बच्चों में पढ़ने की आदत का कुछ इस तरह करें विकास

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 01, 2018

कहते हैं कि किताबें ही व्यक्ति की सबसे अच्छी व सच्ची दोस्त होती हैं। ज्ञान के इस भंडार में व्यक्ति के समग्र व्यक्तित्व को बदलने की शक्ति होती है। लेकिन आज के डिजिटल युग में जब सबकुछ उंगलियों पर मौजूद हैं तो बच्चों को किताबों का महत्व समझाना व उनकी दोस्ती किताबों से करवाना बेहद मुश्किल हो जाता है। हालांकि इससे किताबों की महत्ता कम नहीं हो जाती। अमेरिकन नावलिस्ट और शाॅर्ट स्टोरी राइटर जाॅर्ज आर. आर. मार्टिन के शब्दों में, अपना तेज बनाए रखने के लिए जिस तरह तलवार को पत्थर की जरूरत होती है उसी प्रकार दिमाग को किताबों की। अब समस्या यह है कि बच्चों में पढ़ने की आदत का विकास किस प्रकार किया जाए। तो चलिए आज हम आपको इसके बारे में बताते हैं-

बेस लाइन से हो शुरूआत

नोएडा के कैलाश हाॅस्पिटल की स्पेशल एजुकेटर व चाइल्ड साइकोलाॅजिस्ट डाॅ. रूमिका मित्रा के अनुसार, बच्चे में रीडिंग हैबिट तभी डेवलप की जा सकती है, जब उसकी शुरूआत बेस लाइन से की जाए। अर्थात आप बच्चे की रीडिंग हैबिट की शुरूआत उन चीजों से करें, जो उसे पहले से आती हैं। अंग्रेजी लेखक व लोक प्रचारक जाॅर्ज ओरवेल ने भी एकबार कहा था कि सबसे अच्छी किताबें वे हैं जो आपको वो बताएं जो आप पहले से जानते हों। तो क्यों न यह फंडा बच्चों के साथ भी अपनाया जाए। मसलन, अगर बच्चा रंगों के नाम को पहचानता है या फिर उसे अक्षर या नंबरों का थोड़ा बहुत ज्ञान है तो उसी को आधार बनाकर बच्चे को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करें। 

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पुरानी तकनीक को छोडे़ं पीछे

यह बेहद दुखद है कि आज भी भारतीय घरों में बच्चों को पढ़ाने के लिए पुरानी तकनीक का ही इस्तेमाल किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, बच्चों को महज किताब पढ़ने के लिए दे दी जाती हैं या फिर जब बच्चा कुछ नई चीज पढ़ता है तो उसे याद करने के लिए बिठा दिया जाता है। यह तरीका वास्तव मंे बच्चों के लिए बेहद बोरिंग होता है। जिन घरों में इस तकनीक को अपनाया जाता है, वहां पर बच्चों को किताबें एक बोझ के समान लगती हैं। इतना ही नहीं, वह ताउम्र इनसे दूरी बनाकर रखते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि आप इस पुरानी तकनीक को आज ही अलविदा कह दें। 

बनें थोड़े क्रिएटिव

अमेरिकी पुस्तक संपादक और सोशलाइट जैकी कैनेडी ने कहा था कि आपके बच्चे की दुनिया को विस्तृत करने के लिए बहुत से छोटे बड़े तरीके हैं, पुस्तक-प्रेम उनमें से सर्वोत्तम है। लेकिन वास्तव में बच्चों के मन में यह प्रेम जागृत करने के लिए सबसे पहले पैरेंट्स का भी थोड़ा क्रिएटिव होना बेहद आवश्यक है। लाइफ व पैरेंटिग कोच सलोनी सिंह कहती हैं कि बच्चे की पढ़ने में रूचि पैदा करने के लिए उनके कमरे में एक छोटी सी बुक शेल्फ को सजाकर रखें और उसमें कुछ बेहद अच्छी किताबें रखे, जिसे पढ़ने में बच्चे को मजा आए। इसके अतिरिक्त रात को सोने से पहले रोज बच्चे के साथ बैठकर स्टोरी बुक पढ़ने की आदत डालें या फिर अपने बच्चे के इंटरस्ट को देखते हुए आप कुछ ऐसा करें,, जिससे उसका रूझान किताबों की तरफ बढ़ें।

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इसका भी रखें ध्यान

  • कभी भी बच्चे पर पढ़ने के लिए दबाव न डालें। अगर बच्चा पढ़ना नहीं चाहता तो उससे किसी तरह की जबरदस्ती न करें। ऐसा करने से वह किताबों से दूर भागेगा।
  • कभी भी बच्चे के पढ़ने की शुरूआत कोर्स बुक से न करें। इससे उन्हें लगेगा कि जैसे उन्हें पढ़ाई करवाने के लिए ही बिठाया गया है। बेहतर होगा कि आप उनके इंटरस्ट को देखते हुए कुछ किताबें खरीदें और उनके साथ मजे लेकर पढ़ें।
  • पढ़ने की हैबिट बच्चे में कम उम्र से ही डालें। आपको शायद पता न हो लेकिन जब बच्चे बोलना भी नहीं जानते, तब भी किताबों को देखकर व उसे छूकर उसका आनंद उठाते हैं।
  • पढ़ने को एक नियम बनाएं। जिस तरह आप हर रोज नहाते व खाते हैं, ठीक उसी तरह प्रतिदिन पढ़ें। अगर बच्चा नहीं भी पढ़ रहा है तो आप उसके सामने बैठकर हर दिन कुछ न कुछ अवश्य पढ़ें। इससे उसकी उत्सुकता भी उस ओर बढे़गी।

मिताली जैन

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