योगासन जो दिलाएं ओवरी पेन से राहत

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 10, 2013
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Quick Bites

  • ओवरी जिसे अंडाशय भी कहा जाता है, पेट के निचले हिस्से में स्थित होती है।
  • ओवरी में सिस्ट व ट्यूमर की समस्या होने पर महिलाओं को दर्द का अनुभव होता है।
  • कुछ योग का नियमित अभ्यास कर ओवरी के दर्द को कम किया जा सकता है।
  • मरजरी और भुजंगासन के नियमित अभ्यास से इसमें काफी लाभ होता है।

ओवरी (अंडाशय) में दर्द के कई कारण हो सकते हैं। ओवरी में सिस्ट व ट्यूमर की समस्या होने पर महिलाओं को दर्द का अनुभव होता है। ओवरी पेट के निचले हिस्से में स्थित होती है। अकसर जब भी ओवरी में दर्द महसूस होता है तो महिलाओं को लगता है कि उनके पेट में दर्द हो रहा है। ओवरी में दो तरह के दर्द होते हैं पहला एक्यूट जो कि कुछ दिनों में ठीक हो जाता है दूसरा क्रोनिक जो कि कई महीनों तक नहीं जाता है। हालांकि कुछ योग का नियमित अभ्यास कर ओवरी के दर्द को कम किया जा सकता है। आइए जानें योगा के जरिए ओवरी के दर्द से कैसे बचा जा सकता है।

 

मरजरी आसन

इस योग को कैट पोज के नाम से भी जाना जाता है। सबसे पहले किसी समतल स्थान पर एक दरी या कंबल बिछाएं। ओवरी के दर्द से निजात पाने के लिए अपने हाथों व घुटनों को जमीन से सटाकर रखें। ध्यान रहें घुटनों को कलाइयों,नितंबों, कोहनी व कंधों की सीध में रहें। सिर को आगे की ओर झुकाएं व आंखों को जमीन की तरफ रखें।उसके बाद सांस छोड़ते समय स्पाइन को ऊपर की तरफ उठाएं साथ ही अपने कंधों व घुटनों को भी उसी अवस्था में रखें। इसके बाद सांस लेते हुए पुन: पहली वाली अवस्था में आ जाएं। इस प्रक्रिया को दो या तीन बार दोहराएं।


सावधानियां -
कमर या घुटने की समस्या होने पर इस योग को ना करें।    

 


भुजंगआसन

इस आसान में जमीन पर उलटा लेट जाएं। पैर और हिप्स को समान रूप से फैलाकर रखें। हथेलियों को ज़मीन पर कंधों के सामने रखें। उंगलियों को बाहर की ओर फैलाएं, मध्यमा उंगली बीच में होनी चाहिए। सांस छोड़ते हुए पेड़ु को बाहर की ओर दबाएं।सांस लेते हुए धीरे धीरे मेरूदंड को अंदर की ओर मोड़ें। धीरे धीरे सिर, नाक और ठुड्डी को ज़मीन से उठाएं।सिर को छत की ओर रखकर सामने देखें।

सावधानियां - अगर पीठ या कमर में किसी प्रकार की कोई परेशानी अथवा तकलीफ है तो भुजंग आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए.


पश्चिमोत्तनासन

दोनों पैर सामने फैलाकर बैठ जाएं। एड़ी-पंजे आपस में मिलाकर रखें। दोनों हाथ बगल में सटाकर, कमर सीधी और निगाहें सामने रखें। अब दोनों हाथों को बगल से ऊपर उठाते हुए कान से सटाकर ऊपर खींचते हैं। इस स्थिति में दोनों हाथों के बीच में सिर होता है।अब सामने देखते हुए कमर से धीरे-धीरे रेचक करते हुए झुकते जाते हैं। अपने दोनों हाथों से पैर के अँगूठे पकड़कर रखते हैं और ललाट को घुटने से लगाते हैं। यथाशक्ति कुम्भक में रुकने के बाद सिर को उठाते हुए, पूरक करते हुए पूर्व स्थिति में आ जाते हैं।

सावधानियां - इस आसन में न तो झटके से कमर को झुकाएं और न उठाएं। सिर को जबरदस्ती घुटने से टिकाने का प्रयास न करें। शुरुआत में यह आसन आधा से एक मिनट तक करें, अभ्यास बढ़ने पर 15 मिनट तक करें। कमर या रीढ़ में गंभीर समस्या होने पर योग चिकित्सक की सलाह पर ही यह आसन करें।

 

Image Source - Getty

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