प्रसव के बाद होता है पीठ में दर्द, तो ये करें उपचार

बच्चे के जन्म के बाद आने वाली कमजोरी के शरीर के अन्य केमिकल और हार्मोनल बदलाव से मिलने पर पीठ दर्द की समस्‍या होती है। आइये इस आर्टिकल के माध्‍यम से जानें कि डिलिवरी के बाद पीठ दर्द का इलाज कैसे किया जा सकता है।

Pooja Sinha
गर्भावस्‍था Written by: Pooja SinhaPublished at: May 17, 2017
प्रसव के बाद होता है पीठ में दर्द, तो ये करें उपचार

सभी विवाहित महिलाओं की इच्छा शिशु को जन्म देना और संतान का सुख पाना होती है, लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि गर्भावस्‍था के साथ डिलिवरी के बाद भी एक महिला को कई कठिनाइयों से गुजारना पड़ता है। गर्भावस्था के दौरान शरीर में हार्मोन परिवर्तन के कारण कई बदलाव होते हैं, लेकिन प्रसव के बाद भी शरीर में कई प्रकार के बदलाव आते हैं। जिसमें से एक पीठ दर्द भी है। गर्भावस्था के बाद पीठ का दर्द नई माताओं के साथ आम बात है।

गर्भावस्था के बाद होने वाला पीठ दर्द एक आम समस्या है। बच्चे के जन्म के बाद आने वाली कमजोरी के शरीर के अन्य केमिकल और हार्मोनल बदलाव से मिलने पर पीठ दर्द की समस्‍या होती है। ये बदलाव, तनाव व शिशु की देखभाल के कारण होते हैं। जिसे हम ‘स्ट्रेस’ के नाम से भी जानते हैं। आइये इस आर्टिकल के माध्‍यम से जानें कि डिलिवरी के बाद पीठ दर्द का इलाज कैसे किया जा सकता है।

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नई मां और पीठ दर्द

  • हाल ही में बच्‍चे को जन्‍म देने वाली महिला में बहुत अधिक मात्रा में होने वाल शारीरिक परिवर्तन के कारण पीठ के निचले हिस्‍से में दर्द होने लगता है।
  • गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय बड़ा हो जाता है और पेट की मांसपेशियों में तनाव के कारण वह कमजोर हो जाती है जिससे नसों पर दबाव पड़ता हैं और पीठ के दर्द होने लगता है।
  • गर्भावस्था में वजन बढ़ने से मांसपेशियों और जोड़ों पर भार पड़ता है और उन्‍हें अधिक कार्य भी करना पड़ता है, जिसके चलते पीठ के दर्द की शुरूआत होती है।
  • गर्भावस्था में हार्मोनल परिवर्तन के कारण हड्डियों और लिगमेंट लचीली, मुलायम या ढीला हो जाने से पेल्विक बोन में कम स्थिरता महसूस करते हैं। इसके कारण आपका चलना, खड़े रहना, लम्बे समय तक खड़े रहना या बैठना और किसी चीज को उठाने के कारण पीठ में दर्द होने लगता है।

 

प्रसव के बाद पीठ दर्द का इलाज

  • नवजात को दूध पिलाते समय पीठ को सीधा रख कर सही तरीके से बैठें और पीठ के पीछे कोई छोटा तकिया रख लें। और सुनिश्चित करें की आपके पैर सीधे जमीन तक पहुंच रहे है या नहीं।  
  • इस पीठ दर्द से बचने के लिए शरीर के ऊपरी भाग की मांसपेशियों को व्यायाम के माध्यम से दुबारा प्रशिक्षित करने की आवश्यकता होती है ताकि वे मजबूत होकर रीढ़ की हड्डी को स्थिरता प्रदान कर सकें। इसके लिए भी हल्का व्यायाम करें।
  • महिलाओं को पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए हमेशा ऐसी चीजें खाएं जिनमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फाइबर भरपूर मात्रा हो।  
  • बच्‍चे को नहलाने या कोई चीज जमीन से उठाने के दौरान इस बात का ख्‍याल रखें कि जब भी आप झुके तो घुटनों के बल झुके और पीठ सधे रखते हुए झुके। एकदम झटके से न बैठे, न उठें। क्‍योंकि इससे आपकी पीठ पर जोर पड़ता है।  
  • दोनों पैरों पर बराबर वजन रखते हुए खड़े हों। यह नहीं कि एक पैर पर आपके पूरे शरीर का बोझ हो।
  • मालिश करने से भी थकी और पीड़ाग्रस्त मांसपेशियों को आराम मिलता है। पीठ के निचले हिस्से और रीढ़ की हड्डी के साथ-साथ चलने वाली मांसपेशियों पर कोमलतापूर्वक मालिश करने से भी राहत मिलती है।

इन उपायों को अपनाकर आप प्रसव के बाद होने वाले पीठ के दर्द से राहत पा सकते हैं।

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