कड़ाही में बचे तेल का प्रयोग किस तरह है नुकसानदेह

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 17, 2015
Comment

हेल्‍थ संबंधी जानकारी के लिए सब्‍सक्राइब करें

Like onlymyhealth on Facebook!

Quick Bites

  • खाना पकाने के लिए तेल महत्‍वपूर्ण होता है।
  • बचे तेल का इस्‍तेमाल नुकसानदेह होता है।
  • तेल में कैंसर के कारक तत्व आ जाते हैं।
  • फ्री रेडिकल्‍स का निर्माण होने लगता है।

सच कहें तो इंडियन कुकिंग तेल के बिना अधूरी सी लगती है। गरमागरम खस्‍ता कचौड़ी, आलू पूरी, समोसा और छोले भटूरे..........आमतौर पर संडे का सुपर नाश्‍ता माना जाता है। उस पर अगर त्‍योहार या पार्टी हो तो सोने पर सुहागा। हममें से कितने ही लोग कड़ाही में बचे तेल का इस्‍तेमाल दोबारा जरूर करते हैं। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि ऐसा करना सेहत के लिए कितना नुकसानदायक हो सकता है। अगर आप भी कड़ाही में बचे तेल का इस्‍तेमाल अक्‍सर दोबारा करती है तो यह  आर्टिकल आपके लिए ही है।

deep fry in hindi
खाना पकाने के लिए तेल महत्‍वपूर्ण होता है, लेकिन डीप फ्राई करने के बाद कड़ाही में बचे तेल का महिलाओं द्धारा बखूबी से इस्‍तेमाल, आहार विशेषज्ञों के अनुसार कैंसरस हो जाता है। जीं हां बार-बार तेल उबालने से उसमें कैंसर के कारक वाले तत्व आ जाते हैं। इससे गॉल ब्लैडर या पेट के कैंसर का खतरा पैदा हो जाता है।


सेहत के लिए खतरनाक बचा हुआ तेल

खाना बनाने के लिए एक ही तेल का इस्‍तेमाल बार-बार होने से उसमें फ्री रेडिकल्‍स का निर्माण होने लगता है। जो कई प्रकार की बीमारियों का कारण बनता है। साथ ही बार-बार तेल गर्म करने से उसकी गंध खत्म हो जाती है और उसमे एंटी-ऑक्सीडेंट्स भी नहीं बचते जिसके चलते उसमें कैंसर पैदा करने वाले तत्व पैदा हो जाते हैं। और तो और ऐसे में जब इस तेल को दोबारा इस्तेमाल में लाया जाता है तो इसमें मौजूद तत्व खाने में चिपककर स्वास्थ्य के लिए खतरा बनने लगते हैं। ऐसे खाने से कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है। साथ ही एसिडिटी, दिल की बीमारी, अल्जाइमर और पार्किसंस समेत तमाम बीमारियों की आशंका बनी रहती है।


अलग-अलग तेल का इस्‍तेमाल

एक शोध के अनुसार जब तेल को गर्म किया जाता है तो उसमें एचएनई पदार्थ बनने शुरू हो जाते है और तेल को जितनी भी बार गर्म किया जाता है तो एचएनई (विषाक्‍त पदार्थ) उतने ही ज्‍यादा बनते जाते हैं। एचएनई लिनोलेइक एसिड से भरपूर तेलों में ज्‍यादा बनते हैं। आमतौर ग्रेपसीड ऑयल, सनफ्लावर, कॉर्न ऑयल जैसे तेलों में लिनोलेइक एसिड की मात्रा अधिक होती है। इन तेलों को कुकिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन डीप फ्राई करने के लिए नहीं करना चाहिए।


जांच करके इस्‍तेमाल करें

बचा हुआ तेल इस्तेमाल करने से पहले उसके रंग और गाढ़ेपन की जांच अवश्‍य करनी चाहिए। अगर तेल चिपचिपा होने के साथ गहरे रंग का हो गया है और उसमें से अजीब सी गंध भी आ रही हो तो बिना कुछ सोचे उसे फेंक दें। उसका इस्तेमाल भूल कर भी न करें।


तेल के उपयोग के दौरान इन बातों का ध्यान रखें

  • ऑलिव ऑयल लो स्‍मोक ऑयल है इसलिए इसे डीप फ्राई के लिए इस्तेमाल न करें।
  • तेल का वास्‍तविक रंग बदलने पर उसे इस्‍तेमाल न करें।
  • एक साथ या एक बार में कई तेल एक साथ इस्‍तेमाल करने से बचें।
  • एक समय में एक ही तेल का उपयोग करें।



इस लेख से संबंधित किसी प्रकार के सवाल या सुझाव के लिए आप यहां पोस्‍ट/कमेंट कर सकते हैं।

Image Source : Getty
Read More Articles on Healthy Eating in Hindi

Write a Review Feedback
Is it Helpful Article?YES104 Votes 16298 Views 0 Comment
प्रतिक्रिया दें
disclaimer

इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जि़म्‍मेदारी ओन्‍लीमाईहैल्‍थ की नहीं है । डिस्‍क्‍लेमर:ओन्‍लीमाईहैल्‍थ पर उपलब्‍ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। हमारा उद्देश्‍य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।

संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर