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सर्वाइकल (गर्दन में दर्द) होने पर अपनाएं ये 6 आयुर्वेदिक उपाय, दर्द से मिलेगा आराम

सर्वाइकल दर्द कभी-कभी असहनीय हो सकता है। अगर आपको भी इसका दर्द रहता है, तो आप कुछ आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Remedies) आजमा सकते हैं। 

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: Apr 13, 2022Updated at: Apr 13, 2022
सर्वाइकल (गर्दन में दर्द) होने पर अपनाएं ये 6 आयुर्वेदिक उपाय, दर्द से मिलेगा आराम

Ayurvedic Remedies for Cervical Spondylosis: रीढ़ की हड्डी के जोड़ों और डिस्क में समस्या होने पर सर्वाइकल का दर्द उठता है। बुजुर्गों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। लेकिन सर्वाइकल का दर्द आजकल काफी सामान्य हो चुका है, अब बच्चे तक इस दर्द की शिकायत करते हैं। सर्वाइकल पेन सर्वाइकल स्पोंडिलोलिसिस या ऑस्टियोअर्थराइटिस के कारण होने वाला दर्द है। इस स्थिति में उन हड्डियों, डिस्क या जोड़ों में बदलाव होता है, जो गर्दन से जुड़े होते हैं। सर्वाइकल के दर्द से आराम पाने के लिए लोग तरह-तरह की एक्सरसाइज, योग करते हैं। साथ ही दर्दनिवारक दवाइयों का भी सेवन करते हैं। लेकिन आप चाहें तो कुछ आयुर्वेदिक उपायों की मदद से भी सर्वाइकल के दर्द से आराम पा सकते हैं। चलिए रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल, सिरसा के आयुर्वेदाचार्य श्रेया शर्मा से विस्तार से जानते हैं सर्वाइकल पेन के लिए कौन-कौन से आयुर्वेदिक उपाय आजमाने चाहिए। 

castor oil

1. अरंडी का तेल (Castor Oil for Cervical Spondylosis)

अरंडी का तेल मांसपेशियों, हड्डियों को मजबूत बनाने में काफी फायदेमंद होता है। सर्वाइकल के दर्द में भी अरंडी का तेल लगाना लाभकारी होता है। गर्दन में दर्द होने पर आप दिन में दो बार अरंडी के तेल से गर्दन की मालिश करें। सर्वाइकल दर्द में आपको रात के समय अरंडी के तेल (Castor Oil for Neck Pain) से मालिश करनी चाहिए। इससे विषाक्त पदार्थ साफ होते हैं। अरंडी का तेल वात दोष को भी संतुलित करने में मदद करता है। 

2. तिल का तेल (Sesame Oil for Cervical Spondylosis)

तिल का तेल पुराने से पुराने जोड़ों की समस्याओं को दूर करने का एक बेहतरीन आयुर्वेदिक उपाय है। आयुर्वेद में तिल के तेल को प्रमुख स्थान में रखा गया है। सर्वाइकल के दर्द से छुटकारा पाने के लिए तिल का तेल सबसे बेहतरीन (Which Oil is Best for Cervical Pain) माना गया है। तिल का तेल जोड़ों, मांसपेशियों के लिए काफी फायदेमंद होता है। तिल के तेल से जोड़ों को पोषण मिलता है, सर्वाइकल के दर्द में भी आराम मिलता है। तिल का तेल हल्का होता है और ऊतकों में आसानी से प्रवेश कर जाता है। 

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3. लहसुन (Garlic for Cervical)

लहसुन सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। लहसुन की तासीर बेहद गर्म होती है, यह वात दोष को संतुलित करने में मदद करता है। रोज सुबह खाली पेट कच्ची लहसुन की कलियों को पानी के साथ खाने से सर्वाइकल के दर्द में आराम मिलता है। आप चाहें तो लहसुन के तेल से प्रभावित स्थान पर मसाज भी कर सकते हैं। इसके लिए 3-4 लहसुन की कलियों को कुचल लें, इसमें तेल में गर्म करें। अब इस तैयार तेल से गर्दन की मालिश करें। इसके अलावा आप अदरक (Ginger for Neck Pain) के सेवन से भी गर्दन के दर्द से आराम पा सकते हैं। 

4. योगासन

आयुर्वेद में योग का काफी महत्व है। योग करने से कई तरह की समस्याओं में आराम मिलता है। योगासन शरीर के दर्द में आराम देता है, मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत भी बनाता है। सर्वाइकल दर्द में भी आप हल्के योगासन कर सकते हैं। इससे गर्दन और कंधों के आसपास का दर्द और जकड़न कम होने में मदद मिलती है।

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5. अश्वगंधा (Ashwagandha for Cervical Spondylosis)

आयुर्वेद में अश्वगंधा का उपयोग तरह-तरह की समस्याओं में किया जाता है। अश्वगंधा इम्यूनिटी बढ़ाता है, इसमें सूजन रोधी गुण भी होते हैं। अश्वगंधा तंत्रिका, श्वसन और प्रजनन प्रणाली पर कार्य करता है। मांसपेशियों की क्षति, कमजोरी में अश्वगंधा कार्य करता है। अगर आप सर्वाइकल के दर्द से परेशान हैं, तो अश्वगंधा चूर्ण का सेवन कर सकते हैं। आप अश्वगंधा का सेवन पाउडर, कैप्सूल आदि के रूप में ले सकते हैं। 

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6. बला

बला का पौधा काफी गुणकारी होता है, इसमें कई औषधीय गुण होते हैं। जो तरह-तरह की समस्याओं के इलाज में लाभकारी होते हैं। बला की छाल का काढ़ा मांसपेशियों की जकड़न दूर करता है। बला की जड़ के काढ़े में नमक डालकर पीने से बांह की जकड़न दूर होती है। 2 ग्राम बला की जड़ के साथ 2 ग्राम नीम की छाल मिलाकर काढ़ा पानी से सर्वाइकल के दर्द में आराम मिलता है। सर्वाइकल दर्द होने पर आप सुबह-शाम इसका काढ़ा पी सकते हैं।

अगर आप भी सर्वाइकल के दर्द से परेशान हैं, तो इन उपायों को आजमाकर देख सकते हैं। इन आयुर्वेदिक उपायों को अपनाकर वात दोष शांत करने में मदद मिलती है, दर्द में भी आराम मिलता है। 

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