ओवरियन कैंसर और सिस्ट, जानकारी है बचाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 08, 2014
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Quick Bites

  • महिलाओं में होने वाले कैंसरों में तीसरे नंबर पर आता है ओवरियन कैंसर।
  • ओवेरियन सिस्ट की समस्या सभी स्त्रियों को कभी न कभी होती ही है। 
  • ओवरियन कैंसर का इलाज सर्जरी व कीमोथैरेपी से किया जा सकता है।
  • सिस्ट 2-3 महीने के मासिक चक्र के बाद अपने आप ठीक हो जाते हैं।

आज पूरे विश्व के साथ भारतीयों में भी कैंसर रोग तेजी से बढ़ रहा है। इस रोग से महिलाएं भी अछूती नहीं है। महिलाओं में सबसे अधिक होने वाले कैंसरों में पहले पायदान पर ब्रेस्ट कैंसर, दूसरे पर सर्वाइकल कैंसर और तीसरे नंबर पर ओवेरियन यानी यूटेरस कैंसर आता है। जानकारी का अभाव इस समस्या की गंभीरता को और बढा देता है, चलिए जानें क्या हैं ओवरियन कैंसर और सिस्ट। 

Ovarian Cancer And Cyst


ओवेरियन या यूटेरस कैंसर

ओवेरियन यानी यूटेरस कैंसर में यूटेरस यानी अंडाशय कैंसर में ओवरी में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाती हैं। यूटेरस कैंसर होने पर गर्भधारण में समस्या होने की आशंका बढ़ जाती है। वहीं ओवरियरन कैंसर में गर्भाशय और ट्यूब्स डैमेज होने लगती हैं। आइए जानें ओवरियन कैंसर और सिस्ट के बारे में कुछ और बातें।

 

ओवेरियन सिस्ट

ओवेरियन सिस्ट की समस्या सभी स्त्रियों को उनके जीवनकाल में कभी न कभी जरूर होती है। दरअसल ओवरी के भीतर द्रव्य से भरी थैलीनुमा संरचनाएं होती हैं। हर महिने पीरियड के दौरान इस थैली के आकार की एक संरचना उभरती है, जो फॉलिकल के नाम से जानी जाती है। इन फॉलिकल्स से एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्ट्रॉन नाम के हॉर्मोस निकलते हैं, जो ओवरी से मैच्योर एग की निकासी में सहायक होते हैं। कुछ मामलों में पीरियड की निश्चित अवधि खत्म हो जाने के बाद भी फॉलिकल का आकार बढता जाता है, जिसे ओवेरियन सिस्ट कहा जाता है। सिस्ट के कई कारण हो सकते हैं जैसे, आनुवंशिक प्रभाव, मोटापा, कम उम्र में पीरियड की शुरुआत, गर्भधारण में अक्षमता तथा हॉर्मोन्स का असंतुलन आदि।

 

 ओवरियन कैंसर और सिस्ट के बारे में कुछ रोचक जानकारियां

 

  • क्या आप जानते हैं भारत में लगभग हर 57 में से एक महिला यूटेरस कैंसर से ग्रसित है।
  • ओवरियन कैंसर को नियंत्रित करना मुश्किल नहीं है, लेकिन उसके लिए जरूरी है कि कैंसर की आरंभिक अवस्था का पता लगाया जाये।
  • यदि समय से पहले या फिर शुरूआती अवस्था में ओवरियन कैंसर को पहचान लिया जाए तो तकरीबन 90 फीसदी मामलों को कंट्रोल किया जा सकता है।
  • ओवरियन कैंसर का इलाज सर्जरी व कीमोथैरेपी से संभव है।
  • जब ओवरी में छोटे-छोटे सिस्ट बनने लगते हैं तो यह पॉलिसिस्टिक ओवेरियन डिजीज कहलाती है। इस बीमारी में गर्भधारण में समस्या आती हैं।
  • ओवरियन कैंसर का 40 की उम्र पार कर चुकी महिलाओं में होना आम बात है लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि कम से कम 3 फीसदी महिलाएं ओवरियन कैंसर की चपेट में जल्दी ही आ जाती हैं।
  • मेनोपोज के बाद ओवरी की कार्यक्षमता कम हो जाती है जिससे यूटरस कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में आपको समय-समय पर जांच कराते रहना चाहिए।
  • आमतौर पर ओवरियन कैंसर कुछ बीमारियों जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप,मोटापे, अत्यधिक तनाव, मेनोपोज, एनीमिया या इसी तरह के कारणों से होता है।
  • कुछ आनुवांशिक कारण हों तो कई बार प्रेगनेंसी के दौरान ओवरियन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। 30 साल की उम्र में पहली बार मां बनने वाली महिलाओं में भी ओवरियन कैंसर का खतरा दोगुना हो जाता है। इतना ही नहीं ब्रेस्ट कैंसर से पीडि़त महिलाओं को भी इस कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

 

ओवेरियन कैंसर के लक्षण


  • नियमित रूप से पीरियड्स न होना।
  • शरीर पर कहीं भी अनचाहे बालों का उगना।
  • गर्भधारण के दौरान समस्या होना।
  • अचानक मोटापा बढ़ना।
  • पेट में भरीपन या फुलाहुआ महसूस होना।
  • बार-बार पेट में दर्द होना।
  • बहुत अधिक गैस बनना, दस्त लगना।
  • पेल्विक पेन की शिकायत होना, कमर दर्द या फिर खट्टी डकारें आना।
  • संभोग के दौरान दर्द की शिकायत होना।
  • जरूरत से ज्यादा बार पेशाब जाना।
  • अचानक वजन कम होना।
  • वैजाइनल ब्लीडिंग होना।

 

सिस्ट के लक्षण

 

  • पेट के निचले हिस्से में रुक-रुक कर दर्द और भारीपन महसूस होना।
  • पीरियड का अनियमित और अधिक मात्रा में ब्लीडिंग होना। 
  • व्यायाम या सहवास के बाद पेल्विक क्षेत्र में दर्द महसूस होना। 
  • जी मिचलाना। 
  • वजाइना में दर्द। 

 

सिस्ट का उपचार उसके आकार और लक्षणों की गंभीरता के आधार पर किया जाता है। आमतौर पर छोटे आकार वाले सिस्ट दो-तीन महीने के मासिक चक्र के बाद अपने आप ठीक हो जाते हैं। लेकिन यदि ये 2 या 3 महीने के बाद भी दूर नहीं होते या मेनोपॉज के बाद भी यह समस्या हो तो बिना देर किए स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलना चाहिए।


बात अगर ओवेरियन कैंसर की करें तो इसके इलाज के लिए सर्जरी के साथ-साथ कीमोथेरेपी भी होती है। सिर्फ सर्जरी कर निश्चिंत नहीं होना चाहिए। जरूरी है कि बीच-बीच में इसकी नियमित जांच होती रहे, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही बरतने पर कैंसर दोबारा हो सकता है। अगर समय रहते इस रोग की पहचान कर ली जाए तो मरीज को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।

 

 

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