बच्चों पर ज्यादा निगरानी रखना सही है या गलत? बता रही हैं एक्सपर्ट

बच्चों पर निगरानी रखना या उन पर रोक टोक लगाना उनके भविष्य के लिए सही नहीं है। ऐसा करने से उनके व्यक्तिगत विकास पर भी प्रभाव पड़ता है।

Garima Garg
Written by: Garima GargUpdated at: Aug 09, 2021 16:01 IST
बच्चों पर ज्यादा निगरानी रखना सही है या गलत? बता रही हैं एक्सपर्ट

अक्सर माता-पिता बच्चों को लेकर काफी चिंतित रहते हैं वह हर वक्तयह सोचते हैं कि कहीं उनका बच्चा कुछ गलत तो नहीं कर रहा है। कहीं उसकी संगत बुरी तो नहीं। कहीं उसकी आदत बिगड़ ना जाए। वैसे तो माता-पिता का इस तरीके से चिंतित रहना संभावित है। लेकिन ज्यादा रोक-टोक बच्चे के व्यक्तित्व और उनके विकास को बढ़ने से रोक सकती है। बता दें कि ज्यादा निगरानी ने केवल उन्हें बिगाड़ सकती है बल्कि ऐसा करने से बच्चे जिद्दी बन सकते हैं। आज का हमारा लेख भी इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि बच्चों पर ज्यादा निगरानी उनके और उनके भविष्य के लिए किस प्रकार असुरक्षित है? इसके लिए हमने गेटवे ऑफ हीलिंग साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी (Dr. Chandni Tugnait, M.D (A.M.) Psychotherapist, Lifestyle Coach & Healer) से भी बात की है। पढ़ते हैं आगे...

 

1 - बच्चों को दें सीखने का मौका

माता-पिता किसी बच्चे पर ज्यादा रोक-टोक लगाते हैं तो या उसके आसपास ज्यादा संरक्षित माहौल होता है तो ऐसा करने से बच्चे का मनोबल कमजोर होने लगता है। ऐसे में ना तो बच्चा कोई निर्णय ले पाता और ना ही भविष्य में आत्मविश्वास के साथ खड़ा हो पाता। ऐसे बच्चों में आत्मविश्वास की कमी हो सकती है। माता-पिता की जिम्मेदारी है कि बच्चों को आगे बढ़ने का मौका दें। साथ ही उन्हें खुद सीखने के लिए प्रेरित करें। अगर बच्चा किसी काम को गलत कर रहा है तो उसका परिणाम बच्चे के लिए एक सीख बन सकता है, जिससे वे आगे चलकर वह गलती दोबारा ना दोहराए। वहीं अगर आप टोकेंगे या निगरानी करेंगे तो हो सकता है कि बच्चा उस गलती को बार-बार करे।

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2 - बदलते वक्त के साथ बदलें

माता पता के बचपन का समय और उनके बच्चों के बचपन के समय में अंतर है। यह बात माता-पिता को समझनी चाहिए। साथ ही पेरेंट्स को यह भी जानना चाहिए कि उनके समय में जो तकनीक नहीं थी बच्चों के समय में वे नई तकनीक मौजूद हैं। ऐसे में लैपटॉप या ऑनलाइन पढ़ाई के दौर को स्वीकार करें। साथ ही पढ़ाई के दौरान एक बार बच्चे को देखना ठीक है लेकिन उसके अस-पास रहना ना केवन बच्चे के ध्यान को भटका सकता है बल्कि ऐसा करने से उनका मनोबल भी कमजोर हो सकता है। इससे अलग बच्चों पर चिल्लाने, डांटने या उन्हें उन पर निगरानी रखने से वह बिगड़ सकते हैं। ऐसे में आप अगर बच्चों पर निगरानी रखना भी चाहते हैं तो वह तरीका बदलकर और बच्चों को बिना महसूस कराएं भी इस काम को कर सकते हैं।

3 - थोड़ी सी आजादी है जरूरी

कुछ माता-पिता ऐसे होते हैं जो दूसरे बच्चों से अपने बच्चों की तुलना करते हुए बच्चों को भाषण देते हैं। लेकिन यह तरीका गलत होता है। एख भी एक प्रकार की निगरानी करना ही है। ऐसे करने से बच्चों का मनोबल टूट सकता है। बता दें कि जब भी आप बच्चों से बात करें तो नकारात्मक बातों का प्रयोग ना करें और बच्चों को छोटी-छोटी जिम्मेदारियां भी दें। ऐसा करने से वह अपना काम न केवल सही ढंग से करना सीखेंगे बल्कि गलतियों से उन्होंने आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा मिलेगी। ध्यान दें कि गलत शब्दों का प्रयोग बच्चों के व्यक्तित्व पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

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4 - परवरिश का तरीका हो अलग

माता-पिता को अपने परवरिश के तरीके को बदलना जरूरी है। पहले के बच्चे मोबाइल से दूर किताब में अपना समय लगाते थे जबकि अब बच्चों की किताब मोबाइल में ही है। ऐसे में मोबाइल के साथ उनका तालमेल और बिठाना माता-पिता की जिम्मेदारी है। लेकिन कुछ माता-पिता मोबाइल पर बच्चों के समय बिताने पर चिल्लाना शुरू कर देते हैं, जिससे उनका मनोबल टूटता है और वो उदास हो जाते हैं। ऐसे में माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वह धैर्य बनाएं और उनकी गलती के पीछे का कारण जानें।

5 - कुछ जरूरी बातें-

  • बच्चों पर अपनी अपेक्षा थोपने की कोशिश ना करें।
  • हर बार बच्चों पर निगरानी सही नहीं है। ऐसे में उन्हें थोड़ी सी आजादी देनी जरूरी है।
  • बच्चों को रचनात्मक बनाने के लिए उनसे उनकी रुचि से जुड़े काम करवाएं।
  • कुछ वक्त के लिए बच्चे को अकेला भी छोड़े।

नोट - ऊपर बताएं गए बिंदुओं से पता चलता है कि बच्चों पर निगरानी रखना उनके भविष्य के लिए खतरनाक हो सकता है। ऐसे में माता-पिता बच्चों पर निगरानी ना रखें। उनके साथ दोस्ती जैसा व्यवहार रखें और उन्हें थोड़ी सी आजादी दें।

इस लेख में इस्तेमाल की जानें वाली फोटोज़ Freepik से ली गई हैं।

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