ब्रेस्ट कैंसर में काफी फायदेमंद हैं ये 5 योगासन, नहीं बनने देते इसे जेनेटिक रोग

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 24, 2018
Quick Bites

  • आजकल कम उम्र की लड़कियां भी इस रोग की शिकार हो रही हैं। 
  • इसका मुख्य कारण है ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरुकता की कमी।
  • योग के जरिये महिलाओं में इस रोग को काफी कम किया गया है।

ब्रेस्ट कैंसर एक ऐसी खतरनाक बीमारी है जिसका इलाज तो मुश्किल है ही साथ ही यह समाज में तेजी से अपने पैर पसार रहा है। वैसे तो इसका खतरा 40 साल की उम्र के बाद होता है लेकिन आजकल कम उम्र की लड़कियां भी इस रोग की शिकार हो रही हैं। आकड़ों की मानें तो भारत में फिलहाल 22 महिलाओं में से एक महिला ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित है। इसका मुख्य कारण है ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरुकता की कमी। लोगों को इसके लक्षणों के बारे में पता नहीं होता है जिसकी वजह से वे इसकी जांच नहीं करवाते और ब्रेस्ट कैंसर बढ़ता जाता है। अगर ब्रेस्ट कैंसर का पता शुरुआती अवस्था में चल जाए तो इसका इलाज करना काफी आसान होता है लेकिन एडवांस स्टेज में पहुंचने पर यह काफी खतरनाक हो सकता है। आज हम आपको इससे निपटने के लिए कुछ योगासन बता रहे हैं। 

योग स्तन कैंसर के लिए विकिरण चिकित्सा के दौर से गुजर रहीं महिलाओं के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करता है। योग के जरिये महिलाओं ने थकान कम करने के अलावा, अपने समग्र स्‍वास्‍थ्‍य और शारीरिक कामकाज में सुधार के साथ ही तनाव हार्मोंन कोर्टिसोल के कम स्‍तर का भी अनुभव किया। इसके बाद के लाभ महत्‍वपूर्ण हैं क्‍योंकि दिन भर में उच्‍च तनाव हार्मोन का स्तर स्तन कैंसर के परिणामों को खराब कर सकता है।

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मन और शरीर अभ्‍यास का संयोजन योग का हिस्‍सा है और स्‍ट्रेचिंग के लाभों से परे, योग कैंसर के इलाज के बाद रोगियों के जीवन से जुडें मनोसामजिक और शारीरिक परेशानी के प्रबंधन में मदद करने की जबरदस्‍त क्षमता होती है। साथ ही कोहने के यह भी कहा कि योग के अभ्‍यास से इलाज के बाद कैंसर से ग्रस्‍त मरीजों को लाभ होता है। कुछ महीनों तक नियमित योगाभ्यास से स्तन कैंसर से पीड़ि‍त महिलाओं को काफी लाभ मिल सकता है। यही नहीं यह थकान और सूजन से पीड़ितों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। यह बहुत महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि सूजन को गठिया, मधुमेह, हृदय रोग, कैंसर सहित कई बीमारियों से जुड़ा हुआ पाया जाता है।

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निष्कर्ष

स्तन कैंसर से ग्रस्त मरीजों को सांस लेने, रखरखाव, और मन की शांति बढ़ाने के लिए योग पर विचार करना चाहिए। योग स्तन कैंसर के उपचार के बाद और दौरान जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में बहुत सहायक हो सकता है। इसके अलावा योग के दुष्प्रभाव नहीं होते है। आप योग के बारे में अपने डॉक्टर से परामर्श कर, नियमित रूप योग को शुरू कर सकती हैं।

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