कितनी सुरक्षित है हेयर ग्राफ्टिंग

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 04, 2013
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Quick Bites

  • हेयर ग्राफ्टिंग को हेयर ट्रांसप्‍लांटेशन भी कहते हैं।
  • इससे गंजेपन से छुटकारा मिलता है।
  • हेयर ग्राफिंट के बाद कुछ दुष्‍प्रभाव भी होते हैं।
  • सिर में सूजन जैसे साइडइफेक्ट देखने को मिलते हैं।

हेयर ग्राफ्टिंग को हेयर ट्रांसप्‍लांटेशन भी कहते हैं। इस तकनीक का फायदा आज लाखों लोग उठा रहे हैं और गंजेपन से छुटकारा पा रहे हैं। झड़े हुए बालों को दोबारा उगाने में यह तकनीक बहुत कारगर साबित हो रही है। लेकिन हेयर ग्राफिंट के बाद इसके कुछ दुष्‍प्रभाव भी हो सकते हैं।

लाइफस्‍टाइल और खानपान के कारण लोगों के बाल बड़ी तेजी और जल्‍दी झड़ने लगे हैं। इसके अलावा बालों के झड़ने का कारण तनाव और प्रदूषण भी है। बालों के झड़ने की समस्‍या महिलाओं और पुरुषों में सामान्‍य रूप से होती है। आजकल बालों को जरूरी पोषक तत्‍व नही मिलने के कारण बचपन में ही बालों के झड़ने की समस्‍या होने लगी है।

हेयर ग्राफ्टिंग

जवान दिखने और समाज में खुद को प्रेजेंटेबल बनाए रखने के लिए हेयर ग्राफ्टिंग एक ऐसी आधुनिक तकनीक है जो बालों की समस्या का समाधान कर सकती है। वो दौर गया जब लोग ऑपरेशन के जरिए नकली बाल लगवाने से डरते थे। हेयर लॉस आज कोई बिमारी नहीं रह गई है और अब इससे निजाद पाना भी महंगा या तकलीफदेह नहीं है। यह तकनीक कितनी सुरक्षित हम आपको इसकी जानकारी दे रहे हैं।

 

हेयर ग्राफ्टिंग क्‍या है

फोलिक्‍यूलर माइक्रो हेयर ग्राफ्टिंग तकनीक को हेयर ट्रांसप्‍लांट की सबसे बेहतरीन तकनी‍क माना जाता है। इस तकनीक के जरिए इंसान के शरीर में आजीवन रहने वाले बालों की जड़ों को माइक्रो सर्जरी के द्वारा प्रत्‍यारो‍पित किया जाता है। खराब स्थिति में शरीर के 8 से 10 हजार बाल ऐसे होते हैं जो पुन: प्रत्‍यारोपित किये जा सकते हैं।

इस क्रिया के दौरान मरीज होश में रहता है और उसे दर्द बिलकुल नही होता है। इ‍स तकनीक के जरिए आदमी के बाल उसकी इच्‍छा के अनुसार ग्राफ्ट किये जा सकते हैं जो बाद में उगते रहते हैं। ऐसे लोग जो गंजेपन का शिकार हो चुके हैं, इस तकनीक का लाभ उठा सकते हैं। जिन लोगों की दाढ़ी, मूछें या भौहें, किसी कारण झड़ गई हैं वे भी इस तकनीक का लाभ उठा सकते हैं।


हेयर ग्राफ्टिंग के साइड इफेक्‍ट

हेयर ग्राफ्टिंग तकनीक से हेयर ट्रांसप्‍लांट कराने के बाद 1 से 3 सप्‍ताह के अंदर इसके कुछ साइड इफेक्‍ट दिख सकते हैं -

  • सिर में सूजन
  • आंखों के आसपास चोट
  • पपड़ी जमना
  • सिर के आसपास संवेदना की कमी
  • ट्रांसप्‍लांट वाली जगह पर खुजली

 

हेयर ग्राफ्टिंग से पहले इन बातों का ख्‍याल रखिए

चिकित्‍सक का चुनाव
हेयर ग्राफ्टिंग कराने से पहले चिकित्‍सक के बारे में पूरी जानकारी इकट्ठा कर लीजिए। ध्यान रखें कि डॉक्टर कैसा है यानी क्या डॉक्टर हेयर ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ है या फिर जनरल डॉक्टर। हेयर ट्रांसप्लांट के लिए सही और जानकार विशेषज्ञ का ही चुनाव करें क्योंकि यह काम बार-बार नहीं किया जा सकता।


सही क्लीनिक
यदि आप हेयर ग्राफ्टिंग कराने की सोच रहे हैं तो इस बात पर जरूर ध्यान दें कि आप किस क्लीनिक में यह करायेंगे। क्‍या उस क्‍लीनिक में सारी सुविधायें मौजूद हैं या नही, आपसे पहले वहां पर जितने लोगों ने हेयर ग्राफ्टिंग कराया है उनके बाल सही तरीके से उगे हैं या नही।


बजट में रहें
हेयर ग्राफ्टिंग कराने से पहले बजट का भी ध्यान रखें। दरअसल, हेयर ग्राफ्टिंग करवाना बहुत महंगा होता है, इसीलिए पहले पूरा बजट पूछ लें। तभी इस तरफ अगला कदम उठाएं।


तकनीकों की जानकारी
हेयर ग्राफ्टिंग से पहले इस पर पूरी जानकारी इकट्ठा कर लीजिए। किस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है उसकी जानकारी होनी चाहिए। हालांकि बाल प्रत्यारोपण के लिए नई तकनीकों में फॉलिक्यूलर यूनिट हेयर ट्रांसप्लांट (एफयूएचटी) और फॉलिक्यूलर यूनिट सेपरेशन एक्स्ट्रेक्शन (एफयूएसई) का अधिक इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि इनसे गंभीर से गंभीर स्थिति को आसानी से संभाला जा सकता है।


हेयर ग्राफ्टिंग के बाद बालों की अच्‍छे से देखभाल करनी चाहिए। उन्‍हें विटामिन, मिनरल और अन्‍य पोषक तत्‍वों की जररुत होगी तथा वही शैम्‍पू लगाएं जो डॉक्‍टर ने इस्‍तमाल करने को कहा हो।

 

 

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