जानें कितना स्‍मार्ट है आपका अवचेतन

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 17, 2015
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Quick Bites

  • अवचेतन मस्तिष्क, मस्तिष्क का एक छोटा सा हिस्सा है।
  • अवचेतन मस्तिष्क पर मनोवैज्ञानिक भी कर रहे कई शोध।
  • मनोवैज्ञानिक अवचेतन को 'गेम-चेंजर' के तौर पर देख रहे हैं।
  • यह शोध 'कॉन्टिन्यूअस फ़्लैश सप्रेशन' तकनीक पर आधारित।

इंसान का दिमाग आज भी शोधकर्ताओं के लिए सबसे बड़ा रहस्य का विषय है जिसमें जटिलताएं बहुत सारी हैं लेकिन जवाब एक भी नहीं। ऐसे ही एक जटिलता का विषय हमेशा से हमारा अवचेतन रहा है। अवचेतन मस्तिष्क, मस्तिष्क का एक छोटा सा हिस्सा है जो आपकी कई चीजों को याद रखने का काम करता है। कई बार तो मनोविज्ञान में बहस भी होती है कि हमारे किन कामों के लिए चेतन मस्तिष्क जिम्मेदार है और किन कामों के लिए अवचेतन मस्तिष्क। अधिकतर मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि सबके मस्तिष्क के अंदर एक उप-मस्तिष्क होता है। इसे ही अवचेतन कहते हैं जो हमारे सोचने-समझने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है।

अवचेतन माइंड

कितना स्मार्ट अवचेतन

हाल ही में अवचेतन पर एक शोध "हमारा अवचेतन बुद्धु है या चालाक?" नाम से प्रकाशित हुई है। हमारा अवचेतन हमारी स्वतःस्फूर्त सामान्य क्रियाओं, सामान्य तथ्यों, चीज़ों की पहचान के लिए ज़िम्मेदार है और हम जिन क्रियाकलापों के आदी होते हैं उनको संचालित करने का काम करता है। ऐसे में इस बात से अंदाजा लगाया जाता है कि हमारा अवचेतन हमारी सोच से भी ज्यादा क्षमतावान है।

 

'गेम-चेंजर' अवचेतन

हाल ही में किए गए शोध से शोधकर्ताओं का मानना है कि मनुष्य का अवचेतन उन सभी मूलभूत बुनियादी कामों को कर सकता है जो सचेत प्रक्रिया द्वारा किए जाते हैं। ऐसे में मनोवैज्ञानिक अवचेतन को 'गेम-चेंजर' के तौर पर देख रहे हैं। यह अवचेतन के बारे में किया गया अब तक का सबसे बड़ा दावा है। फिलहाल इस शोध दल के वैज्ञानिक भी मानते हैं कि मनुष्य के अवचेतन को समझने और उसकी क्षमताओं के आकलन की दिशा में अभी लंबा सफ़र तय किया जाना है।

 

साधारण प्रयोग, असाधारण नतीजे

यह शोध 'कॉन्टिन्युअस फ़्लैश सप्रेशन' तकनीक को आधार बनाकर की गई है। 'कॉन्टिन्युअस फ़्लैश सप्रेशन' तकनीक में शामिल है कि इंसान के पास दो आँखें होती हैं और हमारा दिमाग़ दोनों आँखों से दिखने वाली चीज़ों के प्रतिरूप को मिलाकर हमारे लिए एक सुसंगत छवि का निर्माण करता है। इस तकनीक में दोनों आँखों के लिए अलग-अलग छवियाँ प्रस्तुत की गईं। ऐेसे में एक आँख को चटक रंग वाली वर्गाकार आकृतियां दिखाई जाती हैं और दूसरी आँख के सामने छिपे तौर पर ज़रूरी जानकारी पेश की जाती है जिसके प्रति व्यक्ति तत्काल सचेत नहीं होता। ऐसे में जानकारी अवचेतन दिमाग में बैठ जाती है जबकि सैद्धांतिक रूप से किसी छवि की प्रति पूरी तरह से सचेत होने में कई सेकेंड लग सकते हैं।

इस पर प्रयोग जारी रहेंगे। लेकिन इन प्रयोगों से मनवैज्ञानिकों का मान सकते हैं कि अचेवतन मस्तिष्क, चेतन मस्तिष्क से ज्यादा स्मार्ट है।


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