मामूली समझ इन 3 चीजों को ना करें इग्नोर, हो सकती है किडनी फेल

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 05, 2017
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Quick Bites

  • किडनी प्रत्यारोपण के बाद थोड़ा बहुत इंफेक्शन होना सामान्य है।
  • क्रोनिक किडनी की बीमारी किसी भी इलाज से पूरी तरह ठीक नहीं हो सकती।
  • किडनी के प्रत्यारोपण के बाद कुछ दीर्घकालिक समस्याएं भी देखने को मिलती हैं। 

इंसान के शरीर में दो किडनी होती हैं जिनका काम शरीर में खून से विषैले पदार्थ एवं अनावश्यक पानी निकालकर उसे साफ-सुथरा रखना होता है। क्रोनिक किडनी की बीमारी किसी भी इलाज से पूरी तरह ठीक नहीं हो सकती। अंतिम अवस्था में उपरोक्त बीमारियों का उपचर केवल डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण से ही संभव है लेकिन इसके कई जोखिम कारक भी हैं। आइए जानते हैं उनके बारे में-

संक्रमण

किडनी प्रत्यारोपण के बाद थोड़ा बहुत इंफेक्शन होना सामान्य है। यह संक्रमण आगे चलकर यूटीआई, सर्दी-जुकाम व फ्लू का रुप ले लेते हैं। लेकिन अगर गंभीर संक्रमण जैसे निमोनिया व वाइरल इंफेक्शन होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। 

रक्त का थक्का जमना

कुछ मामलों में प्रत्यारोपित किडनी में ब्लड क्लॉट की समस्या हो जाती है। इस अवस्था में धमनियों में रक्त का थक्का जम जाता है। ऐसी समस्या कुछ ही किडनी प्रत्यारोपण में देखी जाती है। इस समस्या के निवारण के डॉक्टर दवाओं के जरिये इस क्लॉट को ठीक करने की कोशिश करते हैं। अगर दवाओं से क्लॉट को ठीक नहीं हो पाता है तो प्रत्यारोपित की गई किडनी को हटाना पड़ता है।  



 

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धमनी का संकरा होना

कुछ मामलों में धमनी प्रत्यारोपित किडनी को संकरा कर देती है इस अवस्था को ‘धमनी-रोग’ कहते हैं। यह रोग प्रत्यारोपण के एक महीने या एक साल बाद भी हो सकता है। यह समस्या रक्तचाप के बढ़ने से होता है जो कि काफी खतरनाक है। इस समस्या को दूर करने के लिए सर्जरी की मदद ली जा सकती है।

यूरीन की समस्या

किडनी प्रत्यारोपण के बाद यूरीन की समस्या होना सामान्य है। यह समस्या तब होती है जब मूत्रनली ( वह नली जो यूरीन को किडनी से ब्लैडर तक ले जाती है) ऊतकों के क्लॉट व ऑपरेशन के समय व उसके बाद निकलने वाले द्रव्य से ब्लॉक हो जाती है। यह समस्या होने पर मरीज में बुखार, पेट के एक तरफ दर्द, यूरीन में ब्लड जैसे लक्षण देखे जाते हैं। 

मधुमेह

किडनी के प्रत्यारोपण के बाद कुछ दीर्घकालिक समस्याएं भी देखने को मिलती है मधुमेह उनमें से एक है। शरीर में ग्लूकोज का लेवल बढ़ जाने के कारण मरीज में यह समस्या देखने को मिलती है। मरीज को ज्यादा प्यास लगना, रात में बार-बार यूरीन की समस्या व थकान होना इसके मुख्य लक्षण हैं। लाइफस्टाइल में बदलाव करके मरीज इस समस्या से बच सकते हैं।

इसके अलावा उच्च रक्तचाप भी एक ऐसी समस्या है जो किडनी के प्रत्यारोपण के बाद देखी जा सकती है। कई लोग जिनका किडनी ट्रांसप्लांट किया जाता है उनमें पहले से ही उच्च रक्तचाप की समस्या होती है। ऐसे में रोगी की हालत और खराब हो सकती है।

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