स्‍तनपान से बच्‍चे को मिलता है गुड बैक्‍टीरिया

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 22, 2013
Quick Bites

  • मां के दूध में बच्‍चे के लिए बेहद जरूरी 'अच्‍छा' बैक्‍टीरिया मौजूद होता है।
  • बैक्‍टीरिया बनाता है, बच्‍चे की पाचन शक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत।
  • क्‍लोनिक स्‍वास्‍थ्‍य और मल प्रक्रिया को सुचारू रूप से कार्य करने में मदद करता है बैक्‍टीरिया।
  • मां का दूध बच्‍चे के पेट में जरूरी पोषण तत्‍व पहुंचाता है।

स्‍तनपान कराती महिला मां का दूध नवजात के लिए अमृत समान माना जाता है। अब वैज्ञानिकों ने इसके एक और लाभ का पता लगाया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मां के दूध में बच्‍चे के लिए बेहद जरूरी 'अच्‍छे' बैक्‍टीरिया मौजूद होता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह बैक्‍टीरिया बच्‍चे की पाचन-क्रिया को दुरुस्‍त रखता है।

 

इस शोध में कहा गया है कि बच्‍चों की पेट और प्रतिरोधक क्षमता के लिए मां का दूध बहुत फायदेमंद होता है। इस शोध में यह बताया गया है कि मां के दूध में मौजूद अच्‍छा बैक्‍टीरिया बच्‍चे की पाचन शक्ति को ऐसा बना देता है कि बाद में उसे फॉर्मूला मिल्‍क और आहार पचाने में आसानी होती है।

 

स्विटरजरलैंड के ज्‍यूरिक स्थित इंस्‍टीट्यूट ऑफ फूड, न्‍यूट्रीशियन एंड हेल्‍थ में कार्यरत प्रोफेसर क्रिस्‍टोफी लेक्‍रॉक्‍स का कहना है, ' हम यह जानकर हैरान हैं कि यह बैक्‍टीरिया वास्‍तव में मां के पेट से उसके दूध तक पहुंचता है और फिर उसके बाद वह बच्‍चे तक पहुंचता है।

 

लेक्‍रॉक्‍स का कहना है कि मां और बच्‍चे दोनों के पेट में इस बैक्‍टीरिया का मौजूद होना बच्‍चे की पाचन शक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए बहुत जरूरी है।

 

शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि मां के दूध में ऐसे कई अच्‍छे बैक्‍टीरिया पाए जाते हैं जो बच्‍चे के क्‍लोनिक स्‍वास्‍थ्‍य और मल प्रक्रिया को सुचारू रूप से कार्य करने में मदद करते हैं।

 

शोधकर्ताओं का कहना है कि मां का दूध बच्‍चे के पेट में जरूरी पोषण तो पहुंचाता ही है साथ ही यह उसे आंतों को भी अच्‍छी तरह से काम करने में सहायता प्रदान करता है। हालांकि शोधकर्ताओं में अभी तक इस बात को लेकर संशय है कि आखिर यह बैक्‍टीरिया मां के पेट से उसके दूध तक कैसे पहुंचता है। लेकिन इस बैक्‍टीरिया की उपयोगिता को लेकर वे काफी उत्‍साहित हैं।

 

शोधकर्ताओं को उम्‍मीद है कि आने वाले समय में यह प्रक्रिया पूरी तरह साफ हो जाएगी। शोधकर्ता इस बात को लेकर भी आशांवित हैं कि इससे उन्‍हें उपयोगी बैक्‍टीरिया के बारे में अधिक स्‍पष्‍ट जानकारी मिल पाएगी। यह स्‍टडी इनवायरमेंटल माइक्रोबॉयोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुई है।



 

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