नींद में चलने वाले मरीज को जगाना उसके लिए हो सकता है खतरनाक

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 09, 2015
Quick Bites

  • खराब क्रोमोसोम 20 स्लीपवाकिंग की है वजह।  
  • इस दौरान जगाने पर इंसान हो सकता है बेहोश।
  • मरीज खुद को कर लेता है चोटिल या घायल।
  • पांच में से एक बच्चों को होती है ये समस्या।

दस वर्षीय अंजली को नींद में चलने की बीमारी थी लेकिन उसे सुबह उठने पर इस बारे में कुछ याद नहीं रहता था। मां-बाप भी उसे नींद में चलते हुए ही बिस्तर पर छोड़ कर आ जाते थे। लेकिन एक दिन नींद में चलने के दौरान जब उसे जगाया गया तो वो चिड़चिड़ा गई और पांच मिनट बाद बोहोश हो गई और उस बोहोशी के बाद ही नींद में चली गई।

नींद में चलना

ऐसे में समझा जा सकता है कि नींद में जगाने वाले के लिए किस हद तक खतरा हो सकता है। अब तक ऐसे कोई सबूत तो नहीं आए हैं कि नींद में चलने वाले को जगाना खतरनाक हो सकता है लेकिन इससे इंकार नहीं किया जा सकता। नींद में चलना एक अनुवांशिक बीमारी मानी जाती है जो हर पांच में से एक बच्चे को होती है। करीब 40 फ़ीसदी बच्चे कम से कम एक बार अपनी जिंदगी में नींद में जरूर चलते हैं।


स्लीपवाकिंग पर शोध

डीएनए में एक प्रकार के दोष के प्रभाव से ये समस्या लोगों को होती है। स्लीपवाकिंग पर हुए शोध के अनुसार यह स्थिति क्रोमोसोम 20 के खराब होने की वजह से होता है। वाशिंगटन स्कूल ऑफ मेडिसीन (वाशिंगटन यूनिवर्सिटी) की डॉ. क्रिस्टीना गर्नेट और उनकी टीम ने एक ही परिवार के 22 सदस्यों का परीक्षण कर ये नतीजे प्राप्त किए। इस परिवार के 9 सदस्य नींद में चलने की बीमारी से ग्रसित हैं। डॉ. गर्नट के अनुसार इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति से यह क्रोमोसोम की खामी उसके संतान तक पहुंचती है और इसकी सम्भावना लगभग 50% तक होती है।

वहीं इटली के मिलान स्थित निगुआरडा अस्पताल में हाल में हुए अध्ययन के अनुसार स्लीपवाकिंग के दौरान दिमाग का कुछ हिस्सा सक्रिय होता है, जबकि कुछ हिस्से नींद में होते हैं। ये दर्शाता है कि नींद में चलने की वजह इन दो स्थितियों में असंतुलन की स्थिति ही है। इस दौरान जगाना इस असंतुलन को और अधिक असंतुलित कर सकता है।


स्लीपवाकिंग के जोखिम

  • कर सकता है खुद को चोटिल - एक बार एक महिला स्लीपवाकिंग के दौरान नल से कांच के ग्लास में पानी भरने की कोशिश कर रही थी जो नल से टकरा कर टूट गया था, जिससे उसके आस-पास कांच के टुकड़े बिखर गए। जब उसे जगाया तो उसका पांव टूटे कांच में पड़ गया और वो जख्मी हो गई। जबकि उस दौरान उसे नींद में ही पानी पिलाकर, पकड़कर बिस्तर तक ले जाना चाहिए था।
  • स्लीपवाकिंग के दौरान हो सकते हैं बेहोश।
  • हो जाते हैं चिड़चिड़े- ये सबसे सामान्य कारण है नींद में चलने वाले को जगाने पर।  

 

इसका समाधान

अगर शख्स रोज रात को स्लीपवॉक कर रहा है तो मुश्किलें हो सकती हैं। ऐसे में नींद की बीमारी से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक माता-पिता को एक सप्ताह तक वह समय नोट करना चाहिए जब बच्चा नींद में चलने लगता है और इसके बाद उस समय से 15 मिनट पहले बच्चे को जगा देना चाहिए। साथ ही सम्मोहन इसका बेहतर इलाज है।

 

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