बर्नआउट सिंड्रोम बन सकता है दिल की बीमारियों का कारण, अध्‍ययन में हुआ खुलासा

हाल में हुए शोध के अनुसार बर्नआउट सिंड्रोम दिल की बीमारियों का कारण बन सकता है। 

Sheetal Bisht
Written by: Sheetal BishtPublished at: Jan 16, 2020Updated at: Jan 16, 2020
बर्नआउट सिंड्रोम बन सकता है दिल की बीमारियों का कारण, अध्‍ययन में हुआ खुलासा

बर्नआउट सिंड्रोम, जो लोगों को अत्यधिक थका हुआ, ऊर्जा से रहित और चिड़चिड़ा महसूस कराता है। यह आपके लिए एक संभावित रूप से दिल की बीमारियों से जुड़ा है। हाल में यूरोपियन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि बर्नआउट सिंड्रोम से दिल की धड़कन में गड़बड़ी की शुरुआत हो सकती है। 

यूनिवर्सिटी ऑफ़ साउथर्न कैलिफ़ोर्निया के डा. प्रवीन गर्ग ने कहा, बहुत ज्‍यादा थकान, जिसे आमतौर पर बर्नआउट सिंड्रोम के रूप में जाना जाता है। जो आमतौर पर अधिक काम या लंबे समय तक तनाव के कारण होता है। यह डिप्रेशन से अलग है, जो कि आपके मूड को खराब या चिड़चिड़ा, अपराधबोध और खराब आत्मसम्मान की विशेषता है। हमारे अध्ययन के नतीजे उन नुकसानों को और स्थापित करते हैं, जो उन लोगों में उत्पन्न हो सकते हैं, जो कि बहुत अधिक थकावट से पीड़ित हैं।

Burnout Syndrome linked Cardiac Disease

आट्रियल फिब्रिलेशन एक अनियमित हृदय गति की समस्‍या है, जो कि सबसे आम रूप है। यह दिल के दौरे, स्ट्रोक और मृत्यु के जोखिम को बढ़ाता है। लेकिन फिर भी, आट्रियल फिब्रिलेशन किस कारण से होता है, इसे पूरी तरह से समझा नहीं गया है।

मनोवैज्ञानिक परेशानियां यानि साइकलॉजिकल डिस्‍ट्रेस को आट्रियल फिब्रिलेशन के लिए एक जोखिम कारक के रूप में सुझाया गया है। लेकिन पिछले अध्ययनों में कुछ मिश्रित परिणाम दिखाई दिए। इसके अलावा, अब तक, बर्नआउट सिंड्रोम और आट्रियल फिब्रिलेशन के बीच विशिष्ट संबंध का मूल्यांकन नहीं किया गया था।

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इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बर्नआउट सिंड्रोम की थकावट, क्रोध, एंटीडिप्रेसेंट का उपयोग और खराब सामाजिक सर्पोट की उपस्थिति के लिए 11,000 से अधिक व्यक्तियों का सर्वेक्षण किया। तब उन्होंने आट्रियल फिब्रिलेशन के विकास के लिए लगभग 25 वर्षों की अवधि में उनको फॉलोअप किया। जिसमें कि बहुत अधिक थकावट यानि बर्नआउट सिंड्रोम के हाई लेवल वाले लोगों में कम या बिलकुल थकान महसूस न करने वाले लोगों की तुलना में आट्रियल फिब्रिलेशन विकसित होने का 20% अधिक जोखिम था। 

हालांकि, इन दोनों के संबंध को बेहतर ढंग से समझने के लिए आगे के अध्ययन की आवश्यकता है। 

Heart Health

डॉ. गर्ग ने कहा, "बहुत अधिक थकावट सूजन और शरीर के शारीरिक तनाव की प्रतिक्रिया के बढ़ सक्रियता के साथ जुड़ा हुआ है। " उन्होंने कहा। "जब ये दोनों चीजें लंबे समय तक रहती हैं, तो यह हृदय के ऊतकों पर गंभीर और हानिकारक प्रभाव डाल सकती हैं, जो अंततः इस आट्रियल फिब्रिलेशन या दिल की बीमारियों के विकास को जन्म दे सकती हैं।"

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क्रोध या खराब सामाजिक सर्पोट और आट्रियल फिब्रिलेशन के विकास के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया। 

डॉ. गर्ग ने कहा, "क्रोध और सामाजिक समर्थन के लिए निष्कर्ष पूर्व अनुसंधान के अनुरूप हैं लेकिन पिछले दो अध्ययनों में एंटीडिप्रेसेंट का उपयोग और आट्रियल फिब्रिलेशन के बढ़ते जोखिम के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध पाया गया। जाहिर है, अभी और काम करने की जरूरत है।"

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