी पढ़ें : बच्चों में पढ़ने की आदत का कुछ इस तरह करें विकास

इसका रखें ध्यान

अगर आप लंबे समय के लिए बाहर रहने वाले हैं तो बच्चे की जरूरत का सामान अपने साथ अवश्य कैरी करें। जैसे उसके खाने-पीने व उसकी पसंद का कोई एक छोटा खिलौना भी बैग में रखें। इससे वह पब्लिक प्लेस में आपको परेशान नहीं करेगा। अगर बच्चा पब्लिक प्लेस में किसी गलत बात के लिए जिद कर रहा है तो आप स्वयं उग्र व्यवहार न अपनाएं। इससे बच्चा उस समय भले ही शांत हो जाए लेकिन बाद में वह भी गुस्सैल स्वभाव के ही हो जाते हैं।

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

Read More Articles On Parenting In Hindi

Loading...
Is it Helpful Article?YES678 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
I have read the Privacy Policy and the Terms and Conditions. I provide my consent for my data to be processed for the purposes as described and receive communications for service related information.
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK