सावधान हो जाएं, ये बीमारियां बन सकती हैं ब्रेन हेम्रेज का कारण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 03, 2017
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Quick Bites

  • किसी भी बीमारी का सही समय पर पहचान और उपचार होना चाहिए।
  • कुछ बीमारियां बिगड़ने पर एक दिन ब्रेन हेम्रेज का कारण बन सकती हैं।
  • टाइप-1 डायबिटीज में शरीर के अंदर इंसुलिन बनना बंद हो जाता है।

बीमारी जो भी हो, उसकी सही समय पर पहचान और उपचार होना चाहिए। लेकिन कई बीमारियां ऐसी होती हैं, जो अगर सही समय पर पहचान या उपचारित ना की जाएं तो जानलेवा साबित हो सकती हैं। ऐसी ही कुछ बीमारियां हैं जो दबे पाओं शरीर में घर कर लेती हैं और एक दिन ब्रेन हेम्रेज का कारण बन जाती हैं। इन्हें साइलेंट किलर डिजीज बी कहा जाता है। इन बीमारियों से हार्ट अटैक, ब्रेन हेम्रेज के साथ अंधे होने की तक की आशंका रहती है। तो चलिये जानें जानिए कौन सी हैं ये साइलेंट किलर डिजीज -

डायबिटीज

आमतौर पर यह बीमारी किसी मनुष्य को दो रूपों में परेशान करती है, टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज़। टाइप-1 डायबिटीज में शरीर के अंदर इंसुलिन बनना बंद हो जाता है। वहीं टाइप-2 डायबिटीज में शरीर बने हुए इंसुलिन का ठीक से प्रयोग कर पाने में असफल हो जाता है। लगभग 90 प्रतिशत लोग टाइप-2 डायबिटीज के शिकार होते हैं।

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प्रमुख कारण व लक्षण

डायबिटीज़ के मुख्य कारणों में आनुवांशिक कारण, शारीरिक श्रम की कमी, अधिक कार्बोहाइड्रेटयुक्त भोजन का सेवन, अधिकांश समय घर के भीतर ही रहना आदि हैं। इसके लक्षणों में तेजी से घटता वजन, थकान, अत्यधिक प्यास लगना, घाव जल्दी न भरना, पैरों में झनझनाहट होना, आंखों में धुंधलापन आदि शामिल होते हैं।

क्या हैं खतरे

इस बीमारी के गंभीर होने की स्थिति में आंखों में अंधापन, दिमाग को लकवा, किडनी फेल्यॉर, आंखों में अंधापन, हृदय संबंधी बीमारियां आदि का खतरा होता है।

 

Diseases Can Lead to Brain Hemorrhage in Hindi

 

रोग के मुताबिक होता इलाज

मरीज के रोग की स्थिति व गंभीरता के हिसाब उसे दवाएं व इंसुलिन के इंजेक्शन दिए जाते हैं। साथ ही जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव की सलाह दी जाती है।

क्या है बचाव

40 साल की आयु हो जाने के बाद समय-समय पर चिकित्सा जांच अवश्य कराएं। संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करें व टहलें। नियमित व्यायाम जरूरी डायबिटीज से बचने व इससे डील करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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हाई ब्लड प्रेशर

हाई ब्लड प्रेशर के दो मुख्य कारण होते हैं। पहला प्राइमरी, जिसमें समस्या या तो आनुवांशिक कारणों से होती है या फिर तनाव के कारण। लगभग 90 प्रतिशत लोगों में यह बीमारी प्राइमरी कारणों से ही होती है। सेकेंडरी कारण में, किसी अन्य अंग के विकार के कारण व्यक्ति हाई ब्लडप्रेशर का शिकार हो जाता है। हालांकि ऐसा केवल 10 प्रतिशत लोगों में देखा जाता है। इस रोग के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते हैं।

 

क्या खतरे होते हैं

इस रोग के गंभीर मामलो में ब्रेन हेम्रेज, हार्ट अटैक, किडनी फेल्यॉर, आंखें खराब होने वाला लकवा आदि होने की आशंका होती है।

 

क्या है इलाज

मरीज की जांच आदि कर फैमिली हिस्ट्री, उम्र, जुड़ी हुई बीमारियां व शारीरिक प्रकृति देखकर रोगी दवा दी जाती है। और जीवनशैली से जुड़े जरूरी बदलाव करने की सलाह दी जाती है।

कैसे करें बचाव

प्रतिदिन 5 ग्राम से अधिक नमक का सेवन न करें, अधिक चिकनाईयुक्त पदार्थ न खाएं, घी व नॉनवेज, तेज मसालों और फास्ट फूड आदि से परहेज करें। फल व सलाद को डाइट में शामिल करें। व्यायाम व मेडिटेशन को अपनी दैनिक क्रिया बनाएं।


उपरोक्त के अलावा थायरॉइड का बिगड़ा रूप भी ब्रेन हेम्रेज व अन्य गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। बदलती जीवनशैली और शरीर में एंटीबॉडीज बनने से यह रोग होता है। बदलती जीवनशैली इसका मुख्य कारण है, अतः इससे बचने के लिये खान-पान व दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव करें।

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Image Source - Getty

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