थायराइड के लिए लाभदायक है अश्वगंधा का सेवन

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 06, 2015
Quick Bites

  • थॉयराइड ग्रंथि थायरॉक्सिन हॉर्मोन का निर्माण करती है।
  • ये दो प्रकार हाइपोथायरायडिज्म और हायपरथायरोडिज्म होते है
  • अश्वगंधा थॉयराइड का प्राकृतिक उपचार माना जाता है।
  • इसके प्रयोग से पहले चिकित्सक से सलाह जरूर लें।

थायरॉयड, गर्दन में स्थित एक ग्रंथि होती हैं और वह थायरोक्सिन नाम के हार्मोन का उत्पादन करती हैं, जो शरीर की चयापचय प्रक्रिया को विनियमित करने में मदद करता है। थायरॉइड ग्रंथि के सही तरीके से काम करने से आशय है कि शरीर का मेटाबॉलिज्म यानी भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया भी सही तरीके से काम कर रही है। पर जैसे ही थायरॉइड हार्मोन घटना या बढ़ना शुरू होता है तो मानव जीवन के लिए परेशानियां शुरू हो जाती हैं। इस लेख से जाने कैसे थायराइड की समस्या का इलाज किया जा सकता है।

thyroid in Hindi

थायरॉयड के प्रकार

थायरोक्सिन हार्मोन (हाइपोथायरायडिज्म) की कमी से बच्चों में बौनापन और वयस्कों में सबकटॅनेअस चरबी बढ़ जाती हैं।  और अतिरिक्त (हायपरथायरोडिज्म) हार्मोन गण्डमाला का कारण बनता हैं। थायरोक्सिन की निष्क्रियता के कारण हाइपोथायरायडिज्म हो सकता हैं, आयोडीन की कमी या थायराइड विफलता के कारण थकान, सुस्ती और हार्मोनल असंतुलन होता है। अगर अनुपचारित छोड़ दिया जाये,  तो यह मायक्झोएडेमा का कारण बन सकती हैं, जिसमें त्वचा और ऊतकों में सूजन होती हैं। आयुर्वेदिक उपचार में इस्तेमाल की जाने वाली अश्वगंधा, जड़ी बूटी इस रोग के दोनों रुपों, हायपर और हायपोथायरॉयड के लिए जवाब साबित हो सकती हैं।

Aswgandha in Hindi

अश्वगंधा  के फायदे

अश्वगंधा एक प्राकृतिक औषधि है, जो अपने शक्तिवर्धक गुणों के लिए जानी जाती है। आप चाहे तो इसकी पत्तियों को पीस कर या जड़ों को उबाल कर उपयोग में ला सकते हैं। अश्वगंधा का सेवन करने से थाइरॉइड की अनियमितता पर नियंत्रण होता है। इसके लिए 200 से 1200 मिलीग्राम अश्वगंधा चूर्ण को चाय के साथ मिला कर लें। चाहें तो इसे स्वादिष्ट बनाने के लिए तुलसी का प्रयोग भी कर सकते हैं। हायपोथायरायडिज्म के लिए आयुर्वेदिक इलाज में महायोगराज गुग्गुलु और अश्वगंधा  के साथ  भी इलाज किया जाता हैं। अश्वगंधा के नियमित सेवन से शरीर में भरपूर ऊर्जा बनी रहती है साथ ही कार्यक्षमता में भी वृद्धि होती है। साथ ही यह शरीर के अंदर का हार्मोन इंबैलेंस भी संतुलित कर देता है। यह टेस्टोस्टेरोन और एण्ड्रोजन हार्मोन को भी बढाता है।

किसी भी मामले में, अगर आप अश्वगंधा का उपयोग शुरू करना चाहते हैं, तो अपने परिवार के चिकित्सक के साथ पहले इसके बारे में चर्चा करना एक अच्छा विचार हैं।

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