जानें परेशानियों का जाल या समाधान है मेडिकल इंश्योरेंस

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 11, 2017
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Quick Bites

  • मेडिकल इंश्योरेंस आपातकालीन फांड के तौर पर जरूरी।
  • लेकिन कई बार ये इंश्योरेंस बन जाता है जी का जंजाल।
  • इश्योरेंस कंपनी जरूरत के वक्त मोड़ लेती है मुंह।
  • इस स्थिति में इंश्योरेंस ओम्बुडसमैन ऑफिस चिट्ठी लिखें।

दिल्ली निवासी राज कुमार दुआ के पास सात लाख का मेडिकल कवर था। जबकि उसी कंपनी से उनके परिवार के चार अन्य सदस्यों ने भी 11 लाख रुपए का इंश्योरेंस करवाया हुआ था। दुआ का साथ कंपनी ने तब छोड़ दिया जब उन्हें सबसे अधिक पैसे की जरूरत थी। दुआ बताते हैं कि, मुझे निमोनिया की शिकायत हो गई थी और संक्रमण मेरे फेफड़ों तक पहुंच गया था जिसकी वजह से हार्ट अटैक की स्थिति सामने आ गई थी। मैं वेंटीलेटर पर था। वहीं मेरे बच्चे अस्पताल, बैंक और इंश्योरेंस कंपनी के चक्कर लगा रहे थे। अक्टूबर से लेकर अब तक उस इंश्योरेंस कंपनी ने दुआ को उनके इंश्योरेंस के पैसे नहीं दिए हैं।

ये हाल केवल दुआ का ही नहीं है, बल्कि ऐसा वाकया दूसरे लोगों के साथ भी हो रहा है। जीवन बीमा, लाइफ पॉलिसी, हेल्थ इंश्योरेंस... आदि इंश्योरेंस लोग इमरजेंसी जरूरत के लिए करवाते हैं। लेकिन जब ये इमरजेंसी की जरूरत परेशानियों का सबब बन जाए तब आप क्या करेंगे? इसमें हैरान होने वाली कोई बात नहीं है। इंश्योरेंस से जुड़ी धोखा-धड़ी की खबर आए दिन समाचारों में भी देखने-सुनने और पढ़ने को मिलती है। इसकी ऊपर कई फिल्म भी बनी है। आइए जाने इंश्योरेंस से जुड़ी सारी अच्छी और बुरी बारतों के बारे में।

हेल्थ इंश्योरेंस

इंश्योरेंस का जाल

हर कोई अपनी और अपनों की जान की सलामती के लिए मेडिकल इंश्योरेंस करवाता है। लोग इंश्योरेंस लेने समय यही सोचे हैं कि कम से कम ये दुर्घटना या जरूरत के वक्त सहायक होगा या इंश्योरेंस के होते हुए इलाज के दौरान आर्थिक तंगी की हालत तो नहीं होने पाएगी। लोग इंश्योरेंस के रहते हुए ये समझते हैं कि इससे अपनों को बेहतर से बेहतर इलाज मिल पाएगा। लेकिन ऐसा होता है क्या?

कोई भी डॉक्टर, अस्पताल और मेडिकल स्टोर के चक्कर में नहीं फंसना चाहता होगा। लेकिन जरा सोचिए जब आपने अपने किसी जानने वाले के बेहतर इलाज के लिए उसे बहुत ही अच्छे और बड़े अस्पताल में भर्ती करवाया हो और उस वक्त अगर आपकी इंश्योरेंस कंपनी आपको पैसे देने से इंकार कर दे तो..?  उस समय सिवाय अपने तरफ से पैसे की जरूरतों को पूरा करने के अलावा कोई तरीका नहीं होगा।

 

आप ये करें

मेडिकल इंश्योरेंस को लेकर लेकर आपको कोई दिक्कत हो रही है, तो आईआरडीए के साथ इंश्योरेंस ओम्बुडसमैन ऑफिस को चिट्ठी लिखें। इसके अलावा इंश्योरेंस कंपनी कंज्यूमर कोर्ट में टीपीए (थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेशन जो कि कैशलेस इंश्योरेंस के लिए जरूरी होता है) के खिलाफ केस भी दायर कर अपना हक हासिल कर सकते हैं।

मेडिकल इंश्योरेंस लेने से पहले इन मुद्दों पर ध्यान दें-

  1. कैशलेस इंश्योरेंस से आपको सुकून जरूर मिलता है, लेकिन याद रहे कि वो भी इंश्योरेंस के नेटवर्क वाले अस्पताल में इस सुविधा का लाभ उठाया जा सकता है।
  2. अस्पताल में एडमिट होने से पहले रोजाना खर्च की शर्तों को जांच लें। क्योंकि कई बार अस्पताल भी मनचाहे पैसे वसूलते हैं जिस कारण इंश्योरेंस कंपनी मना कर देती हैं।
  3. इंश्योरेंस लेने से पहले अच्छे से जांच लें क्योंकि कोई भी इंश्योरेंस कंपनियां 100 फीसदी कैशलेस की सुविधा वाले प्लान मुहैया नहीं कराती हैं।
  4. पॉलिसी लेने से पहले में कैशलेस लेनदेन की सुविधा जरूर जांच। कई बार इंश्योरेंस कंपनियां कैशलेस सुविधाएं देने से मुंह मोड़ लेती हैं।
  5. अपने पॉलिसी में किन बीमारियों का इलाज समावेश नहीं किया गया है और इलाज के खर्च की सीमा को अच्छी तरह से जांच लें। इसी सेक्शन से ज्ञात होता है कि आपको क्या हासिल होगा।

 

इसके अलावा समाधान

इश्योरेंस कंपनी और पुलिस केस के चक्कर से बचना चाहते हैं तो पैसे खुद ही आपातकालीन स्थिति के लिए पैसे बैंक में जमा करवाते रहें। क्योंकि कंपनी बड़ी होती है और इंडिया में आपको भी मालुम है कि कोर्ट केस के फैसले आने में ही कई साल लग जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि इंश्योरेंस कंपनी को हर साल जमा करवाने वाले पैसे खुद के पास ही आपातकालीन फंड के नाम से जमा करवाएं। इससे आपको दुर्घटना के अलावा भी सारी आपातकालीन समस्याओं के लिए आपके पास पैसे होंगे। 

 

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